लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल के चिकित्‍सकों ने किया दिल का अनोखा ऑपरेशन

दिल के ऑपरेशन में चिकित्‍सकों को एक नई उपलब्धि मिली है, ब्रिटेन के डॉक्टरों ने पहली बार एक ऐसे दिल का ऑपरेशन किया, जानिए इसके बारे में।

एजेंसी
लेटेस्टWritten by: एजेंसीPublished at: Oct 22, 2013Updated at: Oct 22, 2013
लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल के चिकित्‍सकों ने किया दिल का अनोखा ऑपरेशन

दिल के ऑपरेशन में चिकित्‍सकों को एक नई उपलब्धि मिली है, ब्रिटेन के डॉक्टरों ने पहली बार एक ऐसे दिल का ऑपरेशन किया है, जो धड़क तो रहा था, लेकिन उसकी धड़कन बहुत कम हो गई थी।

Strange Heart Operationलंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल के चिकित्‍सकों ने दिल से जुड़े इस अनोखे ऑपरेशन को सफल किया। यह उन मरीजों के लिए बहुत कारगर हो सकता है जिनके दिल के धड़कने की गति कम हो जाती है या जिनके शरीर में रक्‍त संचार में परेशानी होती है।


इस मरीज़ का दिल शरीर के हिस्सों को ख़ून की आपूर्ति करने के लिए संघर्ष कर रहा था। ऐसे में उस पर थोड़े से भी दबाव से उसकी मौत हो सकती थी।


इसके लिए चिकित्‍सकों ने दिल की सिलाई करने की एक तकनीक का प्रयोग कर क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटाया। इस दौरान डॉक्टरों ने दिल के आकार को कम भी किया जिससे वह खून की आपूर्ति आसानी से कर सके।


हृदय को रक्त लाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाना हृदय गति के रुक जाने का एक सामान्य कारण है। इससे हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है। इसके कारण दिल की पेशी मर जाती है और वहां ऐसे क्षतिग्रस्त ऊतक आ जाते हैं, जो धड़क नहीं सकते।


धीरे-धीरे ये क्षतिग्रस्त ऊतक दिल के हिस्सों में फैल जाते हैं, इससे दिल के अंदर सूखे ऊतकों के चलते जगह ज़्यादा हो जाती है। इस वजह से हृदय को हर धड़कन के साथ अधिक ख़ून की आपूर्ति करनी पड़ती है।


फलस्‍वरूप दिल कमज़ोर हो जाता है, उसके काम करने की क्षमता कम हो जाती है. ऐसे में आदमी हल्‍का सा काम करने के बाद भी थक जाता है और सांस लेने में दिक्‍कत होने लगती है।


इस ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने एक तार का उपयोग किया। तार के जरिए पेशियों को कसा गया और हृदय के दीवारों की मरम्मत की गई। इस तरह डॉक्टरों ने क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटा दिया।

किंग्स कॉलेज अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर ओल्फ़ वेंडलर ने से कहा, '' ब्रिटेन में इस तकनीक का उपयोग हमने पहली बार किया है, इसके किसी के हृदय को रोकने या उसे हार्ट लंग मशीन में रखने की ज़रूरत भी नहीं होती है।''

 

 

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