जानिए क्यों कई बार मुश्किल हो जाता है फेफड़ों के कैंसर का इलाज?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 18, 2018
Quick Bites

  • लंग कैंसर को आजकल इम्यूनोथैरेपी के जरिए ठीक किया जा रहा है।
  • हमारा इम्यून सिस्टम भी तत्वों पर निर्भर करता है।
  • लगभग 20 प्रतिशत मामलों में ही इम्यूनोथैरेपी कारगर होती है।

दुनियाभर में जिन कैंसरों से लोग सबसे ज्यादा मरते हैं उनमें लंग कैंसर यानि फेफड़ों का कैंसर भी शामिल है। फेफड़ों का कैंसर पुरुष और स्त्री दोनों को हो सकता है मगर आमतौर पर ये पुरुषों को ज्यादा होता है। एक शोध के मुताबिक हर साल जितने लोग ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, कोलन कैंसर से मिलाकर मरते हैं उससे कहीं ज्यादा लोग अकेले फेफड़ों के कैंसर से मरते हैं। लंग कैंसर का एक प्रमुख कारण धूम्रपान है और पुरुष महिलाओं से ज्यादा धूम्रपान करते हैं इसलिए उनमें इसका खतरा भी ज्यादा होता है। आइये आपको बताते हैं कि लंग कैंसर का इलाज क्यों मुश्किल माना जाता है।

क्यों मुश्किल है लंग कैंसर का इलाज

लंग कैंसर को आजकल इम्यूनोथैरेपी के जरिए ठीक किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार लंग कैंसर का इलाज मुश्किल होता है क्योंकि लंग कैंसर के कुल मामलों में से लगभग 20 प्रतिशत मामलों में ही इम्यूनोथैरेपी कारगर होती है। लंग कैंसर के ज्यादातर मामलों में इम्यूनोथैरेपी देने के बावजूद कैंसर सेल्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इम्यूनोथैरेपी के दौरान कई बार इम्यून सिस्टम कैंसर सेल्स को प्रभावित करते हैं ऐसे में उसे ठीक करना आसान होता है मगर ज्यादातर मामलों में मरीज का इम्यून सिस्टम हार मान लेता है और कैंसर सेल्स को शरीर में फैलने देता है। ऐसे में इस थैरेपी के बाद भी कैंसर सेल्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और वो बढ़ती जाती हैं।

इसे भी पढ़ें:- फेफड़ों के कैंसर के इन संकेतों को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक

इम्यून सिस्टम क्यों दे देता है धोखा

दरअसल हमारा इम्यून सिस्टम भी तत्वों पर निर्भर करता है। इसमें छोटे-मोटे रोगों को ठीक करने की क्षमता तो होती है मगर गंभीर रोगों के मामले में कई बार ये फेल हो जाता है। इम्यून सिस्टम जब कैंसर सेल्स का मुकाबला करता है तो उसमें ढेर सारे प्रोटीन्स और मॉलीक्यूल्स एक साथ काम करते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है जिसे टीबेट कहते हैं। ये प्रोटीन शरीर में ऐसे सेल्स के निर्माण में मदद करता है, जो कैंसर सेल्स से लड़ने की क्षमता रखते हों। अगर किसी मरीज के शरीर में टीबेट प्रोटीन की मात्रा बहुत कम है या बिल्कुल नहीं है, तो कैंसर सेल्स को फेफड़ों में मौजूद ट्यूमर बढ़ता रहता है और मरीज के लिए खतरा भी बढ़ता रहता है।

लंग कैंसर के लक्षण

  • सांस लेने पर सीटी जैसी आवाज सुनाई देना।
  • लंबे समय तक लगातार खांसी आना और खांसने की आवाज में कुछ समय बाद परिवर्तन आना।
  • खांसते-खांसते मुंह से खून निकलने लगना या भूरे रंग की थूक निकलने लगना।
  • तेज सिर दर्द के साथ चक्कर आने लगना और शरीर के अंगों में कमजोरी महसूस करना।
  • बार-बार निमोनिया या सांस की नली में सूजन आना और संक्रामक रोगों का जल्दी-जल्दी होना।
  • तेजी से वजन घटना और भूख में लगातार कमी महसूस होना।
  • चेहरे, हाथ, गर्दन और उंगलियों में सूजन आना।
  • शरीर के तमाम अंग जैसे कंधे, पीठ और पैरों में लगातार दर्द होना।
  • इन लक्षणों के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और शरीर की जांच करवायें।

इसे भी पढ़ें:- कैसे होता है फेफड़े का कैंसर

फेफड़ों के कैंसर से कैसे बचें

फेफड़ों के कैंसर को रोकने के लिए धूम्रपान से दूरी सबसे महत्वपूर्ण है। दुर्भाग्य से ज्‍यादातर मामलों में फेफड़ों के कैंसर से बचाव का यह सबसे अधिक उपेक्षित रूप है। सिगरेट के पैक पर दी हुई चेतावनियों के बावजूद लोग लगातार धूम्रपान करते हैं। धूम्रपान करने वालों में जोखिम न केवल उन तक ही सीमित रहता है, बल्कि उनके आसपास के लोगों को भी प्रभावित करता है। ब्लैक टी, फल व सब्जियों का ज्यादा से ज्‍यादा सेवन इस जानलेवा बीमारी को रोकने में मदद करता है। यदि वक्त रहते फेफड़े के कैंसर का पता लग जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए तो यह ठीक हो सकता है।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Lung Cancer In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES1218 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK