हॉर्मोनल असंतुलन के लक्षण क्या हैं और इन्हें संतु​लित कैसे करें?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 22, 2018
Quick Bites

  • हॉर्मोन की गड़बड़ी से कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
  • हर्मोन असंतुलन होने पर कई प्रकार की स्‍वास्थ्‍य संबंधित समस्‍यायें हो जाती हैं।
  • हार्मोन के स्राव में असंतुलन होता है तो शरीर के पूरे सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है।

हमारे शरीर में हार्मोन्स का काफी महत्व है। इसके असंतुलन से कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। हार्मोन्स शरीर की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। ये हमारे शरीर की वृद्घि और विकास के लिए जरूरी हैं और जब हार्मोन के स्राव में असंतुलन होता है तो शरीर के पूरे सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि हमारे शरीर में जरूरी हार्मोन्स का स्‍तर संतुलित रहे। हॉर्मोन की गड़बड़ी से कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। जानिए क्यों जरूरी है हार्मोन संतुलन और उनसे निपटने के तरीके।

क्यों जरूरी है हार्मोन संतुलन

हर्मोन असंतुलन होने पर कई प्रकार की स्‍वास्थ्‍य संबंधित समस्‍यायें हो जाती हैं। हार्मोंस न सिर्फ शरीर की वृद्धि और विकास को प्रभावित करते हैं, बल्कि सभी तंत्रों की गतिविधियों को नियंत्रित भी करते हैं। स्‍वस्‍थ रहने के लिए जरूरी है कि हमारे शरीर में हमारे शरीर में हार्मोन का संतुलन बना रहे। हार्मोन्स शरीर को ही नहीं मस्तिष्क और भावनाओं को भी प्रभावित करते हैं। खानपान में अनियमितता, व्‍यायाम की कमी, तनाव आदि के कारण इसमें असंतुलन हो जाता है। इसे संतुलित रखना बहुत मुश्किल नहीं है। आसान तरीकों से आप इसपर नजर रख सकते हैं।

हार्मोन के बारे में जानिये

हार्मोन किसी कोशिका या ग्रंथि द्वारा स्नवित ऐसे रसायन हैं जो शरीर के दूसरे हिस्से में स्थित कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। शरीर का‍ विकास, मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम पर इनका सीधा प्रभाव होता है। हमारे शरीर में कुल 230 हार्मोन होते हैं, जो शरीर की अलग-अलग क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के मेटाबॉलिज्म को बदलने के लिए पर्याप्‍त है। यह एक केमिकल मैसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक निर्देश पहुंचाते हैं। अधिकतर हार्मोन्स का संचरण रक्त के द्वारा होता है। कुछ हार्मोन दूसरे हार्मोन को भी नियंत्रित करते हैं।

हॉर्मोंस असंतुलन के लक्षण

यह सच है कि लाइफस्टाइल, डाइट और शारीरिक गतिविधि के जरिए आप वजन पर काबू रख सकते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। कई महिलाओं के शरीर में हार्मोन का स्‍तर बिगड़ जाता है। इससे उनके लिए वजन काबू कर पाना मुश्किल हो जाता है। इनसुलिन के स्‍तर की अनेदखी और प्रतिरोधकता में बढ़ोत्‍तरी भी वजन बढ़ने का कारण हो सकती है। आहार में छोटे-मोटे बदलाव कर इस समस्‍या से बचा जा सकता है। प्रोसेस्‍ड फूड, चीनी और गेहूं से बने उत्‍पादों से दूरी रखकर आप सही दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। 

दोपहर होते-होते थकान आप पर पूरी तरह हावी हो चुकी होती है। कभी*कभी ऐसा होना कोई बड़ी परेशान करने वाली बात नहीं। लेकिन, रोज-रोज सुस्‍त, बिखरा रहना और मानसिक रूप से परेशान रहना अच्‍छे संकेत नहीं है। अपनी आहार योजना में बदलाव कीजिये। अपने आहार से गेंहूं और अनाज से बनी चीजों को बाहार कर दें। इससे आपको रक्‍त शर्करा को संतुलित करने में मदद मिलेगी। रक्‍त शर्करा नियंत्रित होने पर आप बेहतर ऊर्जा के साथ काम कर सकेंगे। 

आपका मूड सही नहीं है। यह दवा विक्रेता के पास जाने का वक्‍त नहीं है। चिंता और अवसाद इस बात का संकेत है कि आपके शरीर में कुछ हॉर्मोंस असंतुलित हैं। आपके शरीर में विषाक्‍ता बढ़ गई और आप पर काम का अधिक बोझ है। तनाव आपको शिथिल कर रहा है। और साथ ही आपके शरीर को उतना पोषण नहीं मिल रहा जिसकी उसे जरूरत है। अपने भीतर की आवाज सुनें। दिमाग को जरूरी आराम दीजिये। इसके साथ ही योग, ध्‍यान और व्‍यायाम से भी अपने मस्तिष्‍क को जरूरी पोषण दीजिये। अपने आहार में ओमेगा फैटी-3 एसिड युक्‍त आहार, जैसे मछली, बादाम और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल कीजिये। 

हार्मोन बिगड़ने पर लोगों में शारीरिक तनाव और कार्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है। इससे आपको नींद ना आने की शिकायत होने लगती है। अनिद्रा आपके जीवन के हर हिस्‍से को बुरी तरह प्रभावित करती है। नींद न आने की समस्‍या से बचने के लिए आपको शांत रहने की कोशिश करनी चाहिये। अपने आहार में बदलाव कीजिये और शाम के समय हल्‍का भोजन कीजिये। व्‍यायाम, योग, ध्‍यान और पोषक आहार आपको अनिद्रा की समस्‍या से बचा सकते हैं। 

कई महिलाओं में रात को पसीना और हॉट फ्लेशज की शिकायत होती है। यह किसी गड़बड़ी की पहली आशंका होते हैं। यह हॉर्मोन रिप्‍लेसमेंट थेरेपी करवाने का वक्‍त नहीं होता। लेकिन अपने आहार में बदलाव करने का वक्‍त जरूर होता है। आपको अपने शारीरिक और मानसिक जरूरतों में संतुलन बनाकर रखना चाहिये। कई बार भावनायें भी भीतरी तापमान बढ़ा सकती हैं। अधिक तेल मसाले वाले खाने से बचने की कोशिश करें। साथ ही जब आपको हॉट फ्लैश की शिकायत होने लगे तो अपने मस्तिष्‍क में चल रहे विचारों को नियंत्रित करने का प्रयास करें। 

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Miscellaneous In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES759 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK