शरीर से कफ को बाहर निकालेंगे ये 4 योगासन और प्राणायाम, शरीर रहेगा स्वस्थ

गर्मी के मौसम में शरीर में कफ पिघलने लगती है, जिस कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। कफ बढ़ने से होने वाले रोगों को कम करने के लिए योगासन फायदेमंद है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiUpdated at: Apr 14, 2021 13:58 IST
शरीर से कफ को बाहर निकालेंगे ये 4 योगासन और प्राणायाम, शरीर रहेगा स्वस्थ

गर्मी के मौसम में गले, नाक और छाती में जमा कफ पिघलने लगता है। जिसकी वजस से शरीर में परेशानियां बढ़ने लगती हैं। तो वहीं, हमारे शरीर में वात, पित्त, कफ तीन तत्त्व होते हैं जिनके संतुलन से शरीर स्वस्थ रहता है। इन तीनों में से किसी एक के भी बढ़ या घट जाने से  शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। आज के इस लेख में इनोसेंस योगा कि योग एक्सपर्ट भोली परिहार बता रही हैं वे योगासन और प्राणायाम जिन्हें आप घर पर करके कफ की समस्या से निजाप पा सकते हैं। भोली परिहार का कहना है कि कफ का हमारे शरीर में संतुलित रहना जरूरी है क्योंकि यह हमारी स्किन को मॉश्चराइज करता है। इससे जोड़ों में चिकनापन रहता है। लेकिन अगर इसकी मात्रा बढ़ जाए तो मोटापा, बलगम, आलस, जीभ सफेद होना और जीभ पर सफेद परत जमने लगती है। इससे बचने के लिए आज हम आपको कुछ आसन व प्राणायाम बताएंगे।

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कफ को बाहर निकालने के लिए योगासन और प्राणायाम

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त्रिकोण आसन

इस आसन में हमारे शरीर की स्थिति त्रिकोण जैसी दिखती है। इसलिए  इसे त्रिकोण आसन कहा जाता है। यह आसन कफ से होने वाले रोगों को दूर करता है। जैसे कफ बढ़ने से मोटापा बढ़ता है यह मोटापे को भी कम करता है। इससे हमारे शरीर का तनाव कम होता है। तनाव से हमारे शरीर में कई समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं, यह आसन इन समस्याओं को दूर करता है। कफ बढ़ने से एसिडिटी बढ़ती है जिसे यह कम करता है।  

करने की विधि

  • सावधान अवस्था में खड़े हो जाएं।
  • दोनों पैरों के बीच 30 इंच का गैप कर लें।
  • दोनों हाथों को कंधों के बराबर खोल दें।
  • हथेलियां सामने की ओर रहेंगी।
  • अपने बाएं पैर के पंजे को बाहर की करफ मोड़ दें व सांस छोडते हुए अपने पूरे शरीर को बाईं और छुकाएं। उसके बाद अपने बाएं हाथ को बाएं पैर के बगल में रख दें।
  • दाएं हाथ का रुख आसमान की ओर रहेगा। कंधे आगे या पीछे की ओर नहीं झुकेंगे बराबर रहेंगे। 
  • दायां पैर हल्का सा अंदर की ओर रहेगा। इस आसन में 15-20 सैकेंड होल्ड करें व अपनी क्षमता अनुसार करें।
  • सामान्य सांस लेते हुए धीरे से वापस आ जाएं। व इसी आसन को दूसरी ओर से भी दोहराएं। कुछ देर विश्राम करें।

सावधानी

अगर आप शुरुआती दौर में आसन कर रहे हैं तो किसी की देखरेख में करें।

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धनुरासन

धनुरासन में हमारा शरीर धनुष जैसा दिखता है। जिस वजह से इसे धनुरासन कहा जाता है। यह आसन हमारे पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसीलिए यह कफ को भी कम करने में लाभकारी होता है। साथ ही साथ हमारे पेट की चर्बी को कम करता है। रीढ़ की हड्डी व कंधों को मजबूती प्रदान करता है। यह आसन कफ में अत्यंत लाभकारी है। इस आसन को करते समय ध्यान रखें यदि आपको कमर से जुड़ी समस्या है तो इसे न करें। यदि कर रहे हैं तो किसी की देखरेख में करें। यदि आपको हार्निया है या अल्सर, पेट में दर्द है तो भी इस आसन को न करें।

