सामान्य होते हैं डायबिटीज न्यूरोपैथी के लक्षण, जानें कारण और उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 13, 2018
Quick Bites

  • डायबिटीज का न्यूरो प्रॉब्लम्स से पुराना कनेक्शन है।
  • मरीजों को लगातार अपनी जांच कराते रहना चाहिए।
  • नसों की विकृति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।

डायबिटीज के कारण उत्पन्न होने वाली नसों की विकृति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें नसों की शक्ति कमजोर हो जाती है। मुख्य रूप से यह पैरों को प्रभावित करता है। इसमें पैरों में झुनझुनाहाट और सुन्नता का आभास होता है। समय व्यतीत होने के साथ पैरों की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है। डायबिटीज का न्यूरो प्रॉब्लम्स से पुराना कनेक्शन है। ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं होने पर मरीजों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टर्स का कहना है कि मरीजों को लगातार अपनी जांच कराते रहना चाहिए। जरा सी लापरवाही उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। अगर इसका समय पर उपचार न किया जाये तो पैरों को काटने की नौबत तक आ सकती है। 

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डायबिटिक न्यूरोपैथी के लक्षण

  • पैरों या तलवों में दर्द होना 
  • पैरों में झनझनाहट या जलन होना
  • पैरों में बिजली का झटका जैसा महसूस होना
  • पैरों में अधिक गर्मी या सर्दी महसूस होना
  • पैरों में ऐंठन हो सकती है
  • चलते समय पैरों में दर्द होना
  • पैरों के तलवों में जलन।
  • पैरों में सुन्नपन
  • त्वचा के रंग में परिवर्तन।
  • पैरों और उंगलियों का टेढ़ापन।

क्या हैं इसके कारण

  • उपापचय से संबंधित कारणः जैसे-ब्लड ग्लुकोज का बढना, डायबिटीज की अवधि, असामान्य ब्लड कोलेस्टेरोल औऱ दूसरे लिपिड का स्तर, औऱ संभवतः इंसुलिन का निम्न स्तर।
  • न्यूरोवैस्कुलर कारणः रक्त नलिकाओं की क्षति, जो नर्व्स को ऑक्सीजन और दूसरे पोषक तत्व की आपूर्ति करते हैं।
  • स्वतः प्रतिरक्षक तथ्य जो नर्व्स में सूजन पैदा कर सकते हैं।
  • कार्यप्रणाली से संबंधित तथ्य, जैसे-कार्पेल टनेल सिंड्रोम, जिससे नर्व्स को चोट पहुंच सकती है
  • वंशानुगत विशेषताएं नर्व रोगों की संभावना बढा सकती है
  • जीवनशैली से जुड़े तथ्य, जैसे-धुम्रपान, अल्कोहल लेना, और ऐसी जीवनशैली-जिसमें देर तक बैठे रहना पड़ता हो।

अचानक शुरू नहीं होती ये दिक्कत

डायबिटीज के मरीजों की न्यूरो संबंधी दिक्कतें करीब पांच साल बाद शुरू होने लगती हैं। इसलिए मरीज को बार-बार जांच कराना जरूरी होता है। मरीज को पैरो में जलन, झुनझुनाहट, दर्द आदि की शिकायत होने लगती है। शरीर के किसी भी अंग में ऐसी दिक्कत हो सकती है। ट्रीटमेंट नहीं लेने पर ये अंग काम करना बंद कर देते हैं और इन्हें काटने की नौबत आ सकती है। डॉक्टर्स का कहना है कि ब्लड शुगर के मरीजों में पचास से साठ फीसदी मरीज ऐसी प्रॉब्लम से जूझते हैं।

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ये है बचाव का तरीका

मधुमेह के मरीज कुछ सावधानियां बरतकर पैरों की विकलांगता के खतरे से बच सकते है। इए मरीजों को अपनी-अपनी शुगर को नियंत्रित करना चाहिए। ऐसे रोगियों को हमेशा एक विशेष प्रकार के मुलायम गद्देदार (सिलिकॉन पैड वाले) जूते पहनने चाहिए। साथ ही, सिलिकॉन रबर का पैतावा डालकर जूते पहनने चाहिए जिससे जोड़ों या शरीर के अन्य भागों पर अधिक दबाव न पड़े। अत्यंत ठंडे और गर्म माहौल से बचना चाहिए।

ये टेस्ट हैं असरदार

सामान्यत-डाइबिटिक फुट में मरीज को देखकर रोग का पता लग जाता है, पर कुछ विशेष स्थितियों में विशेष जांचें जैसे एनसीवी कंप्लीट शुगर प्रोफाइल, एक्सरे और वैस्कुलर डॉप्लर जांचें करायी जाती हैं। इन सभी जांचों और मरीज की रोग की स्थिति के अनुसार अनेक उपचार संभव हैं। यदि किसी कारणवश पैरों में अल्सर बन गया है, तो ऐसे मरीजों को इंसुलिन इंजेक्शन के प्रयोग के साथ ही विशेषज्ञ से देरी किए बगैर सलाह लेना चाहिए।

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