ये 5 तरीके हैं ब्रेस्ट कैंसर के 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट', जानें कैसे किया जाता है इलाज

अगर ठीक समय से इलाज शुरू कर दिया जाए, तो कैंसर को आसानी से मात दी जा सकती है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के इन 5 तरीकों को माना जाता है 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट'।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Oct 08, 2018Updated at: Oct 08, 2018
ये 5 तरीके हैं ब्रेस्ट कैंसर के 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट', जानें कैसे किया जाता है इलाज

कैंसर एक खतरनाक रोग है, जो हर साल लाखों लोगों की जिंदगियां छीन लेता है। कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। आज कैंसर के लगभग 200 से ज्यादा प्रकारों को खोजा जा चुका है मगर कुछ कैंसर ऐसे हैं, जिनके मरीजों की संख्या हर साल बढ़ रही है। ब्रेस्ट कैंसर उनमें से एक है। आमतौर पर माना जाता है कि ब्रेस्ट कैंसर यानी स्तन के कैंसर का खतरा सिर्फ महिलाओं को होता है मगर ऐसा नहीं है। पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले पाए गए हैं।
अगर ठीक समय से इलाज शुरू कर दिया जाए, तो कैंसर को आसानी से मात दी जा सकती है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के इन 5 तरीकों को माना जाता है 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट'। आइए आपको बताते हैं क्या हैं ये।

सर्जरी

ब्रेस्‍ट कैंसर का उपचार आमतौर से सर्जरी का प्रकार निर्धारित करने के साथ शुरू होता है। पूरा स्तन निकलवाने (मास्टेक्टॉंमी) या केवल कैंसरयुक्त लम्प और इसके आसपास के स्व‍स्थ टिश्युओं की कुछ मात्रा निकलवाने (लम्पेमक्टामी) के दो विकल्प हैं। सर्जरी के बाद आपके डॉक्टर रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी या इन थेरेपीज के मिले-जुले उपचार की सिफारिश कर सकते हैं। अतिरिक्त थेरेपी कराने से कैंसर के फिर से होने या फैलने का खतरा घट जाता है।

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रेडिएशन थेरेपी

आमतौर से लम्पेक्टॉमी के बाद पीछे बचने वाली किसी कैंसरयुक्त कोशिकाओं को नष्ट करने और कैंसर को फिर से होने से रोकने के लिए रेडिएशन थेरेपी की जाती है। रेडिएशन थेरेपी के बिना कैंसर फिर से होने की आशंका 25 प्रतिशत बढ़ जाती है। रेडिएशन थेरेपी में कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए हाई एनर्जी और टार्गेटेड बीम का प्रयोग किया जाता है। पहले रेडिएशन थेरेपी खतरनाक थी क्योंकि इससे फेफड़ों और दिल को नुकसान हो जाता था, मगर धीरे-धीरे इन खतरों को कम किया जा चुका है।

कीमोथेरेपी

कीमोथेरेपी की जरूरत इस पर निर्भर करती है कि कैंसर कितना फैल चुका है। कुछ मामलों में कीमोथेरेपी की सिफारिश सर्जरी कराने से पहले की जाती है ताकि बड़े ट्यूमर को सिकुड़ाया जा सके जिससे सर्जरी से यह आसानी से निकाला जा सके। कैंसर फिर से होने पर कीमोथेरेपी आमतौर से जरूरी हो जाती है। कीमोथेरेपी के एक प्रकार को हार्मोनल कीमोथेरेपी भी कहते हैं इसकी सिफारिश तब की जाती है जब पैथालॉजी रिपोर्ट में कैंसर के एस्ट्रोजेन-रिसेप्टर पॉजिटिव होने का पता चला हो। हार्मोनल कीमोथेरेपी में प्राय: टैमोक्सी-फेन (नोल्वाडेक्स) दवा का उपयोग किया जाता है। टैमोक्सीमफेन, एस्ट्रोजन को स्तन कैंसर वाली ऐसी कोशिकाओं से बाहर रोक देती है जो एस्ट्रोजेन-रिसेप्टर पॉज़िटिव होती हैं जिससे कैंसर के फिर से होने की दर 30 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

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हार्मोनल थेरेपी

एरोमाटेज इनहिबिटर्स जैसी दवाएं, हार्मोनल थेरेपी का अन्य प्रकार हैं। इन दवाओं में शामिल हैं: एनास्ट्राज़ोल (आरिमिडेक्स), एक्सेमेस्‍टेन (एरोमासिन) और लेट्रोज़ोल (फीमेरा)। ये ओवरी के अलावा सभी अन्य‍ टिश्युओं में एस्ट्रोजन का बनना रोककर शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा घटा देती हैं। ये दवाएं मेनोपॉज वाली महिलाओं में बहुत लाभदायक हैं क्योंकि मेनोपॉज के बाद ओवरी में एस्ट्रोजन का बनना रुक जाता है।

टारगेटेड थेरेपी

स्टैंडर्ड कीमोथैरेपी में मरीज के शरीर में मौजूद स्वस्थ और अस्वस्थ दोनों कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है जबकि टागरेटेड थैरेपी में कैंसर सेल्स को ब्लॉक करके केवल उसे नष्ट किया जाता है इसलिए मरीज की स्वस्थ कोशिकाएं इस थैरेपी में बच जाती हैं। कैंसर सेल्स स्वस्थ कोशिकाओं से अलग होती हैं। ये थैरेपी इस तरह डिजाइन की गई है कि इससे कैंसर सेल्स का अलग से पता लगाया जा सकता है और उन्हें ऐसे सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जा सकता है कि स्वस्थ कोशिकाओं को कोई हानि न पहुंचे।

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