छोटे बच्चों को भी होती है नींद न आने की समस्या (स्लीप डिसऑर्डर), इसके 5 लक्षण

 नींद न आना या अनिद्रा की समस्या के कारण चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, खाना ठीक से न खाना, पेट संबंधित समस्याएं, सुस्ती जैसी प्रॉब्लम आम मानी जाती है।

Ashu Kumar Das
Written by: Ashu Kumar DasUpdated at: Oct 02, 2022 11:00 IST
छोटे बच्चों को भी होती है नींद न आने की समस्या (स्लीप डिसऑर्डर), इसके 5 लक्षण

sleep disorders symptoms: दिनभर की थकान और कई घंटों तक काम करने के बावजूद बिस्तर पर जाने के बाद बार-बार करवटें बदलना, मोबाइल चेक करना, कई बार तो दीवार को देखकर खुद को ये समझाने की कोशिश करना कि नींद बस थोड़ी ही देर में आ ही जाएगी। नींद न आने की समस्या एक बीमारी होती है, जिसे स्लीप डिसऑर्डर कहा जाता है। स्लीप डिसऑर्डर सिर्फ व्यस्कों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी होती है। नींद न आना या अनिद्रा की समस्या के कारण चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, खाना ठीक से न खाना, पेट संबंधित समस्याएं, सुस्ती जैसी प्रॉब्लम आम मानी जाती है। बड़ों में स्लीप डिसऑर्डर की समस्या को पहचानना बहुत आम है, लेकिन छोटे बच्चों में इसके लक्षणों (sleep disorders symptoms in child) का पता लगा पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं बच्चों में होने वाले स्लीप डिसऑर्डर के 5 लक्षण जिन्हें पेरेंट्स को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।

Bacchon ko neend na aane ke lakshan

बच्चों में नींद न आने के लक्षण और संकेत - Bacchon ko neend na aane ke lakshan

बच्चों में नींद न आने की समस्या या स्लीप डिसऑर्डर किसी भी उम्र में देखे जा सकते हैं। ये समस्या 6 महीने से किशोरावस्था तक हो रह सकती है। बच्चों में अनिद्रा के लक्षण निम्नलिखित हैं:

रात को देर से सोना और सुबह बिना कहे उठ जाना।

रात में बार-बार नींद से जगाना और फिर दोबारा सोने में परेशानी महसूस होना।

दिन के समय में 10 से 15 मिनट की कई झपकियां लेना।

खेलने-कूदने की बजाय शांत बैठे रहना।

नियमित तौर पर खाने की खुराक का कम होना।

हर समय सुस्ती महसूस होना।

छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना और चिड़चिड़ापन महसूस होना।

बच्चों को नींद न आने का कारण - Bacchon ko neend na aane ke karan

बुरा सपना : कई बार नींद न आने की समस्या बुरे सपने के कारण हो सकती है। अगर आपका बच्चा छोटा है और टीवी, मोबाइल या लैपटॉप पर वीडियो देखता है तो हो सकता है कि बुरे सपने इन कारणों से आ रहे हों। लिहाजा सोने से पहले या पूरा दिन आपका बच्चा मोबाइल और टीवी पर क्या देख रहा है इस पर ध्यान दें।

वातावरण के कारण : कई बार आसपास के शोरगुल, गर्मी या सर्दी के कारण भी बच्चों को नींद न आने की समस्या हो सकती है। बच्चों को सुलाते वक्त ध्यान दें कि आसपास बिल्कुल शांत माहौल हो। जिस कमरे में बच्चा सो रहा है वहां का तापमान सामान्य हों।

कैफीन का सेवन : आज कल के पेरेंट्स बहुत कम उम्र से ही बच्चों को कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, सोडा जैसी चीजें देने लगते हैं। कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक जैसी चीजों में कैफीन की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है। अगर छोटा बच्चा इसका सेवन करता है तो नींद न आने की समस्या होना लाजिमी है।

दवाइयों का साइड इफेक्ट :  मौसमी बीमारी, पेट से जुड़ी समस्या से राहत पाने के लिए पेरेंट्स छोटे बच्चों को भी हाई डोज दवाएं देने लगते हैं। दवाइयों के हैवी डोज के कारण भी नींद न आने की समस्या हो सकती है।

बच्चों के लिए कितनी नींद है सही?

बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास सही तरीके से हो इसके लिए पर्याप्त नींद बहुत जरूरी मानी जाती है। बच्चा कितना सोएगा ये उसकी उम्र पर निर्भर करता है। 1 से 2 महीने के बच्चे 16 घंटे की नींद लेते हैं, 2 महीने से 1 साल तक के बच्चों को 12 से 14 घंटे की नींद लेना अच्छा माना जाता है। 3 से 5 साल के बच्चे के लिए 10 से 12 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। 6 से 12 साल के बच्चों को 9 से 11 घंटे की नींद और 13 से 16 साल तक 10 घंटे की नींद पर्याप्त होती है।

Disclaimer