शिशु की देखभाल करते समय ये गलतियां करती हैं माएं, जानें जरूरी बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 07, 2018
Quick Bites

  • कई बार माताएं समय बचाने के चक्‍कर में सोते हुए बच्‍चे के मुंह में बोतल लगा देती है।
  • ऐसा करने से कभी-कभी गले की नली में दूध की कुछ मात्रा रह जाती है। 
  • बच्‍चों को ज्‍यादा देर गोदी में पकड़ने से उसकी आदते खराब हो जाती है।

बच्‍चे बहुत ही नाजुक होते है इसलिए उनकी देखभाल करते हुए हर किसी को कुछ बातों का खास ख्‍याल रखना चाहिए। लेकिन बच्‍चों के देखभाल से जुड़ी बहुत सी ऐसी बाते है जिनसे हम अनजान है। आइए जाने बच्‍चों के देखभाल से जुड़ी उन बातों के बारे में इस स्‍लाइड शो में जिनसे हम अनजान हैं। 

इंफेक्‍शन का खतरा

छोटे बच्‍चों की त्‍वचा बहुत ही नाजुक होती है इसलिए उनको इंफेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है इसलिए उन्हें छूने या गोद में उठाने से पहले अपने हाथ साबुन से धोएं या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। सामान्‍य सी ठंड बच्‍चे को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य का खयाल रखें और अपने बच्‍चे को भी स्‍वस्‍थ रखें। आपके स्‍वास्‍थ्‍य का बच्‍चे की सेहत पर गहरा असर पड़ता है।

बोतल से दूध पिलाने के नुकसान

कई बार माताएं समय बचाने के चक्‍कर में सोते हुए बच्‍चे के मुंह में बोतल लगा देती है। ऐसा करने से कभी-कभी गले की नली में दूध की कुछ मात्रा रह जाती है। जिससे बच्‍चे को सांस लेने में कठिनाई होती है। इसके साथ ही बोतल से दूध पीने से बच्‍चों में पेट से जुड़ी कई बीमारियां जैसे डायरिया, दस्‍त आदि भी हो सकती है। इसलिए जहां तक हो सके कोशिश करें कि बोतल से दूध न पिलाएं।

डाइपर का इस्‍तेमाल

छोटे समय सोते समय कई बार पेशाब करते हैं जिनसे गीलेपन के कारण उनकी नींद कई बार खराब होती है। ऐसे में आप बच्‍चों को डाइपर पहना सकती हैं। ताकि वह सूखेपन का अनुभव करें और आराम से सो सकें।

बच्‍चों को गोदी में पकड़ना

पहले माना जाता था कि बच्‍चों को ज्‍यादा देर गोदी में पकड़ने से उसकी आदते खराब हो जाती है। ऐसे में मां अपने बच्‍चे को गोदी में पकड़ कर अपने आपको दोषी मानने लगती थी। लेकिन यह सब सही नहीं है। बल्कि बच्‍चों की जरूरते समय पर पूरी होने से वह आपसे बहुत कुछ सीखते है और आपकी इज्‍जत करने लगते हैं।

संगीत गुदगुदाता है बच्‍चों को

हल्‍के संगीत से बच्‍चों को बहुत आराम मिलता है। यहां तक की रोता हुआ बच्‍चा इससे शांत हो जाता है और कई बार तो बच्‍चा इसको सुनते-सुनते सो जाता है। इसके लिए आपको कुछ गुनगुना सकते हैं और अगर आपका मन नहीं है तो किसी भी सीडी में नरम और आरामदायक गाना चला सकते हैं।

भरपेट दूध

अकसर ऐसा होता है कि बच्‍चा दूध पीते समय सो जाता है और कुछ ही देर में दोबारा उठकर रोने लगता है। ऐसा इसलिए होता है कि मां को लगता है कि उसका पेट भर गया और वह सो गया। परन्‍तु सही मायनों में उसका पेट नही भरता है। ऐसे में उसके तलवों को अंगुली से गुदगुदाते रहें, ताकि वह भरपेट दूध पी सके।

सुगांधित चीजों से दूरी

कुछ सुगंध ऐसी होती है जिसके इस्‍तेमाल से बच्‍चों की त्‍वचा में एलर्जी या खुजली होने लगती है। इसलिए अपने बच्‍चे के लिए बहुत ज्‍यादा सुगां‍धित तेलों या लोशन का इस्‍तेमाल न करें। आप बच्‍चों की मालिश के लिए जैतून या तिल जैसे तेलों का इस्‍तेमाल कर सकती हैं।

रोने का अर्थ हमेशा दर्द नहीं

जानकार पहले सोचते थे कि अगर बच्‍चा बिना किसी कारण के रो रहा है, तो उसे उदरशूल की शिकायत है। हालांकि, अब हमें इसके अन्‍य कारण जैसे एसिड रिफ्लेक्‍स आदि भी बच्‍चे को बिना किसी वजह से रुला सकते हैं। यह दर्द तो देता है, लेकिन इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है।

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