बच्‍चों में आलस्‍य और डर को दूर करता है ये 3 योगासन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 20, 2017
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Quick Bites

  • मार की वजह से बच्‍चों में आत्‍मविश्‍वास की कमी हो जाती है
  • दोस्‍तों के बीच हीन भावना के कारण भी ज्‍यादातर बच्‍चों में डर आ जाता है
  • इससे माता-पिता भी काफी परेशान रहते हैं

अक्‍सर डांट और मार की वजह से बच्‍चों में आत्‍मविश्‍वास की कमी हो जाती है। परीक्षा में कम नंबर या फिर दोस्‍तों के बीच हीन भावना के कारण भी ज्‍यादातर बच्‍चों में डर और दब्‍बूपन वाली आदतें आ जाती हैं। इससे माता-पिता भी काफी परेशान रहते हैं। उन्‍हें लगता है कि उनका बच्‍चा आगे नहीं बढ़ रहा है। हालांकि पैरेंट्स का बच्‍चों के बारे में सोचना भी जरूरी है। अगर बच्‍चों में आत्‍मविश्‍वास की कमी है तो उसे जगाने की जरूरत है। हम आपको तीन ऐसे योगासन बता रहे हैं, जिससे बच्‍चों के मन का डर दूर होगा और आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ेगा।

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वीरभद्रासन

वीरभद्रासन करने से मन शांत रहता है। यह पाचन को बढ़ावा देता है तथा बच्चों में डर और चिंता को दूर करने का काम करता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे तनकर खड़े हो जाइए। अब अपने दाएं पैर को 2 से 4 फिट तक आगे ले जाए। दाएं घुटने को हल्का-सा मोड़ दें और इस बात का ध्यान रखें कि बायां पैर सीधा हो तथा उसका तलवा जमीन के साथ लगा हुआ हो। गहरी सांस को लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें। अपने कंधों को आरामदायक स्थिति में रहने दें। दोनों कानों को अपने कंधे के पास न आने दें। अपनी सांस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए पूर्वावस्था में आ जाएं।

शवासन

इस आसन को करने के लिए अपनी पीठ के सहारे लेट जाएं। पैर सीधे रखें। अपने दोनों हाथों को शरीर से कम से कम 5 इंच की दूरी पर इस तरह रखें कि दोनों हाथ की हथेलियां आसमान की दिशा में हो। अब शरीर के हर अंग ढीला छोड़ दें। आंखें बंद कर लें। पूरा ध्यान सांसों पर लगाएं।

वृक्षासन

एकाग्रता और ध्यान बढ़ाने के लिए यह आशन किया जा सकता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। अब दोनों पैरों को एक दूसरे से कुछ दूरी पर रखें और हाथों को ऊपर उठाएं। इसे सीधा करके हथेलियों को आपस में मिला दें। इसके बाद दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए उसके तलवे को बाईं जांघ पर टिका दें। इस स्थिति के दौरान दाहिने पैर की एड़ी गुदा द्वार-जननेंद्री के नीचे टिकी होगी। बाएं पैर पर संतुलन बनाते हुए हथेलियां, सिर और कंधे को सीधा एक ही सीध में रखें। यह स्थिति वृक्षासन की है।

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