जानें, इरफान खान को हुए न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर के बारे में पूरी जानकारी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2018
Quick Bites

  • आंत, स्टमक, पैनक्रियाज़ और अपेंडिक्स में पाया जाता है।
  • इसका व्यवहार कैंसर युक्त ट्यूमर की तरह हो जाता है।
  • ये कोशिकाएं एक जगह जमा होकर ट्यूमर का आकार ग्रहण कर लेती हैं।

अभिनेता इरफान खान की बीमारी की खबर सुनने के बाद लोगों के मन यह जानने की उत्सुकता हुई, आख‍िर न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर कैसी बीमारी है और क्या इसका उपचार संभव है? इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में कई भ्रामक धारणाएं हैं, नाम की वजह से कुछ लोग इसे ब्रेन से जुड़ी बीमारी समझते हैं तो कुछ इसे लाइलाज मरज मानते हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल गुरुग्राम न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. प्रवीण गुप्ता के अनुसार, 'शरीर के अलग-अलग हिस्सों में न्यूरो सेल्स मौज़ूद होते हैं, जो हॉर्मोंस से संचालित होते हैं। कई बार इन कोशिकाओं में असामान्य ढंग से वृद्धि होने लगती है तो ऐसी स्थिति में ये कोशिकाएं एक जगह जमा होकर ट्यूमर का आकार ग्रहण कर लेती हैं। उसी अवस्था को एंडोक्राइन ट्यूमर कहा जाता है। आंत, फेफड़े, लिवर और पैनक्रियाज सहित यह समस्या शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है।

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ट्यूमर की अवस्थाएं

आमतौर पर समस्या की गंभीरता के आधार पर इसे तीन ग्रेड्स में बांटा जाता है। जांच के दौरान शुरुआती दौर में यह ट्यूमर पाचन-तंत्र से संबंधित अंगों जैसे-आंत, स्टमक, पैनक्रियाज़ और अपेंडिक्स में पाया जाता है। जब यह ट्यूमर शरीर के इन अंगों में मौज़ूद रहता है तो वहां इसका आकार छोटा होता है और दवाओं की मदद से इस बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। ट्यूमर संख्या और आकार के आधार पर इसे ग्रेड 1 में रखा जाता है। जब यह खून के ज़रिये लिवर तक पहुंच जाता है तो उस अवस्था को ग्रेड 2 कहते हैं, इस अवस्था में भी बिना सर्जरी के केवल दवाओं की मदद से बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। जब यह ट्यूमर फेफड़े तक पहुंच जाता है तो यह मरज गंभीर रूप धारण कर लेता है, ऐसी अवस्था को ग्रेड 3 कहा जाता है। कई बार स्त्रियों के शरीर में यह गर्भाशय तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में इसे न्यूरो एंडोक्राइन कार्सिनॉयड ट्यूमर कहा जाता है और इसका व्यवहार कैंसर युक्त ट्यूमर की तरह हो जाता है पर यह बीमारी कैंसर की तुलना में थोड़ी कम खतरनाक है।

क्या है वजह  

रेडिएशन से निकलने वाली हानिकारक किरणों और प्रदूषण के प्रभाव की वजह से शरीर की कोशिकाएं गलत ढंग से विभाजित होने लगती हैं, जो अंतत: ट्यूमर का कारण बन जाती हैं। इसके अलावा आनुवंशिकता  को भी इस समस्या के लिए जि़म्मेदार माना जाता है।

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जांच एवं उपचार

इम्युनोहिस्टोलॉजी, हॉर्मोन संबंधी जांच और बायोप्सी से बीमारी की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। आंत या स्टमक में ट्यूमर होने पर सर्जरी द्वारा इसका उपचार संभव है। रेडिएशन और हॉर्मोन थेरेपी द्वारा इस बीमारी का उपचार किया जाता है। इसके साथ मरीज़ को नियमित दवाएं भी दी जाती हैं। स्वस्थ होने के बाद भी तीन वर्षों तक डॉक्टर के संपर्क में रहते हुए रूटीन चेकअप ज़रूरी होता है।

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