बच्‍चों के खराब व्‍यवहार के पीछे जैविक कारण

एक ताजा शोध में यह बात सामने आयी है कि बच्‍चों की स्‍वभावगत समस्‍याओं के पीछे अनुवांशिक कारण होते हैं। ओरेगन स्‍टेट यूनिवर्सिटी के ताजा शोध में यह बात सामने आयी है।

एजेंसी
लेटेस्टWritten by: एजेंसीPublished at: Oct 28, 2013
बच्‍चों के खराब व्‍यवहार के पीछे जैविक कारण

बच्‍चे का खराब बर्तावअपने बच्‍चों के बुरे बर्ताव के लिए कई माता-पिता अपनी खराब परवरिश को जिम्‍मेदार मानते हैं। लेकिन, एक हालिया शोध में इस बात को गलत बताया गया है।

 

एक शोध में पाया गया है कि कुछ बच्‍चों को अनुवांशिक रूप से संवदेनशील होने के कारण ही स्‍वभावगत समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है।

 

शोध में यह दिखाया गया कि कुछ बच्‍चों को प्री-स्‍कूल में जाने के दौरान स्‍व-नियंत्रण और गुस्‍से की परेशानी होती है। बच्‍चों को यह लक्षण अपने माता-पिता से विरासत में मिलता है।

 

ओरेगोन स्‍टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर क्‍यों कुछ बच्‍चे आसानी से प्री-स्‍कूल चले जाते हैं और क्‍यों कुछ को इस दौरान स्‍वभावगत समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है।

 

शोध के प्रमुख लेखक, डॉक्‍टर शेनॉन लिप्‍सकॉम्‍ब ने कहा, शोध के नतीजों के आधार पर हम कह सकते हैं, ये बातें बच्‍चे अपने माता-पिता से सीखते हैं। ऐसे में हमें इस बारे में अधिक सोचना बंद कर देना चाहिए।

लेकिन, इस प्रकार की अनुवांशिक समस्‍या से परेशान कुछ बच्‍चे अलग माहौल, जैसे घर और छोटे समूहों में अपना स्‍वभाव बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।

परिणाम पर पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने 233 परिवारों से डाटा एकत्र किया और पाया कि वे अभिभावक जिनमें अधिक नकारात्‍मकता और कम स्‍व नियं‍त्रण की शिकायत थी, उनके बच्‍चों में स्‍वभावगत समस्‍यायें अधिक होने की आशंका थी।

शोधकर्ताओं ने गोद लिए बच्‍चों के स्‍वभाव की भी जांच की और उनके जैविक माता-पिता से उनके स्‍वभाव की तुलना करने की कोशिश की। हैरानी की बात यह थी कि उन बच्‍चों का स्‍वभाव भी अपने जैविक माता-पिता से प्रभावित था, हालांकि उनका लालन-पालन किसी और के द्वारा किया गया था।

लिप्‍सकॉम्‍ब का कहना है कि हम बच्‍चों की अनुवांशिक जांच करवाने के लिए नहीं कह रहे हैं, लेकिन माता-पिता और अभिभावक बच्‍चे की जरूरतों का आकलन कर अधिक उपयुक्‍त मार्ग तलाश सकते हैं।


इस शोध के जरिये हमें इस बात की जानकारी मिलती है कि आखिर क्‍यों कुछ बच्‍चे बड़ी मित्र मंडली और बड़े सामाजिक समूहों में स्‍वयं को असहज महसूस करते हैं। यह टीचर अथवा माता-पिता की समस्‍या नहीं है, बल्कि बच्‍चे जैविक स्‍तर पर इस चुनौती का सामना कर रहे होते हैं।

 

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