मधुमेह रोगियों को इस तरह पकाना चाहिए भोजन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 05, 2014
Quick Bites

  • खाना पकाने का तरीका भी करता है मधुमेह को नियंत्रित।
  • ऑलिव ऑयल मे पकायें खाना, होता है फाइबर का स्रोत।
  • खाना पकानें मे कम करें नमक और सोडियम का इस्‍तेमाल।
  • धीमी आंच पर पकायें खाना, ट्राई करें ग्रिल व क्ले पॉट कुकिंग।

 

मधुमेह जैसी आजीवन रहने वाली बीमारी की चिकित्सा संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जाना आसान है। गौरतलब है कि मधुमेह या चीनी की बीमारी को मधुमेह रोगी स्वंय अपनी देखभाल करके कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन अगर खाना पकाने मे भी मधुमेह रोगी सावधानी रखें तो डायबिटीज पर नियंत्रण करना आसान हो जाता है।

 

 ऑलिव ऑयल

ऑलिव ऑयल मे पकायें खाना

इसमें सैचुरेटेड फैट न के बराबर होता है और शरीर में शुगर लेवल भी नियंत्रित करता है। कार्बोहाइड्रेट और फाइबर का अच्छा स्रोत होने के कारण यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद है।ऑलिव ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन -ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह स्ट्रेस को दूर करने के साथ-साथ ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को दूर करने में भी मदद करता है। विटामिन ए, डी, ई, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन आदि जैसे गुणकारी तत्व भी इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

 नमक और सोडियम का इस्‍तेमाल कम करें

खाद्य पदार्थों में सोडियम के इस्‍तेमाल को कम करना, खाना पकाने को एक और सरल और प्रभावी तरीका है। यह अपने भोजन में नमक और सोडियम को कम करके किया जा सकता है। इससे आपको रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।बहुत से फल और सब्जियों के छिलकों में पोषक तत्‍वों के साथ-साथ फाइबर भी भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। इसलिए पौष्टिकता को बचाने के लिए इन्‍हें बिना छीले ही पकाएं।

ऐलुमिनियम के बर्तन

ऐलुमिनियम के बर्तन ना करें प्रयोग

प्रेशर कुकर एल्यूमीनियम का बना होता है जो कि भोजन पकाने के लिये सबसे घटिया धातु है क्योंकि एल्यूमीनियम भारी धातु होती है और यह हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बाहर नहीं निकल पाती है । इसी कारण एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग करने से कर्इ प्रकार के गंभीर रोग होते आयुर्वेद के अनुसार जो भोजन धीरे-धीरे पकता है वह भोजन सबसे अधिक पौष्टिक होता है । भोजन को शीघ्र पकाने के लिये अधिक तापमान का उपयोग करना सबसे हानिकारक है।

क्ले पॉट कुकिंग

क्ले के बर्तनों की ओर लौटने का अर्थ है पर्यावरण के हितैषी बनना। इसमें बने खाने में चीजों के सभी प्राकृतिक तत्व बरकरार रहते हैं। इस तकनीक से बने खाने से कैलोरी घटाने में मदद मिलती है। लोगों में यह गलतफहमी है कि क्ले पॉट में खाना बनने में देर लगती है। धातु के बर्तनों की अपेक्षा चिकनी मिट्टी के बर्तनों में बना खाना लंबे समय तक टिका रहता है। पर इन बर्तनों के रख-रखाव का खास ध्यान रखना पड़ता है। क्ले कुकर को हमेशा ठंडे ओवन में रखें, वह भी कम तापमान पर। क्ले कुकर को कभी भी बर्नर पर न रखें।



ग्रिल कुकिंग

यदि पोषक तत्वों से भरपूर आहार करना चाहते हैं तो अपनी डाइट में ग्रिल्ड फूड को शामिल करें। रसोई में एक ग्रिल अवश्य रखें। खाने को ग्रिल में बनाने से उसमें वसा की मात्रा भी घट जाती है, खासकर जब उसे कोयले पर बनाया जाए। ग्रिल से खाना बनाने में समय कम लगता है। नियमित रूप से इसका सेवन करना कमर और पेट पर चर्बी बढ़ने से रोकता है। ऐसे में हृदय रोगियों, मधुमेह, मोटापा व उच्च रक्तचाप से पीड़ितों के लिए ग्रिल्ड फूड अच्छा रहता है।

डायबिटीज के रोगी को आहार में जड़ एवं कंद, मिठाइयाँ, चॉकलेट, तला हुआ भोजन, सूखे मेवे, केला, चीकू, सीताफल इत्यादि चीजों को खाने से बचना चाहिए। इतना ही नहीं मधुमेह नियंत्रि‍त करने के लिए डॉक्टर के निर्देशानुसार ही कैलोरीज लेनी चाहिए।

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