दस्‍त, नेत्र विकार और इन 5 रोगों का नाश करती है लोध जड़ी-बूटी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 13, 2018
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • इसके फूल खुशबूदार और सफेद या काले रंग के होते हैं
  • और इसका फल गोल, आधा इंच लंबा, चिकना, बैंगनी या काला रंग होता है।
  • इसके फल में 1 से 3 बीज भरे होते हैं जो औषधि के रूप में उपयोग की जाती है।

लोध एक ऐसा पौधा है जिसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटी के तौर पर इस्‍तेमाल किया जाता है। लोध्र का वानस्पतिक नाम सिम्प्लोकास रेसीमोसा है। यह मुख्य रूप से ब्लीडिंग डिसऑर्डर, दस्त और नेत्र विकारों में उपयोग किया जाता है। लोध्र के पेड़ उत्तर और पूर्व भारत के पहाड़ी जगहों पर पाए जाते हैं। लोध्र का पेड़ बहुत ही बड़ा और ऊंचा होता है। इसके पत्ते अंडे की तरह गोल और 9 से 15 सेमी. लंबे होते हैं। इसके फूल खुशबूदार और सफेद या काले रंग के होते हैं और इसका फल गोल, आधा इंच लंबा, चिकना, बैंगनी या काला रंग होता है। इसके फल में 1 से 3 बीज भरे होते हैं। इस पेड़ की छाल भूरे रंग की होती है, जो औषधि के रूप में उपयोग की जाती है।

कील मुहांसों में लाभदायक

लोध की छाल, धनिया का पाउडर और बच तीनों बराबर मात्रा में मिलाकर पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इस लेप को सुबह स्नान और रात को सोने से पहले मुंह पर लगाएं। इससे कील-मुंहासे ख़त्म हो जाएंगें। इसके साथ ही चेहरे की चमक भी बढ़ेगी।

दस्‍त में है फायदेमंद

इसकी छाल से तैयार 50-60 मिलीलीटर काढ़े को विभाजित खुराक में डायरिया और खुनी बवासीर का इलाज करने के लिए लिया जाता है। काढ़ा छोटे रक्त वाहिकाओं को नियंत्रित करता है और रक्तस्राव को नियंत्रित करता है।

घाव भरने के लिए

धातकी और लोध का पाउडर घाव भरने को बढ़ावा देते हैं। लोध, निग्रोधा कली, खादीरा, त्रिफला और घृत से एक पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट का सेवन घावों को ठीक करता है। लोधरतवाक के बारीक पाउडर को घाव जल्दी भरने लगते हैं।

इसे भी पढ़ें: ब्रेकफास्ट में केला खाने से मिलते हैं ये 2 चमत्कारिक लाभ

मसूढ़ों में दर्द और खून आना

लोध की छाल का काढ़ा बनायें और उसके साथ गरारे करें। इससे कुछ ही दिनों में मसूढ़ों का ढीलापन और मसूढ़ों से खून का आना बंद हो जायेगा। दंत क्षय में लोध, मस्टा और रसंजाना का पेस्ट शहद के साथ मिलाकर लेने चाहिए। लोध के पत्तों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से मसूढ़ों से खून आना और दर्द आदि खत्म हो जाता है।

आंखों के विकार करे दूर

आंखों का दुखना, पानी बहना, सूजन और लाली सभी में इसका प्रयोग किया जाता है। आँखों की सूजन और लाली होने पर इसका लेप पलकों पर किया जाता है। कंजंक्टिवाइटिस का इलाज करने के लिए पौधे की छाल का पेस्ट पलकों पर लगाया जाता है।

इसे भी पढ़ें: लिवर में गंदगी से होती हैं गंभीर बीमारियां, इस तरह 10 मिनट में करें लिवर साफ

ब्‍लीडिंग डिसऑर्डर

यूटरन ब्लीडिंग डिसऑर्डर के इलाज के लिए 50-60 मिलीलीटर की खुराक में ठंडा जलसेक या काढ़े दिया जाता है। लोध पाउडर का बाहरी अनुप्रयोग हिमास्टसिस (रक्त प्रवाह को रोकने की सर्जिकल प्रक्रिया) के रूप में कार्य करता है।

कितनी मात्रा में करें लोध का प्रयोग

औषधीय रूप में लोध की छाल का इस्तेमाल किया जाता है। पाउडर के रूप में 3-5 ग्राम की मात्रा में उपयोग करें। इसके बने काढ़े को 50-100 ml की मात्रा में लिया जा सकता है। बीजों के पाउडर को 1-3 ग्राम मात्रा में लिया जा सकता है।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Home Remedies In Hindi

Loading...
Write Comment Read ReviewDisclaimer
Is it Helpful Article?YES1394 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर