हार्मोन्स का असंतुलन और एड्रिनल ग्रंथि के विकारों को ठीक करता है शीर्षासन, ऐसे करें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 02, 2018
Quick Bites

  • एड्रिनल ग्रंथि कई तरह के हार्मोन्स का निर्माण करती है।
  • बेहतर प्रतिरोधक क्षमता के लिए एड्रिनल ग्रंथि महत्वपूर्ण है।
  • शीर्षासन हार्मोन्स के स्राव को बेहतर करता है।

एड्रिनल ग्रंथि शरीर की महत्वपूर्ण ग्रंथियों में से एक है। बेवजह थकान, प्रतिरोधक क्षमता में कमी और शरीर की अन्य कई परेशानियों का कारण एड्रिनल ग्रंथि के विकार हो सकते हैं। एड्रिनल ग्रंथि शरीर के लिए कई हार्मोन्स का निर्माण करती है इसलिए इस ग्रंथि का सही तरह से काम करना बहुत जरूरी है। शरीर में हार्मोन्स की कमी से कई बार व्यक्ति का विकास ठीक से नहीं हो पाता है और कई तरह की बीमारियों का खतरा होता है। इस तरह की परेशानयों को योगासनों की मदद से आसानी से ठीक किया जा सकता है। आइये आपको बताते हैं कि एड्रिनल ग्रंथि कितनी महत्वपूर्ण है और कैसे ठीक कर सकते हैं शरीर में हार्मोन्स की कमी को।

क्या है एड्रिनल ग्रंथि

एड्रिनल ग्रंथि को सुप्रारेनल ग्रंथि भी कहा जाता है। यह तिकोने आकार की ग्रंथि किडनी के ऊपर स्थित होती है। इस ग्रंथि का काम तनाव को नियंत्रित करना होता है। यानी एड्रिनल ग्रंथि में किसी भी प्रकार की परेशानी आने का अर्थ है कि इससे आपकी सेहत को काफी गहरा नुकसान पहुंच सकता है। हममें से कई लोगों के लिए तनाव और व्‍यस्‍त जीवनशैली सम्‍मान की तरह बन गयी है। लेकिन, इस तनाव का प्रभाव हमारी एड्रिनल ग्रंथि की थकान के रूप में सामने आता है। यदि आप भी तनाव का आनंद लेने लगे हैं और कॉफी के बिना आपकी जिंदगी नहीं चलती, तो आपको सोचने की जरूरत है।

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रोगों से बचाती है एड्रिनल ग्रंथि

अच्‍छी प्रतिरोधक क्षमता के लिए एड्रिनल ग्रंथि का ठीक काम करना जरूरी है। थॉयराइड ग्रंथि के सही प्रकार से काम करते रहने के लिए इस ग्रंथि का सही होना बहुत जरूरी है। इससे हॉर्मोंस का स्‍तर नियंत्रित रहता है, वजन काबू में रहता है और साथ भावनाओं को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इतना ही नहीं यह ग्रंथ भूख व कई अन्‍य चीजों को भी नियंत्रित करती है। यानी आपका वजन काबू में रखने और सेहत संबंधी अन्‍य समस्‍याओं से बचाने में इस ग्रंथि महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है।

शीर्षासन से ठीक करें एड्रिनल ग्रंथि के विकार

शीर्षासन को सभी योगासनों में महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर आप रोज केवल शीर्षासन भी करते हैं, तो कई तरह के रोगों से दूर रह सकते हैं। शीर्षासन एड्रिनल ग्रंथि में होने वाले विकारों को ठीक करता है और हार्मोन्स के स्राव को बेहतर करता है। शीर्षासन सिर के बल किया जाने वाला आसन है। शरीर की लंबाई, मोटापा, पतलापन आदि कई चीजें हार्मोन्स के कम स्राव के कारण होती हैं। अगर आपके शरीर में भी हार्मोन्स की कमी है, तो रोजाना शीर्षासन करने से हार्मोन्स के स्राव वाली ग्रंथियों को एक्टिव किया जा सकता है।

शीर्षासन कैसे करें

  • शीर्षासन किसी चद्दर या फिर कंबल पर करना चाहिए।
  • इसके लिए आपको किसी सपाट जगह का चयन करना चाहिए।
  • शीर्षासन के लिए सबसे पहले आपको वज्रासन में बैठना चाहिए। आप इस तरह से बैठें की आगे की ओर झुकने के लिए आपके पास भरपूर जगह हो।
  • वज्रासन में बैठकर आप दोनों कोहनियों को जमीन पर टिकाकर दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में मिला लें।
  • दोनों हाथों की अंगुलियों को मिलाकर आपकी हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए जिससे आप अपने सिर को हथेलियों का सहारा दे सकें।
  • धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हए अपने सिर को हथेलियों पर रखें और सांस सामान्य रखें। फिर धीरे-धीरे अपने सिर पर शरीर का भार आने दें।
  • इस स्थिति में आकर आपको अपने पैरों को आसमान की ओर उठाना है ठीक इस तरह से जैसे आप सीधें पैरों के बल खड़े होते हैं वैसे ही आप उल्टा सिर के बल खड़े हैं।
  • कुछ देर इसी स्थिती में रहें और फिर सामान्य स्थिति में वापस आ जाएं।

शीर्षासन में रखें ये सावधानियां

  • पहली बार शीर्षासन किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।
  • यदि आप थोड़ा सा भी अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं तो आपको शीर्षासन करने से बचना चाहिए।
  • पहली बार शीर्षासन के दौरान आप दीवार का सहारा भी ले सकते हैं।
  • आपका रक्तचाप बहुत अधिक बढ़ा रहता है तो आपको शीर्षासन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।
  • यदि आपको सर्वाइकल की समस्या है या फिर गर्दन में दर्द की समस्या है तो आपको शीर्षासन नहीं करना चाहिए।
  • जिन लोगों को कम दिखाई देता है या फिर आंखों संबंधी कोई और समस्या हैं तो उन्हें शीर्षासन नहीं करना चाहिए।

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