परिवार में किसी को भी हुआ है हार्ट अटैक तो समय रहते कराएं 'जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल' जांच, जानें क्यों है जरूरी

हार्ट अटैक और स्ट्रोक अनुवांशिक बीमारियां हैं। सही समय पर जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल की जांच कराकर और डॉक्टर की सलाह लेकर आप इन बीमारियों से बच सकते हैं।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Feb 04, 2020
परिवार में किसी को भी हुआ है हार्ट अटैक तो समय रहते कराएं 'जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल' जांच, जानें क्यों है जरूरी

शरीर में अगर कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाए, तो कार्डियोवस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन बीमारियों में हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, हार्ट फेल्योर, स्ट्रोक आदि प्रमुख हैं। ये सभी बीमारियां अनुवांशिक होती हैं, यानी इन बीमारियों के एक पीढ़ी से दूसरी में पहुंचने की संभावना ज्यादा होती है। इस स्थिति को फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (Familial Hypercholesterolemia) कहते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर आप सही समय पर अपने जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल की जांच करा लें, तो भविष्य में जानलेवा बीमारियों के खतरों से बच सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल शरीर में बनने वाला एक गाढ़ा लिसलिसा पदार्थ होता है, जो कई बॉडी फंक्शन्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मगर कुछ खास प्रकार के कोलेस्ट्रॉल विशेष स्थितियों में आपकी धमनियों में जमा हो जाते हैं और ब्लॉकेज का कारण बन सकते हैं, जिससे रक्त प्रवाह (Blood Circulation) में बाधा आती है और व्यक्ति को हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

जांच कराकर गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं

जिन लोगों के परिवार में पहले किसी भी व्यक्ति को हार्ट अटैक या दिल की दूसरी कोई बीमारी हो, उन्हें पहले से सावधान रहना चाहिए। World Heart Federation के अनुसार जेनेटिक हाई कोलेस्ट्रॉल की तरफ अक्सर लोग ध्यान नहीं देते हैं और न ही इसका इलाज कराते हैं। अगर सही समय पर मरीज और उसके परिवार के लोग जांच कराएं, तो जीवनशैली और खानपान में थोड़े बहुत बदलाव करके हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।

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क्या है फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया?

फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (FH) एक खतरनाक स्थिति है। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL Cholesterol) की मात्रा बढ़ी हुई है, तो इस बात की 50% तक संभावना है कि उसके बच्चों या आने वाली पीढ़ियों को भी इसी कंडीशन का सामना करना पड़े। दरअसल LDL यानी लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (Low-Density Lipoprotein) जेनेटिक म्यूटेशन से जुड़ा होता है। इसलिए ये जीन्स के द्वारा अगली पीढ़ी में पहुंच जाते हैं। धीरे-धीरे कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर धमनी के भीतर ये दीवार जैसा बना लेते हैं, जिससे धमनियों में खून सही तरीके से नहीं प्रवाहित हो पाता है।

कैसे की जाती है जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल की जांच?

जेनेटिक हाई कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना बहुत आसान है। इसे सिंपल ब्लड टेस्ट के द्वारा चेक किया जा सकता है। इस जांच में खून में LDL के मात्रा की जांच की जाती है। अगर LDL की रीडिंग वयस्कों में 190 से ज्यादा और बच्चों में 160 से ज्यादा है, तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। अगर किसी पुरुष की उम्र 50 से ज्यादा और महिला की उम्र 60 से ज्यादा है, तो डॉक्टर्स उनमें भविष्य में हार्ट अटैक की संभावना की भी जांच करते हैं। ऐसे युवा जिनके मां-बाप या किसी एक की मृत्यु हार्ट संबंधी बीमारियों से हुई हो, उन्हें डॉक्टर्स जेनेटिक टेस्टिंग की सलाह दे सकते हैं।

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क्यों जरूरी है कोलेस्ट्रॉल की जांच

दरअसल कोलेस्ट्रॉल की अधिकता के कारण आप भविष्य में जानलेवा बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। अगर समय रहते आपको यह पता चल जाता है कि आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है या आपको दिल की बीमारी होने की संभावना है, तो आप मेडिकल जांच, दवाओं और डॉक्टर की बताई सलाह द्वारा इस स्थिति को कंट्रोल कर सकते हैं। युवावस्था में ही अगर आप कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कर लेते हैं, तो आपकी अगली पीढ़ी को इन बीमारियों के होने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूरी है।

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