माइग्रेन के दर्द से रहते हैं परेशान? अपनाएं ये 7 स्लीपिंग टिप्स और पाएं माइग्रेन के दर्द से राहत

अगर आप माइग्रेन से परेशान हैं और उसके दर्द को कम करने के तरीके ढूंढते रहते हैं तो आपको एक बार अपनी सोने की आदतों पर नजर डालनी चाहिए।

Monika Agarwal
विविधWritten by: Monika AgarwalPublished at: Apr 21, 2021Updated at: Apr 21, 2021
माइग्रेन के दर्द से रहते हैं परेशान? अपनाएं ये 7 स्लीपिंग टिप्स और पाएं माइग्रेन के दर्द से राहत

क्या आप पूरी और चैन की नींद ले पाते हैं? कुछ शोध बताते हैं कि नींद और माइग्रेन का दर्द एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर आप पूरी नींद नहीं लेते हैं तो इससे आपको क्रोनिक माइग्रेन (Migraine Pain) होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि आपकी सालों से एक जैसी सोने की आदत एकदम से तो नहीं बदल सकती। लेकिन अगर आप उसमें थोड़े बहुत बदलाव करते हैं तो जरूर सफल हो पायेंगे। अगर माइग्रेन (Migraine Pain) आपकी रोजाना जिंदगी का हिस्सा बन गया है तो आपको अपने सोने के तरीके में जरूर बदलाव करना चाहिए। क्योंकि एक अच्छी नींद माइग्रेन (Migraine Pain) की समस्या को कम करने की कुंजी है। जिन लोगों में माइग्रेन (Migraine Pain) की समस्या रहती है उन्हें नींद ना आना या नींद में बेचैनी रहना या कम नींद आना जैसे लक्षण अक्सर परेशान करते हैं। साथ ही कभी-कभी सिर में दर्द भी महसूस होता है। लेकिन यह सब कम नींद की वजह से होता है। यदि आपको निम्न समस्याओं की वजह से 7 या 8 घंटे की नींद पूरी करने में समस्या आ रही है तो हर हाल में आपको माइग्रेन (Migraine Pain) परेशान करेगा।

  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया
  • अनिद्रा
  • रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम
  • नींद के दौरान जबड़े का अकड़ना
  • खर्राटे
  • नार्कोलेप्सी (बहुत अधिक दिन की नींद आना)
  • नींद में चलना
  • सर्कैडियन लय या "बॉडी क्लॉक" विकार
  • रात में 6 घंटे से कम नींद या अधिक नींद लेना।
  • जेट लैग
  • नाइट टेरर्स (बच्चों में) आदि
migraine

दिन में अधिक न सोएं (Avoid Napping)

अगर आप रात में अच्छे से नहीं सो पाते हैं इसलिए दिन में थोड़ी बहुत देर के लिए सो जाते हैं तो यह अच्छा नहीं है। क्योंकि स्टडीज के अनुसार यहीं से आपके स्लीप डिसऑर्डर शुरू होते हैं। इससे न तो आपको रात में अच्छी नींद आ पाती है और अगर आप दिन में सोते हैं तो आपका माइग्रेन (Migraine Pain) का दर्द उस दौरान और अधिक बढ़ सकता है।

दिन में देर से कैफिन लेना अवॉइड करें (Avoid Caffeine Intake)

कैफ़ीन की सहायता से आपको माइग्रेन (Migraine Pain) में कुछ आराम मिल सकता है। लेकिन अगर आप दोपहर में या उसके बाद कैफ़ीन से बनी चीजों जैसे कॉफी, चाय या ग्रीन टी इत्यादि का सेवन करते हैं तो इससे आपको रात में नींद आने में समस्या हो सकती है। इसलिए आपको कैफीन केवल दिन में सुबह सुबह ही लेनी चाहिए। इसके बाद अगर आप इसका सेवन करते हैं तो आपको नींद आने में परेशानी आएंगी।

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नियमित रूप से एक्सरसाइज करें (Relaxing Exercises)

एक्सरसाइज करने से न केवल आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ता है बल्कि इससे आपको माइग्रेन (Migraine Pain) में भी राहत मिल सकती है। इससे आपको स्ट्रेस से राहत मिलती है और आपको नींद भी बढ़िया आती है। आपको रोजाना 5 से 10 मिनट की वॉक से शुरू करना चाहिए। अगर आप शुरुआत में ही अधिक एक्सरसाइज कर लेते हैं तो इससे आपका माइग्रेन और अधिक ट्रिगर हो सकता है। इसलिए धीरे धीरे शुरू करें।

सोने से पहले खाने से बचें (Don't Eat Before Bed)

अगर आप शाम को बहुत लेट या केवल सोने से पहले ही खाना खा रहे हैं तो इससे आपको नींद आने में समस्या होती है इसलिए आपको अपनी लास्ट मील कम से कम सोने के 4 घंटे पहले खा लेनी चाहिए। अगर आप देर से खाना खाते हैं तो इससे आपकी हार्ट बर्न की समस्या भी जागृत हो सकती है। इसके साथ साथ आपको आर्टिफिशियल स्वीटनर, स्पाइसी फूड, चॉकलेट, खट्टे फल आदि रात को नहीं खाने चाहिए इनसे माइग्रेन (Migraine Pain) और अधिक बढ़ सकता है।

अपने बेडरूम में कुछ बदलाव करें  (Soothing Environment)

अगर आप अपने बेडरूम को ऐसा वातावरण देते हैं जो बहुत ही शांति प्रिय हो तो इससे भी आपको जल्दी नींद आ सकती है व आपका दिमाग भी रिलैक्स होगा। आप अपने बेडरूम में बिल्कुल कम लाइट और शोर रखें। इसके साथ साथ तापमान भी अनुकूल रखें। डार्क बेडशीट का प्रयोग करें और एक आरामदायक गद्दे पर ही सोएं। डिजिटल क्लॉक्स को अपनी नजरों से परे रखें।

migraine pain

एक रिलैक्सिंग बेडटाइम रूटीन रखें  (Avoid loud noises)

अगर आपको सोने से पहले अपने फोन को स्क्रॉल करने की आदत है तो उसकी ब्लू लाइट भी आपकी नींद को डिस्टर्ब कर सकती है। अगर आप चैन से सोना चाहते हैं तो कुछ रिलैक्सिंग तकनीकों का प्रयोग कर सकते हैं। आप मेडिटेशन, डीप ब्रीथिंग एक्सरसाइज, लाइट योग स्ट्रेच आदि कर सकते हैं। इसके अलावा भी आप किताबें पढ़ने या गर्म पानी में नहाने की तकनीकों का प्रयोग कर सकते हैं।

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एक स्लीप शेड्यूल बनाएं (Regular Schedule)

अगर आपको रात में नींद नहीं आती है तो उस समस्या के लिए आप एक स्लीप शेड्यूल बना सकते हैं और उसको आप सख्ती से पालन करें। अगर आप रात में सोने से पहले फोन या लैपटॉप आदि का प्रयोग करते हैं तो अपने सोने के समय पर सभी चीजों को बंद कर दें और सख्ती से उस समय का पालन करें।

यदि आपकी नींद की आदतों को बदलने से आपको बेहतर महसूस होता है व माइग्रेन के लक्षणों में सुधार होता है, तो अपने डॉक्टर से बात करें। ताकि वो आपको नींद न आने के कारणों की जांच कर नींद की दवा निर्धारित करें।

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