Tue Oct 27, 2026 | 02:43 AM IST

एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनके भीतर हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है। इस स्थिति में शरीर के अंगों और ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इस वजह से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास रुक सकता है। गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं को समस्या हो सकती है। इसलिए हीमोग्लोबिन कम होने पर उसका इलाज कराना बहुत जरूरी हो जाता है।

एनीमिया के मामले

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में 6 से 59 महीने की उम्र के 40% बच्चे, 37% गर्भवती महिलाएं और 15 से 49 वर्ष की 30% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं।

भारत की बात करें, तो NFHS- 5 के अनुसार, भारत में 67.1% बच्चे और 59.1% टीनएजर लड़कियां एनीमिया से पीड़ित हैं। भारत में हर चार में से तीन महिलाओं की डाइट में आयरन की मात्रा कम या अपर्याप्त है।

नेशनल हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार, भारत में एनीमिया के मामले कुछ इस तरह हैं।

ग्रुप 

एनीमिया रेट (%)

पुरुष (15 से 49 साल)  

25%

महिलाएं (15 से 49 साल)  

57%

टीनएजर लड़के (15 से 19 साल) 

31.1%

टीनएजर लड़कियां  (15 से 19 साल) 

59.1%

गर्भवती महिलाएं (15 से 49 साल)  

52.2%

बच्चे (6 से 59 महीने)

67.1%

एनीमिया के लक्षण

American Society of Hematology के मुताबिक, एनीमिया के मरीजों में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • कमजोरी महसूस होना
  • सांस फूलना
  • चक्कर आना
  • तेज या अनियंत्रित धड़कन महसूस होना
  • कानों में सनसनी या सायं-सायं की आवाज महसूस होना
  • सिरदर्द
  • हाथ-पैर ठंडे पड़ना
  • त्वचा का रंग पीला या हल्का सुस्त पड़ना
  • छाती में दर्द

एनीमिया होने के कारण

WHO के मुताबिक, एनीमिया को किसी अंदरूनी बीमारी या समस्या का लक्षण माना जाता है। इसके होने के कई कारण हो सकते हैं।

1. पोषक तत्वों की कमी

  • डाइट में प्रचुर मात्रा में आयरन न लेना एनीमिया का सबसे प्रमुख कारण हो सकता है। विटामिन A, फोलेट, विटामिन B12 और राइबोफ्लेविन (विटामिन B2) की कमी से भी एनीमिया हो सकता है।

  • जन्म के समय शरीर में आयरन की कमी होना या पोषक तत्वों का सही तरीके से न पचना भी कारण हो सकता है।

2. इंफेक्शन और पुरानी बीमारी

  • मलेरिया, टीबी, HIV और किसी इंफेक्शन की वजह से खून की कमी हो सकती है।
  • खून की कमी होना एनीमिया का कारण बन सकता है।
  • पुरानी बीमारी शरीर में सूजन पैदा करके एनीमिया के रिस्क को बढ़ा सकती है।
  • दवाओं के साइड इफेक्ट्स से एनीमिया हो सकता है।

3. महिलाओं से जुड़ी समस्याएं

  • लगातार भारी पीरियड्स होना
  • प्रेग्नेंसी के दौरान मां के ब्लड की मात्रा की ज्यादा जरूरत
  • डिलीवरी या उसके बाद बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना

4. आनुवंशिक बीमारियां

  • लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़ी बीमारियां होना
  • थैलेसीमिया बीमारी
  • हीमोग्लोबिन की संरचना में बदलाव होने वाला सिकल सेल रोग होना
  • हीमोग्लोबिनोपैथी, रेड सेल एंजाइम की असामान्यताएं
  • RBC की झिल्ली की कमियां होना

एनीमिया होने का रिस्क किन लोगों में ज्यादा है?

American Society of Hematology के मुताबिक, कुछ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को एनीमिया होने का रिस्क ज्यादा हो सकता है। इसलिए रेगुलर ब्लड टेस्ट से हीमोग्लोबिन चेक करना चाहिए।

  • रूमेटाइड अर्थराइटिस या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी के मरीज
  • किडनी से जुड़ी बीमारी के मरीज
  • लिवर से जुड़ी बीमारी के मरीज
  • थायराइड के मरीज
  • क्रोहन या अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज के मरीज

एनीमिया गंभीर होने पर क्या समस्याएं हो सकती हैं?

Cleveland Clinic में कहा गया है कि अगर एनीमिया लंबे समय तक रहता है, तो यह कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। गंभीर एनीमिया के रोगियों को हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और ऑर्गन डैमेज हो सकते हैं। क्रोनिक एनीमिया में सही समय पर इलाज नहीं हो पाता या फिर इलाज के बावजूद एनीमिया की स्थिति बनी रहती है।

महिलाओं में एनीमिया ज्यादा क्यों होता है?

