बीमारियों को दूर करने में मददगार है पुनर्नवा

आंखों में अगर खुजली हो रही हो तो इसे लगाने से फायदा होता है। रतौंधी के मरीज अगर गाय के गोबर के रस में पीपल के साथ उबालकर आंख में लगायें तो रतौंधी में लाभ होता है। लाल पुनर्नवा यानी साठी कड़वी और ठंडी होती है जो कि सांस की समस्‍या, कफ, पित्&zwj

डा. दीपक
आयुर्वेदWritten by: डा. दीपक Published at: May 15, 2015
बीमारियों को दूर करने में मददगार है पुनर्नवा

पुनर्नवा की तीन जातियां होती हैं। सफेद फूल वाली को विषखपरा, लाल फूल वाली को साठी और नीली फूल वाली को पुनर्नवा कहते हैं। सफेद पुनर्नवा की जड़ को पीस घी में मिलाकर आंख में लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। आंखों में अगर खुजली हो रही हो तो इसे लगाने से फायदा होता है। रतौंधी के मरीज अगर गाय के गोबर के रस में पीपल के साथ उबालकर आंख में लगायें तो रतौंधी में लाभ होता है। लाल पुनर्नवा यानी साठी कड़वी और ठंडी होती है जो कि सांस की समस्‍या, कफ, पित्‍त और खून के विकार को समाप्‍त करती है।

 

कफ की समस्‍या होने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में कई बार नीला पुनर्नवा देने से फायदा होता है। ऐसा करने से उल्‍टी के साथ कफ निकल जाता है और मरीज को आराम मिलता है। पुनर्नवा का प्रयोग करने से दिल पर खून का दबाव बढ़ता है जिसके कारण ब्‍लड सर्कुलेशन तेजी से होता है और खून से होने वाले वाले विकार नही होते हैं।

Hogweed in Hindi

शरीर के किसी भी भाग में सूजन होने पर पूनर्नवा का प्रयोग करने से सूजन समाप्‍त हो जाती है। यह फेफड़ों की झिल्‍ली में सूजन को भी कम करता है।  अगर शरीर के बाहरी हिस्‍से में सूजन हो तो पुनर्नवा के पत्‍तों को पीसकर गरम करके बांधिए, सूजन कम हो जाएगी। अगर इसकी पत्‍ती बांधने से सूजन ठीक न हो तो पुनर्नवा को कुटकी, सौठ और चिरायता के साथ मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से तुरन्त लाभ होता है।

 

 

दमा के मरीजों के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है। दमा के मरीज चंदन के साथ मिलाकर इसका सेवन करें। इससे कफ आना बंद होता है और दमे से श्‍वांस की नली में हुई सूजन भी समाप्‍त होती है। अपच होने पर पुनर्नवा का सेवन करने से फायदा होता है। गोनोरिया होने पुनर्नवा का प्रयोग करना चाहिए। इससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है और गोनोरिया के घाव पेशाब के रास्‍ते बाहर निकल जाते हैं। गोनोरिया के रोगी को पुनर्नवा की जड़ पीसकर देना चाहिए।

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किडनी पर इसका प्रभाव पड़ता है और किडनी संबंधित बीमारियों के होने की संभावना कम होती है। हर रोज पुनर्नवा का रस 1 से 4 ग्राम देने पर गुर्दे के संक्रमण होने की कम संभावना होती है। इसमें पाया जाने वाला पोटैशियम नाइट्रेट और अन्‍य पोटैशियम के यौगिक विद्यमान होते हैं। जोड़ो में हो रहे दर्द को दूर करने के लिए इसका प्रयोग करना चाहिए। यह गठिया के मरीजों के लिए फायदेमंद है। गठिया के रोगी इसके पत्‍तों को पीसकर लें, उसे गरम करके जोड़ों पर लगाने से फायदा होता है। 

 

पुनर्नवा के पत्‍ते विषनाशक होते हैं। सांप के काटने पर पुनर्नवा के पत्‍तों को पीसकर उसका रस निकाल सांप के कटे वाली जगह पर लगाने से विष का प्रभाव कम हो जाता है। यह बिच्‍छू का विष भी कम करता है। बिच्‍छू का डंक लगने पर इसकी जड़ को पानी में घिसकर लगाने से फायदा होता है।


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