पाचन क्रिया को कैसे प्रभावित करता है गॉल ब्‍लैडर स्‍टोन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 09, 2017
Quick Bites

  • पित्‍त की थैली में स्‍टोन होने से खाना आसानी से नहीं पचता।
  • पित्‍ताशय में पथरी कोलेस्‍ट्रोल और पिग्‍मेंट के कारण बनती है।
  • इस पित्त में कोलेस्ट्रॉल, बिलरूबीन व पित्त सॉल्ट होता है।

अस्‍वस्‍थ खाने के अलावा पाचन क्रिया को पेट संबंधित बीमारियां भी प्रभावित करती हैं। पित्‍त की थैली में अगर पथरी की समस्‍या हो जाये तो इसके कारण पाचन क्रिया प्रभावित होती है। पित्‍त की थैली यानी गॉल ब्‍लैडर में स्‍टोन होने से खाने के बाद पेट के ऊपरी हिस्‍से में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बुखार, उल्‍टी की समस्‍या आदि हो जाती है। इस लेख में हम आपको बताते हैं कैसे गॉल ब्‍लैडर स्‍टोन आपकी पाचन क्रिया को प्रभावित करता है।

कैसे होता है स्‍टोन

पूरी दुनिया में लाखों ऐसे मरीज है जो गॉल ब्‍लैडर स्‍टोन की समस्‍या से परेशान हैं। यह बहुत ही कष्‍टकारी समस्‍या है, इसे पित्त की पथरी भी कहते हैं। इसमें पित्ताशय में दो तरह की पथरी बनती है। पहली कोलेस्ट्रोल निर्मित, दूसरी पिग्मेन्ट से बननेवाली पथरी। जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती है। यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में कम होता है।

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दरअसल पित्त लीवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त वसायुक्त खाने को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा अधिक हो जाती है, तो पथरी निर्माण के लिये आदर्श स्थिति बन जाती है। ये बीमारी आमतौर पर 30 से 60 वर्ष के उम्र के लोगों में पाई जाती है। यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरूषों में चार गुना अधिक पाई जाती है। बच्चों और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा बनती है, जबकि वयस्को में अधिकतर गुर्दों और मूत्रवाहक नली में पथरी बनती है।

 

Bllader Stone in Hindi

क्‍या होती है समस्‍या

खाने के बाद पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बुखार होना, उबकाई आना, उल्टी होना, आंखों व त्वचा में पीलापन, आदि लक्षण हों तो गॉल ब्लैडर में स्टोन हो सकता है। दरअसल खाना जैसे ही आंतों में पहुंचता है गॉल ब्लैडर पित्त स्रावित करता है जिससे फैट पचता है। इस पित्त में कोलेस्ट्रॉल, बिलरूबीन व पित्त सॉल्ट होता है, जब ये तत्व गाढ़े हो जाते हैं तो स्टोन यानी पत्‍थर बन जाता है। गॉल स्टोन पित्त का प्रवाह रोकता है जिससे पाचनक्रिया गड़बड़ा जाती है।

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क्‍या है कारण

गॉल ब्‍लैडर स्‍टोन के कई कारण हैं, लेकिन खानपान की समस्‍या इसमें प्रमुख है। मोटापे के अलावा यह बीमारी वंशानुगत भी है। गर्भवती महिलाओं व गर्भ निरोधक गोली लेने वाली महिलाओं को इसका खतरा ज्यादा रहता है। गॉल स्टोन का पता चलते ही उपचार कराना चाहिए। हालांकि गॉल स्टोन दवाओं से भी डिजॉल्व किया जा सकता है लेकिन यह लंबी व अनिश्चित प्रक्रिया है, इसके लिए सबसे प्रभावी उपचार है सर्जरी।

पित्‍त की थैली में स्‍टोन बनने से बचने के लिए अपने खानपान पर ध्‍यान दें और अगर पेट में किसी तरह की समस्‍या हो तो चिकित्‍सक से संपर्क करें।

 

Image Source - Getty

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