करने की विधि

  • जमीन पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अपने दोनों हाथों को अपनी जांघों के बगल में रखें।
  • हथेलियों का रुख जमीन की ओर रहेगा।
  • दोनों घुटनों को मोड़ लें और अपने टखनों को पकड़ लें।
  • सांस भरते हुए सिर व छाती को ऊपर की ओर उठाएं। साथ ही साथ अपनी जंघाओं को भी पीछे से ऊपर की ओर उठाएं।
  • आपके सारे शरीर का वजन व संतुलन पेट पर रहेगा।
  • शुरुआत में इस आसन को 10 सैकेंड होल्ड करें। व धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाएं।

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उज्जायी प्राणायाम

यह प्राणायाम हमारे गले की मांसपेशियों की मसाज करता है। व जमे हुए कफ को निकालने में मदद करता है। हमारे गले व शरीर में जमा हुए जहरीले व दूषित पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। यह हमारे शरीर में कफ निकालने में सहायक है साथ ही कफ के दोष को संतुलित करता है।

करने की विधि

  • अपने दोनों पैरों को मोड़कर आलती-पालती मारकर बैठ जाएं। यदि किसी को घुटनों की समस्या है तो वे इसे कुर्सी या बिस्तर पर बैठकर भी कर सकते हैं।
  • अपनी तर्जनी उंगली और अंगूठे को आपस में जोड़ लें। 
  • कमर व गर्दन को सीधा ही रखें।
  • 5 से 6 सामान्य सांसें लें और छोड़ें।
  • अब इस आसन का अभ्यास शुरू करें।
  • इस आसन में जब आप अपनी सांस को अंदर की ओर भरेंगे तब आपको अपने गले की मांसपेशियों को संकुचित (Contract) करना है। सांस छोड़ते हुए गले की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें।
  • इस प्राणायाम को शुरू में 15 से 20 बार ही करें व धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाएं। परंतु अभ्यास बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि इसे पूरे दिन किया जाए।
  • 30 से 35 बार उज्जायी प्राणायाम अभ्यास एक स्वस्थ शरीर के लिए पर्याप्त है।

कपालभाति क्रिया

कपालभाति हमारे सांस नली में जमा सारे कफ को सांस के माध्यम से बाहर निकाल देता है। इससे सांस नली व नासिका व गले के अवरोध खुल जाते हैं। इससे सांस आने जाने में आराम होता है। मस्तिष्क पर रक्त का प्रभाव बढ़ जाता है जिससे हमारा मन शांत होता है और खुश होता है। यदि हम इसका अभ्यास नियमित रूप से करते हैं, तो इससे कफ से छुटकारा मिल जाता है। शरीर ऊर्जावान रहता है। जिन लोगों को हाईबीपी की समस्या है वे इसे न करें।

करने की विधि

  • दोनों पैरों को मोड़कर आलती-पालती मारकर बैठ जाएं।
  • यदि आपके घुटनों में दिक्कत नहीं है तो इसे आप वज्रासन में भी कर सकते हैं। यदि आप पद्मासन लगा सकते हैं तो पद्मासन में करें।
  • कमर व गर्दन को सीधा रखते हुए कंधों को रिलैक्स छोड़ दें।
  • अपनी तर्जनी उंगली व अंगूठे को उठाते हुए अपने घुटनों पर रख दें। इसके बाद दो तीन सामान्य सांस लें।
  • लंबी गहरी सांस नासिका के अंदर भरें व पूरी सांस को बाहर की ओर छोड़ दें।
  • अब कपालभाती का अभ्यास शुरू करें। इसमें अपनी सांसों को नाक से झटक से बाहर छोड़ना होता है।
  • कपालभाती को 30 से 40 बार करें। एक स्वस्थ शरीर के लिए इतना कपालभाती ठीक है।

योग करने से शरीर निरोग रहता है। कोरोनाकाल में योग की अहमियत और बढ़ गई है। कपालभाति, त्रिकोण आसन, धनुरासन, उज्जायी प्राणायाम आदि वे योगासन व प्राणायाम हैं जिन्हें घर पर ही आसानी से किया जा सकता है। इस मौसम में यह बहुत ही लाभकारी हैं।

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