खाने के बाद उल्टी करना बुलिमिया नर्वोसा का है लक्षण, जानें इसके गंभीर परिणाम

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 30, 2018
Quick Bites

  • आनुवंशिकता बुलिमिया नर्वोसा रोग की प्रमुख वजह है। 
  • हार्ट की ऑर्टरी में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं।
  • बुलिमिया नर्वोसा ईटिंग डिसॉर्डर से जुड़ी गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या है।

बुलिमिया नर्वोसा ईटिंग डिसॉर्डर से जुड़ी गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या है। इससे ग्रस्त लोग फूड क्रेविंग की वजह से अपनी मनपसंद डिशेज़ जी भरकर खा लेते हैं, उसके बाद जानबूझकर वोमिटिंग करते हैं। ऐसा करने के पीछे उनकी यही मंशा होती हैं कि मनपसंद भोजन का स्वाद लेने के बाद वोमिटिंग करने से वज़न नहीं बढ़ेगा। एनोरेक्सिया की तरह बुलिमिया के मरीज़ों को भी हमेशा वजऩ बढऩे का डर सताता रहता है और इसी डर की वजह से वे कैलरीज़ घटाने के लिए ऐसे नुकसानदेह तरीके अपनाने लगते हैं।

क्या है नुकसान : बार-बार जबरन वोमिटिंग करने की वजह से गले में खराश, डीहाइड्रेशन, थकान, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और मिनरल्स जैसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती हैं। 

क्यों होता है ऐसा

आमतौर पर तनाव, अकेलापन, उदासी, भावनात्मक कमज़ोरी और आत्मविश्वास की कमी जैसी वजहों से व्यक्ति में ईटिंग डिसॉर्डर के लक्षण पनपने लगते हैं। दरअसल ऐसी समस्याओं की तरफ से अपना ध्यान हटाने के लिए लोग स्वादिष्ट भोजन का सहारा लेते हैं। आनुवंशिकता भी इसकी प्रमुख वजह है। अगर माता-पिता को ऐसी समस्या है तो बच्चों में इसके लक्षण नज़र आते हैं। शरीर में कुछ खास तरह के एंज़ाइम्स के असंतुलन की वजह से भी व्यक्ति को ईटिंग डिसॉर्डर से जुड़ी ऐसी समस्याएं हो सकती हैं।

क्या है उपचार

ईटिंग डिसॉर्डर एक मनोवैज्ञानिक समस्या है। इसलिए इसका उपचार भी काउंसलिंग के ज़रिये ही होता है। एनोरेक्सिया के मरीज़ों को विभिन्न प्रकार की साइकोथेरेपी दी जाती है, जिसमें मरीज़ के दिमाग से मोटे होने का भ्रम निकाला जाता है। बेहतर परिणाम के लिए कुछ दवाओं के ज़रिये भी ईटिंग डिसऑर्डर का उपचार किया जाता है। इसके अलावा न्यूट्रिशनिस्ट द्वारा काउंसलिंग भी ज़रूरी है और डाइट चार्ट के अनुसार खानपान अपनाने की सलाह दी जाती है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • खाने का निश्चित समय निर्धारित करें और क्रैश डाइटिंग से बचें।
  • अगर आपको अपनी फूड हैबिट में कुछ भी असामान्य लगे तो एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें।
  • अपनी यह धारणा बदलने की कोशिश करें कि हर हाल में स्लिम-ट्रिम रहना बहुत ज़रूरी है और मोटे लोग अनाकर्षक होते हैं।
  • अपने बढ़ते वज़न के लिए दूसरों के नेगेटिव कमेंट्स पर ज़रा भी ध्यान न दें।
  • इस बात के प्रति सजग रहें कि बीएमआई के अनुसार आपका वज़न कितना होना चाहिए, अगर उससे एक-दो किलो अधिक वज़न हो तो चिंतित न हों।
  • बार-बार वज़न चेक न करें।
  • इन बातों का ध्यान रखेंगे तो ईटिंग डिसॉर्डर की समस्या से बचाव आसान हो जाएगा।  

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