सांस रोगियों के लिए राहत, आया ये चमत्कारिक इन्हेलर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 22, 2017

बहुत सी चीज़ों के बारे में हम लापरवाह होते हैं। सांस लेना भी उनमें से एक है। हम सभी को ऐसा ही लगता है कि सांस लेना भी कोई काम है। लेकिन सांस के विषय में ऐसा सोचना हमारी सबसे बड़ी भूल है। योग विज्ञान का पूरा सिद्धांत ही इसी बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह से सांस लेते हैं। गलत तरीके से सांस लेने वाला व्यक्ति अपनी उम्र से कई साल कम जीता है। प्राणायाम का पूरा विज्ञान भी सांसों के सही संचालन और नियंत्रण पर टिका है।

हाल ही में हुए एक शोध में साफ हुआ है कि दमा और सीओपीडी की बीमारियों के इलाज में सन 2017 में पहले से कहीं ज्यादा अच्छे इन्हेलर और अन्य डिवाइसेज उपलब्ध हो चुकी हैं जिनसे उपर्युक्त दोनों रोगों पर अच्छी तरह काबू पाया जा सकता है। एलर्जिक अस्थमा के इलाज में एलर्जन इम्यूनोथेरेपी भी सन् 2017 में प्रचलन में आई, जिसके नतीजे एलर्जिक अस्थमा वाले लोगों के लिए काफी उत्साहवर्धक हैं। इसी तरह स्लिप एप्निया नामक मर्ज के इलाज में इस साल एक डिवाइस का ईजाद हुआ है,जिसे प्रत्यारोपित किया जा सकता है। यह डिवाइस काफी कारगर साबित हुई है।

फेफड़े के कैंसर के इलाज में मर्ज को डायग्नोसिस करने और कैंसर की अवस्था का पता लगाने के लिए एंडोब्रॉन्कियल अल्ट्रासाउंड और नेवीगेशनल ब्रांकोस्कोपी से काफी मदद मिली है। इसी तरह फेफड़े के कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के अलावा कुछ अन्य दवाएं (टार्गेटेड थेरेपी)भी उपलब्ध हो चुकी हैं। इन दवाओं को मुंह से लिया जा सकता है। इन दवाओं के साइड इफेक्ट नगण्य हैं और इनके प्रभाव से फेफड़े के कैंसर को रोगियों को काफी राहत मिली है। टी.बी. के इलाज में कई सालों के बाद कुछ नई एंटी-ट्यूबरक्युलर दवाएं इस साल विकसित हुई हैं। जैसे- बेडाक्यूलाइन और डेलामेनिड। ये दोनों दवाएं ड्रग रेजिस्टेंट टी.बी. के मरीजों के लिए काफी असरदार साबित हो रही हैं।

डॉ. (कर्नल) एस.पी. राय सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट, 

कोकिलाबेन हॉस्पिटल मुंबई

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