Fertility and Sterility जर्नल के मुताबिक, दुनिया भर में रिप्रोडेक्टिव उम्र की करीब 30% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में इसके लक्षण और खतरे ज्यादा पाए जाते हैं।

  • महिलाओं में एनीमिया होने का सबसे बड़ा कारण पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग है।
  • हैवी ब्लीडिंग होने पर 46% महिलाओं ने कभी डॉक्टर की सलाह नहीं ली, क्योंकि वे इसे सामान्य मानती हैं।
  • महिलाओं को यूटरस में फाइब्रॉयड्स होना, एंडोमेट्रियल पॉलिप्स और सिजेरियन स्कार दोष होना एनीमिया का कारण हो सकता है।
  • डिलीवरी के बाद पोस्टपार्टम हैमरेज, महिलाओं की मृत्यु का सबसे आम कारण है।

पुरुषों में एनीमिया होने के कारण

Indian Journal of Community Medicine में हुई स्टडी में भारत और दुनिया भर के पुरुषों और टीनएज लड़कों में एनीमिया होने के कारणों को ढ़ूंढने की कोशिश की गई है।

  • दुनिया भर में 12.7% पुरुष एनीमिया से प्रभावित हैं, जबकि भारत में 15-49 वर्ष के 25% पुरुष और 15-19 वर्ष के 31% किशोर इस स्थिति से जूझ रहे हैं।
  • NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कई राज्यों जैसे लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में पुरुषों में एनीमिया की स्थिति बेहद गंभीर है।
  • अशिक्षा, गरीबी, ग्रामीण पृष्ठभूमि, आयरन/विटामिन की कमी, मलेरिया और बढ़ती उम्र के साथ टेस्टोस्टेरोन में कमी इसके मुख्य कारण हैं।
  • जिन पुरुषों को डायबिटीज और किडनी से जुड़ी बीमारियां हैं, उन्हें एनीमिया का रेगुलर चेकअप कराना चाहिए।

बच्चों में एनीमिया होने के कारण

NCBI में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शिशुओं और बच्चों में एनीमिया होना बहुत ही आम समस्या है, जो दुनिया भर की लगभग एक चौथाई आबादी, खासतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। बच्चों में एनीमिया का कारण हीमोग्लोबिन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। इसमें थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग, हेरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस, G6PD की कमी, संक्रमण और पुरानी बीमारियां शामिल हो सकती हैं। बच्चों में एनीमिया के कारण फैमिली हिस्ट्री और डाइट भी हो सकते हैं।

एनीमिया की जांच कैसे करें?

Mayo Clinic के अनुसार, एनीमिया की जांच करने के लिए डॉक्टर फिजिकल चेकअप के बाद ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

1. कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC)
CBC का इस्तेमाल ब्लड के सैंपल में ब्लड सेल्स की संख्या गिनने के लिए किया जाता है। एनीमिया की जांच के लिए, यह टेस्ट रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा (हीमैटोक्रिट) और हीमोग्लोबिन के स्तर को मापता है।

  • वयस्क पुरुषों में हीमोग्लोबिन 14 से 18 ग्राम प्रति डेसीलीटर और महिलाओं के लिए 12 से 16 ग्राम प्रति डेसीलीटर होता है।
  • हीमेटोक्रिट आमतौर पर पुरुषों के लिए 42% से 50% और महिलाओं के लिए 37% से 47% के बीच होता है।
  • CBC में लाल रक्त कोशिकाओं के आकार और रंग का भी विश्लेषण किया जाता है।

2. अन्य टेस्ट - एनीमिया के कारणों को जानने के लिए बोन मैरो का सैंपल भी लिया जा सकता है।

एनीमिया का इलाज

Mayo Clinic ने बताया है कि एनीमिया का इलाज उसके कारणों के आधार पर ही किया जा सकता है।

  1. आयरन की कमी होने पर - इस स्थिति में मरीज को आयरन सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं। अगर किसी कारण से ब्लड लॉस हो रहा है, तो ब्लीडिंग के कारणों को पहचानने की कोशिश की जाती है।
  2. विटामिन की कमी होने की स्थिति - ऐसी कंडीशन में मरीज को फोलिक एसिड और विटामिन B 12 से युक्त सप्लीमेंट्स और डाइट प्लान दिया जाता है। जिन लोगों का शरीर भोजन से B 12 अवशोषित नहीं कर पाता, उन्हें B 12 के इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है। शुरुआत में ये इंजेक्शन हर दूसरे दिन और बाद में जीवनभर के लिए महीने में एक बार दिए जा सकते हैं।
  3. क्रोनिक बीमारी - इस स्थिति में मरीज की बीमारी का इलाज किया जाता है, जिसकी वजह से एनीमिया हुआ है। अगर लक्षण गंभीर हो जाए, तो ब्लड ट्रांसफ्यूजन या एरिथ्रोपोएटिन हार्मोन के इंजेक्शन दिए जा सकते हैं।
  4. बोन मैरो से जुड़ी बीमारी होने पर - इस कंडीशन में मरीज का इलाज दवा, कीमोथेरेपी या बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए किया जा सकता है।

एनीमिया से बचाव कैसे करें?

