आंखों में पीले धब्बे हो सकते हैं डिमेंशिया की शुरुआत के संकेत, ऐसे करें बचाव

कई बार आपकी आंखों में पीले धब्बे नजर आते हैं, जिन्हें आप नजरअंदाज कर देते हैं। आंखों में इस तरह के छोटे पीले धब्बे डिमेंशिया के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। डिमेंशिया दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त धीरे-धीरे कम हो

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Jun 25, 2018
आंखों में पीले धब्बे हो सकते हैं डिमेंशिया की शुरुआत के संकेत, ऐसे करें बचाव

कई बार आपकी आंखों में पीले धब्बे नजर आते हैं, जिन्हें आप नजरअंदाज कर देते हैं। आंखों में इस तरह के छोटे पीले धब्बे डिमेंशिया के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। डिमेंशिया दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त धीरे-धीरे कम हो जाती है। मेडिकल भाषा में आंखों में दिखने वाले इन पीले धब्बों को हार्ड ड्रसेन कहते हैं। आइये आपको बताते हैं कि कितनी गंभीर है ये बीमारी।

क्या है हार्ड ड्रसेन

आंखों में दिखने वाले छोटे पीले धब्बों को हार्ड ड्रसेन कहा जाता है। ये धब्बे आंखों की रेटीना के नीचे की पर्त पर वसा और कैल्शियम के जमने से बनते हैं। आंखों की स्कैनिंग मशीन में इन्हें आसानी से देखा जा सकता है। आमतौर पर कुछ लोगों में ये लक्षण उम्र बढ़ने पर दिखते हैं वहीं कुछ लोगों में 40 की उम्र के बाद भी इस तरह के धब्बे दिखाई दे सकते हैं।

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शोध में हुआ खुलासा

आयरलैंड के बेलफास्ट के क्वीन यूनिवर्सिटी में हुए इस शोध को इमरे लेंगेल ने किया है और उन्होंने पाया कि अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे मानसिक रोगों के शिकार 25 प्रतिशत लोगों में आंखों की रेटीना पर ये पीले धब्बे पाए गए हैं। इसके अलावा इस शोध में ये भी पता चला है कि अल्जाइमर रोगियों की रक्त वाहिकाएं समय के साथ संकरी होती जाती हैं, जिससे खून का प्रवाह बहुत कम हो जाता है।

डिमेंशिया का कारण

बढ़ती उम्र के साथ-साथ मस्तिष्‍क की कोशिकायें नष्‍ट होने लगती हैं और तभी डिमेंशिया का खतरा ज्‍यादा होता है। सिर की चोट, दौरा पड़ने, ब्रेन ट्यूमर या फिर अल्‍जाइमर जैसी बीमारियों के चलते मस्तिष्‍क की कोशिकाएं नष्‍ट हो जाती हैं। डिमेंशिया से पीड़ित व्‍यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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उम्र बढ़ने पर होता है खतरा

उम्र बढ़ने के साथ ही डिमेंशिया की संभावना बढ़ जाती है। आमतौर से डिमेंशिया की स्थिति आधा जीवन बीतने के बाद अर्थात जीवनकाल के दूसरे हिस्से में ही, अधिक बनती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर 65 वर्ष की अवस्था के बाद ही, यह स्थिति आती है।

भूलने की है बीमारी

आमतौर पर भी इंसान कुछ न कुछ भूल जाता है, लेकिन डिंमेशिया ग्रस्‍त व्‍यक्ति के साथ यह समस्‍या अधिक होती है। डिमेंशिया में आदमी एक बार जो भी भूल जाता है उसे दोबारा वह याद नहीं आता है। वह एक ही सवाल को दोहरा सकता है। चाहे उसे उसका जवाब कितनी बार दिया जा चुका हो। उसे तो यह भी याद नहीं रहता कि वह उस सवाल को पहले भी पूछ चुका है। या फिर, उसे इस सवाल का जवाब पहले मिल चुका है।

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