कोरोना से बचने के लिए रोजाना करें योगासन, एक्‍सपर्ट से जानें योग करने का पूरा प्रॉसेस

कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में घर में आप कुछ आसान योगासनों के द्वारा अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं और फेफड़े मजबूत बना सकते हैं।

सम्‍पादकीय विभाग
योगाWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Apr 03, 2020Updated at: Jun 15, 2021
कोरोना से बचने के लिए रोजाना करें योगासन, एक्‍सपर्ट से जानें योग करने का पूरा प्रॉसेस

आजकल कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए घर से बाहर निकलने पर थोड़ी पाबंदियां हैं। ऐसे में अगर आप घर पर ही योगासनों का अभ्यास करें, तो न सिर्फ शारीरिक रूप से एक्टिव रह सकते हैं, बल्कि संक्रमण के खतरे को भी कम कर सकते हैं। भारत में योगासनों को हजारों साल से स्वस्थ जीवन के लिए एक जरूरी अभ्यास माना गया है। इस लेख में आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्री स्कूल ऑफ योग की सीईओ और इंडियन योग एसोसिएशन की महासचिव कमलेश बरवाल विस्तार से बता रहे हैं कि कोविड संक्रमण से बचाव के लिए और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आपको किस तरह योगासनों का अभ्यास करना चाहिए।

महर्षि पतंजलि कहते हैं, "हेयम्, दुःखम्, अनागतम्", अर्थात् योग का उद्देश्य दुख को आने से पहले ही मिटा देना है। योगासनों भले ही आपके कोविड संक्रमण की चपेट में आने के खतरे को न कम कर सके, लेकिन इसका नियमित अभ्यास करने से आपके फेफड़े इतने शक्तिशाली हो सकते हैं और इम्यूनिटी इतनी मजबूत हो सकती है कि संक्रमण के कारण आपको खतरनाक स्थितियों का सामना न करना पड़े।

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योग से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

योग को प्राकृतिक रूप से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। हाल ही में बिहेवियरल मेडिसिन पत्रिका में छपे एक शोध के अनुसार, योग आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और शरीर में जलन को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

योग के निरंतर अभ्यास से तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन्स में प्रभावशाली रूप से कमी आती है, तंत्रिका तंत्र मजबूत बनता है और यह लसिका प्रणाली (लिमफैटिक सिस्टम) को क्रियाशील करता है। साथ ही साथ यह शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालता है। प्रतिदिन किए जाने वाले कुछ योगाभ्यास चिंता को कम और मन को शांत करते हैं, जिसके चलते नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है। एक अच्छी नींद रोग निवारक है और एक स्वस्थ प्रतिरोधक तंत्र को बनाए रखने में बहुत बड़ा योगदान देती है।

कोरोना वायरस से बचने के लिए योगासन

कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए यहां कुछ योगाभ्यास दिए गए हैं, जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। श्रीश्री योग प्रोटोकॉल में आसन, प्राणायाम और ध्यान शामिल हैं। इस प्रोटोकॉल में दिए गए आसनों को इन श्रेणियों में बांटा जा सकता है, जैसे- उलटना- पलटना, अंगों को मोड़ना और छाती को फैलाना।

उलटने-पलटने वाला कोई भी आसन रक्त के प्रवाह में सुधार करता है और लसिका प्रणाली की कार्यकारिणी को बेहतर बनाता है, जिसमें शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिसके चलते प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है। लसिका तंत्र का सबसे पहला कार्य लसिका को पूरे शरीर में प्रवाहित करना है। यह एक प्रकार का द्रव्य होता है, जिसमें संक्रमण से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं। उलटने-पलटने वाले आसन विशेष रूप से हमारी नाड़ियों और फेफड़ों में कफ के जमाव को हटाते हैं और उनमें संक्रमण की संभावना को कम कर देते हैं। मस्तिष्क में हुए रक्त प्रवाह में सुधार के कारण, मन में विश्राम और शांति की भावना स्वत: उत्पन्न हो जाती है, जो इन अभ्यासों को करने से होता है। 

हालांकि, उच्च रक्तचाप वाले लोगों को उलटने-पलटने वाले आसन करने से बचना चाहिए और उन्हें इनका अभ्यास एक विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए। आसन, जैसे- हस्त पादासन या अर्द्ध उत्थान आसन (खड़े होकर आगे की ओर झुकना), अधोमुखश्वान आसन (नीचे झुक हुए कुत्ते की मुद्रा), सर्वांगासन (कंधों पर खड़े होना) या विपरीत करणी (टांगों को उठाना) पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को सुधारने में मदद करेंगे।

पाचन तंत्र को बनाएं मजबूत

पाचन तंत्र की हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। आयुर्वेद के अनुसार, खराब पाचन और पाचन नली का ठीक प्रकार से ध्यान ना रखने से आंव और कफ बनता है,जो अंततः मन को प्रभावित करता है और फेफड़ों में भी कफ को जमा देता है। हमारे कुछ आसन अभ्यासों में पेट को दबाने वाले और शरीर को मोड़ने वाले कुछ आसनों को शामिल करने से, हम अपने पेट, आंतों, गुर्दों और अन्य आंतरिक अंगों में रक्त के संचार को बढ़ा सकते हैं, ताकि पाचन बेहतर तरीके से हो और वहां मौजूद विषैले तत्व बाहर निकल जाएं। वक्रासन या अर्द्ध मत्स्येंद्र आसन (बैठकर रीढ़ की हड्डी को घुमाना), नटराज आसन (लेटकर रीढ़ की हड्डी को घुमाना), शिशु आसन, पवन मुक्तासन और पश्चिमोत्तासन (बैठकर आगे झुकना) आपको स्वास्थ्यलाभ प्रदान करेंगे।

