COVID-19: क्‍या हृदय रोगियों के लिए ज्‍यादा खतरनाक है कोरोनावायरस? एक्‍सपर्ट से जानिए रोकथाम के उपाय

COVID-19: कोरोनावायरस का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते अन्‍य बीमारियों से ग्रसित लोग ज्‍यादा परेशान हैं।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Mar 19, 2020Updated at: Mar 19, 2020
COVID-19: क्‍या हृदय रोगियों के लिए ज्‍यादा खतरनाक है कोरोनावायरस? एक्‍सपर्ट से जानिए रोकथाम के उपाय

महामारी बन चुका कोविड-19 तेजी से पांव पसार रहा है। दुनिया भर में हजारों लोगों की जान ले चुका कोरोना वायरस 3 लोगों की जान ले चुका है। 150 से ज्‍यादा लोग संक्रमित हैं। सरकार, स्‍वास्‍थ्‍य संगठन और एक्‍सपर्ट लोगों को अलग-अलग माध्‍यमों से जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने लोगों को सोशल डिस्‍टेंसिंग और आइसोलेशन (सामाजिक दूरी और अलगाव) की सलाह दी है। इन सब के बीच एक सवाल है जो लोगों के मन में उठ रहे हैं, कि क्‍या जिन लोगों को हृदय संबंधी समस्‍या है उनके लिए कोरोना वायरस कितना खतरनाक है। दरअसल, ऐसा इसलिए सोचा जा रहा है क्‍यों कि हाल ही में कोरोना से ही कुछ मौतों में हृदय रोग, डायबिटीज और अन्‍य गंभीर रोग देखने को मिले थे। इन सवालों को लेकर हमने एक्‍सपर्ट से बात की है, जिसमें उन्‍होंने विस्‍तार से जानकारी दी है।

एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के हृदय रोग विशेषज्ञ, डॉ. रमाकांत पांडा का कहना है कि, "कोरोना वायरस जैसी महामारी का प्रकोप फैलने पर सभी को बेहद सतर्क रहने और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं द्वारा निर्देशित एहतियातों का पालन करने सबसे अधिक जरूरत है। COVID-19 और दूसरी समान बीमारियों में सबसे बड़ा फर्क यह है कि 80% मामलों में इसके लक्षण बेहद मामूली दिखाई देते हैं। केवल 15% मामलों में यह तीव्र दिखते है जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने और उचित देखभाल की जरूरत होती है और केवल 4-5% मामलों में ही इंटेन्सिव केयर की और वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत होती है। COVID-19 के तेजी से फैलने का कारण यही 80% मामलों में लक्षणों का अति साधारण होना ही है जिसकी वजह से पता ही नहीं चल पाता और रोगी को अलग-थलग भी नहीं रखा जाता। वास्तव में यही लोग रोग को फैलाते हैं। इसके मुकाबले सार्स या मर्स (SARS & MERS) बीमारी के अधिकांश मामलों में लक्षण इतने कठोर और स्पष्ट होते हैं कि आसानी से पता लगाकर उन्हें अलग रखा जा सकता है।"

coronavirus-in-india

डॉ. रमाकांत पांडा का जोर देते हुए कहना है कि सरकार द्वारा सामाजिक दूरी और अलगाव जैसे कदम करोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। इस संदर्भ में रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों का सारांश इस प्रकार है:

1. 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इससे प्रभावित नहीं होते या बीमारी बेहद मामूली होती है।

2. श्वास नलिका के किसी भी वायरस के संचरण की क्षमता के आधार पर ही उसकी रोकथाम या शमन की रणनीति बनती है। एनईजेएम (न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन) के नवीनतम अंक के अध्ययन के मुताबिक इसकी मूलभूत प्रजनन क्षमता को 2.2 आंका गया है यानी औसतन इस बीमारी से प्रभावित हर व्यक्ति दो लोगों में इसका इनफेक्शन प्रसारित करता है। अगर इस बीमारी पर रोक लगानी है तो इसकी प्रजनन क्षमता को 1% से नीचे लाना ही होगा।

3. कोविड-19 साधारण जुकाम और फ्लू के मुकाबले अधिक संक्रामक है। चूंकि यह सर्वाधिक संक्रामक है इसलिए सामाजिक दूरी बनाना सबसे अधिक जरूरी है। इस संदर्भ में सरकार द्वारा उठाए गए कदम बेहद अच्छे हैं क्योंकि कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति की पहचान इतनी आसान नहीं है। हर नागरिक को यह समझना चाहिए कि ऐसे में किया गया सहयोग लंबे समय में उनके ही हित में है।

4. सामाजिक अलगाव को तो जीवन शैली का हिस्सा बनाना होगा क्योंकि यह वायरस अगले तीन से छह महीने तक लगातार संक्रमण फैलाता रहेगा और समय-समय पर इसके मामलों में वृद्धि होती दिखेगी। चूंकि इसका टीका तैयार होने में अभी समय लगेगा इसलिए यह जरुरी है कि सभी स्वास्थ्य मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ द्वारा बताए गए निर्देशों का अक्षरश: पालन करें।

5. वयस्क लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे इस बीमारी के आरंभ में गले के भीतर वायरस की एकाग्रता से निपटने के लिए भाप की सांस लें और नमक वाले गुनगुने पानी के गरारे करें। (वायरस के संक्रमण की तीव्रता रोकने के लिए)

dr-panda

क्‍या हृदय रोगियों को कोरोना का खतरा ज्‍यादा है? 

इस रोग की जद में अधिकतर हृदय रोगियों के आने के सर्वे पर टिप्पणी करते हुए डॉ. पांडा का कहना है "हाल में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियालॉजी के नवीनतम बुलेटिन में कहा गया कि करोना वायरस की बीमारी से ग्रसित कार्डियोवैस्कुलर रोगियों में मृत्यु का प्रतिशत 10.5 तक पहुंच गया है। जबकि सच्चाई यह है कि ह्रदय रोगियों में 50% डायबीटिज से पीड़ित होते हैं, 30% रक्तचाप संबंधी बीमारी से ग्रसित होते हैं और 5-10% धूम्रपान करनेवाले होते हैं। इस तरह एसीसी (अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी) की जर्नल के मुताबिक केवल 5.6% भारतीय यानी प्रति एक लाख की जनसंख्या में 5684 लोग ही कार्डियोवैस्‍कुल डिजीज से प्रभावित होते हैं।" 

अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की बुलेटिन के मुताबिक सांस नलिका की पुरानी अंतर्निहित बीमारी से पीड़ितों में मृत्यु दर 6.3% है।

डॉ. पांडा ने सतर्क किया कि, "वास्तव में तो पूरी जीवन शैली बदल देने की जरूरत है। अगर निर्देश के मुताबिक ना जिया गया तो इसके मामलों में बढ़ोतरी जरूरी होगी। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल होने के नाते हम एशियन हार्ट्स इंस्टीट्यूट में खांसी और जुकाम से पीडित हर व्यक्ति की सघन जांच कर रहे हैं। हॉस्पिटल के हर एंट्री प्वाइंट पर तापमान सेंसर्स लगाकर विजिटर्स की संख्या को कम कर रहे हैं।" 

Inputs: Dr. Ramakanta Panda- Cardiac Surgeon, Cardiothoracic and Vascular Surgeon, Cardiothoracic Surgeon, Asian Heart Institute And Research Centre

Read More articles On Heart Health In Hindi

Disclaimer