राजस्थान में देखे गए जीका वायरस के 70 मामले, जानें दिल्ली और अन्य शहरों का हाल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 16, 2018
Quick Bites

  • राजस्थान की राजधानी जयपुर में जीका वायरस के 70 मामले देखे गए हैं। 
  • 70 लोगों में से 60 लोग इलाज के बाद अब खतरे से बाहर हैं।
  • डॉक्टर इससे बचने के लिए खुद को हाइड्रेटेड रखने की सलाह देते हैं।

हम काफी दिनों से जीका वायरस के बारे में सुनते आए हैं। अभी तक यह रोग साउथ भारत के लोगों को अपना शिकार बना रहा था। लेकिन अब जीका वायरस उत्तरी भारत में भी अपनी पैठ जमा रहा है। हाल ही में राजस्थान की राजधानी जयपुर में जीका वायरस के 70 मामले देखे गए हैं। प्रकाश में आते ही सरकार और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। इसके बाद से ही 280 लोगों की टीम प्रभावित इलाकों में एक-एक घर का दौरा कर रही हैं। अब तक करीब 96 हजार घरों का सर्वे किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि 14 अक्टूबर से ऐसे मकानमालिकों के खिलाफ चालान जारी किया जा रहा है, जिनके घर पर इस वायरस को फैलाने वाले मच्छरों का लार्वा पाया जा रहा है। हालांकि अभी तक दिल्ली और उसके आसपास के इलाके में जीका वायरस का 1 भी मामला नहीं देखा गया है।

हालांकि 70 लोगों में से 60 लोग इलाज के बाद अब खतरे से बाहर हैं। खबरों में मुताबिक जीका वायरस के ज्यादातर मामले राजधानी जयपुर के शास्त्री नगर इलाके से सामने आ रहा हैं। जिसके चलते वहां फॉगिंग और अन्य एहतियाती उपाय तेजी से किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग ने शास्त्री नगर इलाके के बाहर रह रही गर्भवती महिलाओं के लिए परामर्श जारी कर कहा है कि वे प्रभावित इलाके में नहीं जाएं। इसके अलावा उन गर्भवती महिलाओं के लिए जीका वायरस का टेस्ट कराना भी अनिवार्य कर दिया है जिन्हें पहले बुखार था।

जीका वायरस के लक्षण

जीका वायरस सबसे पहले जयपुर की एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला को हुआ था। उनके अंदर  बुखार, चकत्ते, जोड़ों में दर्द, आंखों में लाली और कमजोरी जैसे लक्षण देखे गए थे। पहले इस बुखार को डेंगू और अन्य वायरल बुखार समझा जा रहा था। लेकिन बाद में टेस्ट कराया तो रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके बाद जीका वायरस टेस्ट के लिए जांच सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। तब से अब तक जीका के 70 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

नवजात को है सबसे ज्यादा खतरा

यह सीधे नवजात को अपना शिकार बनाता है। इस वायरस से प्रभावित होने वाले बच्चे की सारी जिंदगी विशेष देखभाल करनी पड़ती है, क्‍योंकि विषाणुओं के प्रभाव से वहां के नवजात छोटे सिर के साथ पैदा हो रहे हैं। इस साल ऐसे 2400 मामले सामने चुके हैं। जबकि पिछले साल केवल 147 मामले थे। ब्राजील सरकार को डर है कि अभी जन्म लेने वाली पूरी पीढ़ी ही कहीं शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग न हो जाए। 

जीका वायरस का इलाज क्या है?

फिलहाल जीका वायरसक का कोई पक्का इलाज नहीं है। लेकिन डॉक्टर इससे बचने के लिए खुद को हाइड्रेटेड रखने की सलाह देते हैं। बुखार और दर्द को कम करने के लिए पैरासिटामॉल जैसी दवाइयों की मदद ली जा सकती है।

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