WHO के मुताबिक, एनीमिया से बचाव के लिए डाइट में ये पौष्टिक आहार लेने चाहिए।

  • आयरन के लिए लीन रेड मीट, मछली, चिकन, दालें और बीन्स, फोर्टिफाइड अनाज और गहरी हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें।
  • विटामिन C के लिए फल और सब्जियां शरीर को आयरन अवशोषित करने में मदद करते हैं, इसलिए आयरन के साथ विटामिन C जरूर लें।
  • आयरन से भरपूर भोजन खाते समय चोकर वाला अनाज, चाय, कॉफी, कोको और कैल्शियम युक्त चीजों न खाएं, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को धीमा कर देते हैं।
  • कैल्शियम और आयरन दोनों के सप्लीमेंट्स अलग-अलग समय पर लें।
  • जिन महिलाओं को पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग होती है, उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट्स या हार्मोनल गर्भनिरोधक ले सकती हैं।
  • इंफेक्शन से बचाव के लिए हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं और साफ शौचालयों का इस्तेमाल करें।
  • जिन इलाकों में मलेरिया आम है, वहां मलेरिया से बचाव करना जरूरी है, क्योंकि एनीमिया का एक कारण मलेरिया भी हो सकता है।

एनीमिया से जुड़े आम सवाल (FAQS)

1. क्या चाय या कॉफी पीने से शरीर में खून की कमी होती है?

चाय और कॉफी में टैनिन और फाइटेट्स तत्व होते हैं, जो भोजन में मौजूद आयरन से चिपक जाते हैं और शरीर को आयरन अवशोषित नहीं करने देते। अगर खाना खाने के तुरंत पहले या बाद में चाय या कॉफी पीते हैं, तो शरीर को पूरा आयरन नहीं मिल पाता, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ता है।

2. पीरियड्स में ब्लीडिंग सामान्य है या हैवी, यह कैसे पहचानें?

अगर महिला को हर 1-2 घंटे में पैड बदलना पड़े, 7 दिन से अधिक ब्लीडिंग हो या बड़े खून के थक्के आ रहे हों, तो यह हैवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग (HMB) है। यह महिलाओं में एनीमिया का सबसे बड़ा कारण है और इसके लिए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

3. क्या ज्यादा आयरन लेने से शरीर को नुकसान हो सकता है?

शरीर में जरूरत से ज्यादा आयरन जमा होना लिवर, हार्ट और पैंक्रियाज को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से लंबे समय तक हाई-डोज आयरन सप्लीमेंट्स न लें।

4. आयरन सप्लीमेंट लेने पर मल का रंग काला क्यों हो जाता है?

आयरन की दवाएं लेने पर मल का रंग गहरा हरा या काला होना पूरी तरह से सामान्य है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर बिना अवशोषित हुए अतिरिक्त आयरन को बाहर निकाल रहा है। अगर इसके साथ पेट में तेज दर्द या उल्टी न हो, तो चिंता की कोई बात नहीं है।

5.क्या पेट में कीड़े होने से खून की कमी हो सकती है?

पेट के कीड़े आंतों की दीवार से चिपककर रोजाना धीरे-धीरे खून चूसते रहते हैं। इससे शरीर में लगातार खून और आयरन की कमी होती जाती है। यह बच्चों और नंगे पैर घूमने वाले लोगों में एनीमिया का एक बड़ा कारण है।

डॉक्टर से कब मिलें?

Cleveland Clinic के अनुसार, गंभीर एनीमिया होने पर मरीज को ये लक्षण महसूस हो सकते हैं और उसे तुरंत मेडिकल केयर की जरूरत होती है।

  • छाती में दर्द होना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • नींद न आना
  • जी मिचलाना
  • पेट में दर्द या असहजता महसूस होना
  • बहुत ज्यादा पसीना आना
  • चक्कर आना, सिर घूमना या बेहोश हो जाना

निष्कर्ष
आमतौर पर लोग एनीमिया को सिर्फ थकान या कमजोरी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए। अगर किसी को भी एनीमिया से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं या महिलाओं को हैवी ब्लीडिंग होने के साथ कमजोरी और थकान बहुत ज्यादा महसूस होती है, तो उन्हें ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर की सलाह लेकर सप्लीमेंट्स, दवा या डाइट लेनी चाहिए।

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