फफड़ों में बढ़ाएं रक्‍तसंचार

जो आसन छाती को फ़ैलाने में मदद करते हैं, वे थोरेसिक कैविटी और फेफड़ों में रक्त के संचार को बढ़ाने में मदद करते हैं, वे बहुत लाभकारी हैं। आसन, जैसे- मत्स्यासन, भुजंगासन, धनुरासन, अर्द्ध चक्रासन (खड़े होकर पीछे की ओर मुड़ना) और सेतु बंधासन, छाती को फ़ैलाने वाले आसन हैं और इन्हें अपने दैनिक योगाभ्यास में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि, आसन शरीर को बीमारियों से बचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन योग के लाभ बहुत अधिक हैं और जो हमारे अस्तित्व के सभी आयामों को लाभान्वित करते हैं। श्वसन अभ्यास हमारे फेफड़ों और इससे संबंधित श्वसन अंगों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। ये महत्वपूर्ण अभ्यास बीमारियों से बचाते हैं और सम्पूर्ण स्वास्थ्य का पोषण करते हैं। प्राणायाम ना केवल हमारे फेफड़ों को अपनी श्वसन क्षमता को बढ़ाने का प्रशिक्षण देते हैं, बल्कि हमारे मन को शांति, सकारात्मक एवम् उत्थान करने वाली ऊर्जा से भी भर देते हैं।

थ्री स्टेज प्राणायाम और भस्त्रिका का अभ्यास, जो आमतौर पर आर्ट ऑफ लिविंग के हैप्पीनेस प्रोग्राम में सिखाया जाता है, श्वसन तंत्र को लाभान्वित करता है और इसे मजबूती प्रदान करता है, जबकि नाड़ी शोधन प्राणायाम नाड़ियों में जमाव को हटाता है और नासिका मार्ग को साफ करता है। साइनस को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए शरीर की सबसे पहली रेखा के रूप में जाना जाता है। तो, इन्हें साफ़ और स्वस्थ रखने से हमें बाहरी संक्रमण से सुरक्षा मिलती है।

श्‍वसन मार्ग को रखें स्‍वस्‍थ

यहां जल नेति (नमक के पानी से नासिका मार्ग को स्वच्छ करना) का उल्लेख करना बहुत महत्वपूर्ण है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह पता चला है कि जो लोग अपने नासिका मार्ग को प्रतिदिन नमक के पानी से स्वच्छ करते हैं, उन्होंने सर्दी-खांसी और एलर्जी में उल्लेखनीय रूप से कमी का अनुभव किया।

अंततः शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मा के स्तर पर स्वस्थ रहने के लिए, हमें अपने तनाव के स्तर को कम करना होगा। तनाव प्रतिरोधक क्षमता और शरीर की प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने की क्षमता को कमजोर करता है। ध्यान चिंता और तनाव को कम करने का सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका है। ऐसे असंख्य अध्ययन हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि प्रतिदिन केवल 20 मिनट ध्यान करने से रक्त में कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है और एंडोर्फिन का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण मन सकारात्मक और प्रसन्न हो जाता है।

वायरस, जिनसे आज संसार पीड़ित है, के प्रति अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने के लिए आप आसन, ध्यान और प्राणायाम को अपने दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना सकते हैं। यहां हम आपको घर पर रहकर योगाभ्‍यास करने दैनिक क्रम बता रहे हैं।

  • गहरी लंबी सांस- 5 से 7 श्वास
  • भस्त्रिका प्राणायाम- 20 श्वासों के दो राउंड
  • मर्जरी आसन (बिल्ली की मुद्रा)
  • अर्द्ध चक्रासन (खड़े होकर पीछे की ओर झुकना)
  • हस्तपादासन या अर्द्ध उत्तानासन (खड़े होकर आगे की ओर झुकना- हाथ घुटनों या पंजों तक रखें)
  • त्रिकोणासन
  • अर्द्ध मत्स्येंद्र आसन या वक्रासन (बैठकर आधी रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर घुमाना)
  • पश्चिमोत्तानासन  (बैठकर आगे की ओर झुकना)
  • बालासन 
  • भुजंगासन
  • धनुरासन
  • अधोमुखश्वान आसन (नीचे झुके हुए कुत्ते की मुद्रा)
  • सेतु बंधासन
  • सर्वांगासन या विपरीत करणी (कंधों के बल खड़े होना या अपनी टांगों को उठाना)
  • मत्स्यासन (मछली की मुद्रा)
  • नटराज आसन (पीठ के बल लेटकर रीढ़ की हड्डी को मोड़ना)
  • पवन मुक्तासन
  • योग निद्रा (विश्राम)
  • नाड़ी शोधन प्राणायाम- 5 मिनट

निरंतर योगाभ्यास से बेहतर स्वास्थ्य लाभ होता है। लेकिन,यह जान लीजिए कि यह चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपका कोई इलाज चल रहा है, तो डॉक्टर की सलाह के पश्चात और एक प्रशिक्षित शिक्षक की देखरेख में योगासनों का अभ्यास करें।

नोट: यह लेख आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्री स्कूल ऑफ योग की सीईओ और इंडियन योग एसोसिएशन की महासचिव कमलेश बरवाल से हुई बातचीत पर आधारित है।

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