लापरवाही की वजह से होता है बच्चों के कान में इंफेक्शन, ध्यान रखें ये 3 बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 04, 2018
Quick Bites

  • कान हर व्यक्ति के शरीर का महत्वपूर्ण अंग होता है।
  • शिशु को खांसी-जुकाम हो तो ये भी गंभीर रूप ले लेता है।?
  • कान के इंफेक्शन को ठीक करने के लिए सर्जरी अच्छा विकल्प है।

कान हर व्यक्ति के शरीर का महत्वपूर्ण अंग होता है। यदि कान में जरा भी दिक्कत होती है तो व्यक्ति को सुनाई देना कम हो जाता है या कभी कभी बंद भी हो जाता है। यदि ऐसी कोई समस्या बड़ों को होती है तो वह इसे जाहिर कर देते हैं। लेकिन बच्चों के मामले में स्थिति अलग होती है। बच्चों को कोई समस्या होने पर खुद समझना पड़ता है। यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि शिशु के कान में इनफेक्शन है। अगर शिशु को खांसी-जुकाम है या उसकी नाक बह रही है और अचानक तीन से पांच दिन बाद उसे बुखार भी हो जाता है, तो संभव है कि उसे कान में इनफेक्शन हो। आइए जानते हैं कैसे समझे शिशु के कान में हो गया है इन्फेक्शन।

क्या हैं इसके कारण

  • सर्दी-जुकाम की वजह से शिशु के मध्य कान में जल्दी सूजन आ जाती है। सूजन के कारण तरल उसके कान के भीतर फंस गया है। जो इंफेक्शन का रूप ले लेता है। 
  • जब इनफेक्शन होता है, तो कान में मवाद जमने लगता है। ऐेसी स्थिति में इन्फेक्शन होने के चलते शिशु बुखार की चपेट में आ जाता है। इस तरह के कर्ण संक्रमण को एक्यूट ओटाइटिस मीडिया कहा जाता है।
  • कान का इनफेक्शन होने का एक अन्य कारण यह है कि उसके मध्य कान में नलिका छोटी और अनुप्रस्थ (हॉरिजोंटल) है, क्योंकि यह अभी भी विकसित हो रही है। जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है।

सर्जरी है इसका इलाज

शुरुआती दौर में कान बहने का इलाज एंटीबॉयोटिक और ओरल दवाओं से किया जा सकता है, जो अस्थायी समाधान है। स्थायी समाधान के लिए रोगी को सर्जिकल प्रक्रियाओं की जरूरत होती है। सर्जरी की ये प्रक्रियाएं इस प्रकार हैं।

मायरिंगोप्लास्टी: एक सरल सर्जरी है। यह सर्जरी कान में हुए छोटे छेद की समस्या का बेहतर इलाज करती है। इसमें कान के पीछे की त्वचा को कान के नए पर्दे के रूप में लगाया जाता है।

टिम्पैनोप्लास्टी: यह सर्जरी आमतौर पर सामान्य बेहोशी की स्थिति में की जाती है। इस सर्जरी में पर्दे के साथ सुनने की हड्डी को भी बदला जाता है।

मसटॉइडेक्टमी: सर्जरी की यह प्रक्रिया सामान्य बेहोशी के तहत की जाती है। इस सर्जरी के माध्यम से कान के पीछे की जो हड्डी गल जाती है, उसे निकाल दिया जाता है।

अपना सकते हैं घरेलू नुस्खे

  • प्याज में भी दर्द निवारक गुण होते हैं। अगर आप रोज प्याज खाते हैं तो आपकी इम्यूनिटी भी ठीक रहती है। कान के दर्द के लिए प्याज की गांठ को गर्म राख में सेंक लें और फिर उसका रस निकालकर कान में डालें। इससे कान के दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
  • मूली के पत्ते भी कान के दर्द को आसानी से ठीक कर देते हैं। इसके लिए मूली के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। अब इस रस को तिल के तेल में देर तक पकाएं। जब रस भाप बनकर उड़ जाए तब इस तेल को कपड़े से छानकर शीशी में भर लें। अब जब भी कान में दर्द हो इस तेल को हल्का सा गर्म करें औऱ दो-तीन बूंद कान में डालें। इससे कान दर्द तुरंत ठीक होगा। ये तेल एक साल तक खराब नहीं होता है।
  • जैतून का तेल भी कान के दर्द में बेहद फायदेमंद होता है। जैतून के तेल में दर्द निवारक गुण होते हैं और इसमें त्वचा के लिए कई पोषक तत्व भी होते हैं। कान के दर्द के लिए जैतून के तेल को हल्का सा गुनगुना कर लें और कान में डालें। इससे कान का दर्द थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा। आप चाहें तो रुई के फाहे को इस तेल में भिगाकर कान के अंदर भी रख सकते हैं।
  • कान के दर्द में तुलसी के पत्ते बड़े कारगर होते हैं क्योंकि इनमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। इसके लिए तुलसी की पत्तियों को पीसकर उसके रस की दो-तीन बूंद कान में डालें। तुलसी के इस रस से कान का इंफेक्शन ठीक होता है और दर्द दूर होता है। कान के अंदरूनी जख्मों को भी ये रस ठीक करता है।
  • लहसुन में भी एंटीसेप्टिक गुण होते हैं और ये दर्द को भी दूर करता है। इसके लिए लहसुन की दो कलियों को अच्छी तरह से पीस लें। अब इसमें एक चुटकी नमक मिलाकर ऊनी कपड़े से बनायी गयी पुल्टीस को दर्द वाले हिस्से के ऊपर रखें इससे दर्द में आराम मिलेगा। इसके अलावा लहसुन की तीन-चार कलियों को सरसों के तेल में भूनकर अस तेल को कान में डालें। इससे भी आपको लाभ मिलेगा।

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