आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस या 'मशीनी दिमाग' से क्यों है मानव को खतरा?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 29, 2016
Quick Bites

  • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को मशीनी दिमाग कह सकते हैं।
  • मशीन को इंसानी समझ देने के लिए निरंतर शोध चल रहे हैं।
  • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस किसी मशीन को बुद्धि देने जैसा है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस Artificial Intelligence(AI) कंप्यूटर और रोबोटिक्स की दुनिया में क्रांति जैसी है। यह किसी रोबोट को बुद्धि या समझ देने जैसा है। एआई युक्त रोबोट या यंत्र अपने आसपास के परिवेश के हिसाब से खुद फैसले करने में सक्षम होते हैं। बस ये समझ लीजिए कि इंसान की बुद्धि प्रकृति प्रदत्‍त होती है जबकि रोबोट में इंसान बुद्धि डालता है। इस टर्म को कंप्‍यूटर साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी से जोड़ सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यह हॉलीवुड की उन फिल्मों जैसा है, जिसमें हीरो अपने रोबोट से बातें करता है और सलाह लेता है। हालांकि, अब तो ऐसी फिल्‍में बॉलीवुड में भी बनने लगी हैं।

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आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस वैज्ञानिकों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिसको लेकर हर दिन नए-नए रिसर्च हो रहें है। इस कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता तकनीकी में नित नए बदलाव भी देखने को मिल रहें हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस किसी एक तरह की नहीं है बल्कि यह कई तरह से प्रयोग में लाए जाते हैं। बहुत सारे ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस है जिन्हें हम बहुत पहले से प्रयोग में ला रहें हैं और आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में बड़ी क्रांति देखने को मिल सकती है। हो सकता है मानव जाति के बीच रोबोट भी हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए देखे जा सकते हैं।

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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के प्रकार  

 

1- वीक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस

वीक यानी कमजोर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को हम Artificial Narrow Intelligence कह सकते हैं। यह कुछ इस तरह के इंटेलीजेंस होते हैं जो किसी विशेष डिवाइस में ही अच्छे से काम कर सकती है। जैसे अगर आपका कंप्‍यूटर चेस खेलता है तो वो वह उसी में एक्‍सपर्ट है इसके अलावा वह कुछ नही कर सकता है।

2- स्‍ट्रांग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस
अगर इंसान के दिमाग की बात करें तो यह बहुत ही का तो ये बहुत ही जटिल है। क्‍यों कि इंसान के पास सामान्य बुद्धि ज्‍यादा है। मशीन में इंसान की तरह बुद्धिमत्‍ता नही आ सकती है। इसलिए मशीन को इंसान जैसा दिमाग देने के लिए स्‍ट्रांग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जिसे हम आर्टिफिशियल जनरल इंटेलीजेंस कहते हैं। ये ऐसा सिस्‍टम है जहां पर इंसान का दिमाग और मशीन दोनों लगभग बराबर होता है यानी कि जो इंसान कर सकता है सोच सकता है वह अगर कोई रोबोट या मशीन कर ले तो हम उसे स्‍ट्रांग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कहते हैं। हालांकि इस तकनीक का मार्केट में प्रयोग अभी नही किया जा रहा है।

3- सिंगुलैरिटी (विलक्षणता)
अगर एक बार एक मशीन ने कुछ याद कर लिया तो उसे वह और उन्‍नति करता रहेगा। जैसे, अगर हमारे पास कुछ कंप्‍यूटर है तो मिल कर और अच्छा कंप्‍यूटर बनाएंगे और जो कंप्‍यूटर बनेंगे उनको मिलाकर और भी अच्‍छा कंप्‍यूटर बनाएंगे। ऐसे में जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस है ये और ज्यादा घातीय स्तर तक बढ़ते जायेंगे तो ऐसे में एक चीज़ निकल कर आएगी जिसे हम कहेंगे Singularity या Artificial Super Intelligence। अगर इसे आमतौर पर समझें तो सिंगुलैरिटी ऐसी इंटेजीजेंस है जिसके आगे इंसान भी कुछ नही है मतलब अगर एक बार ये इंसान के दिमाग के स्‍तर पर आ गया तो ये बढ़ते -बढ़ते उससे कही आगे निकल जायेगा। जो कि मानव जाति के लिए अच्‍छा भी है और खतरे भी हैं।

 

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के खतरे

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस युक्त मशीनों से जितने फायदे हैं, उतने ही खतरे भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोचने-समझने वाले रोबोट अगर किसी कारण या परिस्थिति में मनुष्य को अपना दुश्मन मानने लगें, तो मानवता के लिए खतरा पैदा हो सकता है। सभी मशीनें और हथियार बगावत कर सकते हैं। ऐसी स्थिति की कल्पना हॉलीवुड की "टर्मिनेटर" जैसी फिल्म में की गई है।

Image Source : Getty
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