कैसे इस्लामिक प्रेयर रिचुअल करती है बीमारियों को दूर, जानें...

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 30, 2017
Quick Bites

- योगासन से मिलते-जुलते
- खुशी का जरिया
- स्ट्रेस भगाएं

इस्लामिक प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है, जो दिन में पांच बार होती है। इसे लोग बकायदा नियमों के साथ करते हैं। इसमें सभी लोग उन्हें जो कुछ मिला है, उसके लिए अपने अल्लाह को शुक्रिया कहते हैं और बेहतर जीवन की दुआ मांगते हैं। साथ ही आपको एक चीज और बताते चलें कि जिस तरह इस्लामिक प्रेयर की जाती है, उसमें जिस तरह के शारीरिक गतिविधियां मौजूद हैं, वे कोई सामान्य गतिविधि नहीं है। सही मायनों में अगर देखें तो उन सभी मूवमेंट के जरिए हमारे स्वास्थ्य को कोई न कोई लाभ अवश्य मिलता है। मसलन इससे पीठ में दर्द खत्म होता है, जोड़ों में इलास्टिसिटी बढ़ती है आदि। आइए इस्लामिक प्रेयर के तौर तरीकों से मिलने वाले लाभों के बारे में जानते हैं।

Prayer

अध्ययन क्या कहता है

इंटरनेशनल जरनल आफ इंडस्ट्रियल एंड सिस्टम्स इंजीनियरिंग में छपे अध्ययन से पता चलता है कि इस्लामिक प्रेयर के दौरान जो भी शारीरिक मूवमेंट्स होती है, जिससे कई तरह के शारीरिक लाभ मिलते हैं। ध्यान दें तो पता चलेगा कि इस प्रार्थना के तहत आपके घुटने, पीठ आदि शरीर के सभी हिस्से शामिल होते हैं। इससे फिजीकल एंग्जाइटी को पूरी तरह दूर भगाया जा सकता है। आपको यह भी बता दें कि 1.6 बिलियन मुस्लिम जब एक साथ मक्का की ओर मुंह करके अपना सिर झुकाते हैं, तो उस समय वे अपने शरीर को भी स्ट्रेच कर रहे होते हैं, जिससे उनके शरीर को कई हेल्दी फायदे पहुंचते हैं। यही नहीं वे नियमित रूप से ऐसा पांच बार करते हैं जो कि स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर और लाभकर माना गया है।

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योगासन से मिलते-जुलते

अगर आप गौर करें तो पता चलेगा कि इस्लामिक प्रार्थना के दौरान जो भी गतिविधियां होती हैं, वे कहीं न कहीं योगासन से मेल खाती हैं। इसे आप कमर के निचले हिस्से में हो रहे दर्द के दौरान किया जाता है। इसे विज्ञान में फिजीकल थैरेपी के नाम से जाना जाता है। आप कह सकत हैं कि मुस्लिम प्रेयर के दौरान पूरी ह्यूमन ब्वाडी मौनिटर होती है जो कि उसे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से लाभ पहुंचाता है।

जोड़ों की इलास्टिसिटी बढ़ाए

इस्लामिक प्रार्थना के दौरान घुटनों के बल झुकने वाले पोस्चर के जरिए आप अपने घुटनों को भी बहुत आराम देते हैं। जिन लोगों को उठने-बैठने दिक्कते आती हैं, उनके लिए यह बेहतरीन पोस्चर है। दरअसल इसके जरिए आपके जोड़ों में इसलास्टिसिटी बढ़ती है। आप जैसे चाहें चल-फिर सकते हैं। असल में एक उम्र के बाद ज्यादा लोगों में घुटनों में ही तकलीफ देखी जाती है। लेकिन जो लोग नियमित नमाज पढ़ते हैं और घुटनों के बल आगे की झुकते हैं, उन्हें घुटनों या जोड़ों से संबधी बीमारी कम होती है क्योंकि उनके घुटने निमियत सक्रिय मोड में रहते हैं।

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स्ट्रेस भगाएं

जब आप एक साथ कई लोगों के साथ मिलते हैं, इससे आपका तनाव भी दूर भागता है। अतः यह एक बेहतरीन तरीका है कि आप अपने तमाम जानने वाले-गैर जानने वालों के साथ मिलकर एक साथ इस्लामिक प्रार्थना कर रहे होते हैं। उन्हें गले लगा रहे होते हैं। उनके साथ बातचीत कर रहे होते हैं। इससे मन की बात बाहर निकल जाती है और मन हल्का रहता है। नतीजतन किसी भी तरह का तनाव होने से, पूरा का पूरा गुबार बाहर निकल जाता है जो कि तनाव के स्तर को कम करता है। सिस्टम्स साइंस एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के चेयर और को-आथर मोहम्मद खसावनेह कहते हैं, ‘सामाजिक होने से उसका असर हमारी जीवनशैली और स्वास्थ्य पर पड़ता है और इस्लामिक प्रार्थना इसकी पूरी-पूरी छूट व माहौल देात है।’

खुशी का जरिया

इस्लामिक प्रार्थना में चूंकि सब मिलकर एक साथ प्रार्थना करते हैं, दोस्तों-यारों के साथ मुलाकातें होती हैं तो ऐसे में यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि इससे खुशी भी मिलती है।

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