एरिथमिया है दिल की अनियमित धड़कन का कारण, जानें लक्षण और खतरे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 26, 2018
Quick Bites

  • दिल की अनियमित धड़कन को कहते हैं एरिथमिया।
  • एरिथमिया के हो सकते हैं कई कारण।
  • असामान्य दिल की धड़कन हो सकती है खतरनाक।

दिल एक सामान्य गति से धड़कता है। अगर आपकी धड़कन बिना कारण अनियमित हो जाती है, तो ये कई बार खतरनाक हो सकता है। आमतौर पर मेहनत करने या शरीर के अस्वस्थ रहने पर दिल की धड़कन बढ़ जाती है मगर यदि इसके बढ़ने और घटने का आपको कोई कारण नहीं समझ आ रहा है, तो सावधान हो जाएं क्योंकि ये कई बार जानलेवा भी हो सकता है। दिल की अनियमित धड़कन को 'एरिथमिया' या 'हृदय अतालता' कहते हैं।

क्या है एरिथमिया

एरिथमिया होने पर आपके दिल की कभी सामान्य से ज्यादा बढ़ जाती है और कभी सामान्य से धीमी हो जाती है। एरिथमिया तब होता है जब दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रिक वेव्स ठीक से काम नहीं करते हैं। दिल की धड़कन अनियमित हो जाने आपको यह स्थिति अपने सीने, गले अथवा गर्दन में महसूस हो सकती है।

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क्यों होता है एरिथमिया

हार्ट पेलपिटेशन चिंताजनक अथवा डराने वाली हो सकती है। अधिकतर मामलों में इनका संबंध तनाव और चिंता से होता है। इसके अलावा उत्तेजना बढ़ाने वाले तत्‍व, जिनमें कैफीन, निकोटीन और अल्‍कोहल की मात्रा होती है, भी इसका कारण हो सकते हैं। गर्भावस्‍था के दौरान भी हार्ट पेलपिटेशन हो सकता है। अगर आपको नियमित रूप से ऐसी शिकायत हो, तो डॉक्‍टर से जरूर संपर्क करें। अगर आपको सांसों का उखड़ना, चक्‍कर आना, सीने में दर्द अथवा बेहोशी की शिकायत हो, तो आपको फौरन चिकित्‍सीय सहायता लेनी चाहिए।

एरिथमिया के हैं कई कारण

  • गंभीर भावनात्‍मक एहसास के कारण ही दिल की धड़कन बढ़ने की संभावना अधिक होती है। तनाव, डर, चिंता, आदि के कारण यह सबसे अधिक होता है।
  • अगर आपने अपनी क्षमता से अधिक काम कर लिया है तो इसके परिणाम स्‍वरूप आपके दिल की गति बढ़ जाती है।
  • अगर आपने कैफीन, निकोटीन, एल्‍कोहल का सेवन किया है तो यह पल्पिटेशन का कारण बन सकता है। कुछ दवाओं के सेवन के कारण भी दिल की धड़कन बढ़ सकती है।
  • हार्मोन में बदलाव, मासिक धर्म के समय, गर्भावस्‍था के समय यह समस्‍या हो सकती है। गर्भावस्‍था के सयम अगर पल्पिटेशन हो रहा है तो यह एनीमिया का लक्षण भी हो सकता है।
  • थायरॉइड, निम्‍म रक्‍तचाप, एनीमिया, लो ब्‍लड शुगर, बुखार और निर्जलीकरण के कारण यह समस्‍या हो सकती है।
  • कार्बोहाइड्रेट, वसायुक्‍त, और अधिक शुगर वाले आहार का सेवन करने के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है।
  • अगर आपने ऐसे आहार का सेवन किया है जिसमें नाइट्रेट, सोडियम की मात्रा अधिक है तो यह भी दिल की धड़कन बढ़ा सकता है।

एरिथमिया से बचाव

आपको तनाव और चिंता से दूर रहना चा‍हिए। तनाव को दूर करने के सामान्‍य तरीके जैसे योग, ताई-ची और अरोमाथेरेपी आदि आपकी काफी मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही कुछ खास किस्‍म के आहार और पेय पदार्थों से दूर रहना भी आपके लिए मददगार हो सकता है। आपको चाहिए कि अल्‍कोहल, निकोटिन, कैफीन और गैरकानूनी ड्रग्‍स सेदूर रहें। खांसी और सर्दी की कुछ दवाओं तथा कुछ हर्बल उत्‍पादों में भी इस तरह के तत्‍व हो सकते हैं, इसलिए आपको उनसे भी दूर रहना चाहिए।

एरिथमिया का इलाज

अगर जीवनशैली में बदलाव के बाद भी पेलपिटेशन में आराम न आए, तो आपका डॉक्‍टर आपको कुछ दवायें सुझा सकता है। कुछ मामलों में बीटा-ब्‍लॉर्क्‍स और कैल्शियम-चैनल ब्‍लॉर्क्‍स इस्‍तेमाल किये जा सकते हैं। यदि आपका डॉक्‍टर इस नतीजे पर पहुंचे कि पेलपिटेशन की वजह अनीमिया जैसा कोई अन्‍य रोग है, तो वह उस रोग का इलाज कर आपको राहत पहुंचाने का काम करेगा। अगर पेलपिटेशन की वजह कोई दवाई है तो डॉक्‍टर आपको उसके स्‍थान पर दूसरी दवा देगा। अगर पेलपिटेशन की वजह धड़कन की अतालता है, तो आपको दवा के साथ-साथ कुछ सावधानियां भी बरतनी पड़ सकती है। यह भी संभव है कि आपको इलेक्‍ट्रोसाइकोलॉजिस्‍ट यानी हार्ट रिद्धम स्‍पेशलिस्‍ट के पास जाना पड़े।

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