योगा और मेडिटेशन के 5 फायदे, कम होता है कैंसर का रिस्क

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 16, 2017
Quick Bites

  • योगा शरीर में उन मॉलिक्यूल्स को बनने से रोकता है, जिनसे इन्फ्लेमेशन ज़्यादा हो
  • स्ट्रेसफुल सिचुएशन्स में जीन्स, इम्यून सिस्टम इंफेक्शंस से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है
  • डीएनए बदलकर कई घातक बीमारियों को दूर किया जा सकता है

हमारी बॉडी के इम्यून सिस्टम का एक हेल्दी फंक्शन इन्फ्लेमेशन भी है। लेकिन, बैक्टीरिया, वायरस या ट्रॉमा से जब बॉडी टीश्यूज़ पर असर पड़ता है, तो इम्यून सिस्टम इंफेक्शन से लड़ नहीं पाता और ब्लड वेसेल्स में सूजन आ जाती है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने खोज निकाला कि एंटी-इन्फ्लेमेट्री जीन्स से बॉडी न सिर्फ एक्टिव और हेल्दी रहती है, बल्कि उम्र भी लंबी होती है। सिर्फ यही नहीं, एंटी- इन्फ्लेमेट्री जीन्स कैंसर के रिस्क को भी कम करती है। यह सुनने और समझने में जितना मुश्किल लग रहा है, इसका उपाय उतना ही आसान है। जी हां, योगा और मेडिटेशन में छिपे हैं ह्यूमन बॉडी के कुछ ऐसे सीक्रेट्स जो हमारा डीएनए बदल सकते हैं और हमें कई घातक बीमारियां, जैसे कैंसर से दूर रख सकते हैं। आइए जानते हैं, योगा और मेडिटेशन के ऐसे अद्भुत फायदों के बारे में।

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कैंसर का रिस्क कम होता है

दुनिया में आए दिन ह्यूमन बॉडी को समझने के लिए नई रिसर्च होती हैं। एक रिसर्च में सामने आया कि योगा और मेडिटेशन से कैंसर के रिस्क को आसानी से कम किया जा सकता है। जो लोग योगा और मेडिटेशन के ज़रिए अपने माइंड और बॉडी पर कंट्रोल पा सकते हैं, उनकी जीन्स में वो मॉलिक्यूल्स कम उत्पन्न होते हैं, जिनसे इंफ्लेमेशन ज़्यादा हो। इंफ्लेमेशन कम होगी, तो कैंसर का रिस्क भी कम हो जाएगा।

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मेंटल हेल्थ इम्प्रूव होती है

आज के दौर में कई लोग योगा और मेडिटेशन का लुत्फ उठा रहे हैं, और इसके हेल्थ बेनिफेट्स एंजॉय कर रहे हैं। लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका फायदा हमारे शरीर में मॉलिक्यूलर लेवल से ही होने लगता है। यानी, योगा और मेडिटेशन से शरीर का जेनेटिक कोड भी बदला जा सकता है। इसका एक फायदा मेंटल हेल्थ में इम्प्रूवमेंट भी है। मेमोरी शार्प होती है, आप सही तरह से फोकस कर पाते हैं और एकाग्रता भी बढ़ती है।

स्ट्रेस लेवल कम होता है

आज के ज़माने में हमें कई ऐसी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है जिनके बारे में हमने कभी नहीं सुना था। इसका सबसे बड़ा कारण है हमारा लाइफस्टाइल और 24घंटे स्ट्रेस में रहना। योगा और मेडिटेशन अगर सही ढंग से किया जाए, तो स्ट्रेस नाम की ज़िंदगी से चला जाएगा। यानी यह एक ऐसा एंटीडिप्रेसेंट है, जिससे सिर्फ फायदा ही फायदा है। इस प्रोसेस में लंबी, गहरी सांस ली जाती है और साथ ही शरीर की स्लो मूवमेंट्स भी होती है। ऐसे में दवाईयों का खर्चा भी बचता है।

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डाइट में इम्प्रूवमेंट

स्टडीज़ में यह भी सामने आया कि योगा और मेडिटेशन प्रैक्टिस से हमारी खाने-पीने की आदत में भी सुधार आता है। हमारा रुझान हेल्दी फूड की तरफ बढ़ने लगता है। डाइट इम्प्रूव होती है, इंसान खुश रहने लगता है। इससे कॉन्फिडेंस भी आता है और अपनी बॉडी का ख्याल रखने की इच्छा भी बढ़ती है।

बॉडी की फ्लेक्सबिलटी बढ़ती है

आउटडोर एक्टिविटीज़ न के बराबर और सारा दिन कम्प्यूटर के सामने बैठने के चलते, शरीर कई बीमारियों से घिर जाता है। उम्र से पहले से शरीर में कई तरह की दर्द शुरू हो जाती हैं।  वर्कआउट करने का समय नहीं मिल पाता। लेकिन अगर थोड़ा ध्यान हम अपने शरीर पर दें, तो इसका फायदा हमें ही होगा। हर रोज़ थोड़ी देर योगा और मेडिटेशन करने से न सिर्फ बॉडी की फ्लेक्सबिलटी बढ़ती है, बल्कि ऑफिस में आउटपुट भी अच्छा निकलकर आता है।

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