भूख बंद कर देता है एनोरेक्सिया नर्वोसा डिस्आॅर्डर, जानें बचाव के तरीके

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 16, 2018
Quick Bites

  • पुरुषों से ज्यादा महिलाएं इस डिस्आॅर्डर की चपेट में आती हैं।
  • इस रोग की चपेट में आने वाला एज ग्रुप 13 से 30 तक का होता है।
  • एनोरेक्सिया नर्वोसा का उपचार का इलाज थैरेपी और दवाओं द्धारा संभव है।

एनोरेक्सिया नर्वोसा एक ऐसा रोग है जो पूरी तरह से हमारे लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ है। यह एक ऐसा ईटिंग डिसऑर्डर है जिसके कारण बहुत से लोग के जरूरत से ज्यादा वजन कम कर लेते हैं। इस रोग की चपेट में आने वाला एज ग्रुप 13 से 30 तक का होता है। पुरुषों से ज्यादा महिलाएं इस डिस्आॅर्डर की चपेट में आती हैं। हालांकि यह समस्या व्यक्तिों को किसी भी उम्र में प्रभावित कर सकती है। जिन लोगों को ये डिस्ऑर्डर होता है वह अपने भोजन और भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को लेकर काफी ज्यादा चिंचित होते हैं। ऐसे लोग वजन बढ़ने के डर से खाने से दूर भागते हैं। 

एनोरेक्सिया नर्वोसा के लक्षण

  • हमेशा दिमाग में वजन बढ़ने का डर रहना
  • सामान्य लंबाई और उम्र के हिसाब से शरीर के वजन को न बनाए रख पाना
  • भुखमरी तक होना
  • शरीर का वजन और शेप बिगड़ना
  • वजन बढ़ने पर उसे मानने से इंकार करना
  • जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना
  • चिड़चिड़ा होना
  • घर के बाहर के कार्यों को नजरअंदाज करना
  • भूख लगने पर भी अनदेखा करना
  • गंभीरता को मानने से इंकार करना
  • महिलाओं में मासिक धर्म आने में अनियमितता
  • खाने से बचना और खाने को छोडना
  • अपने वजन को बार-बार तौलना
  • भूख होने पर भी खाने से मना करना
  • खाने के तुरंत बाद बाथरूम जाना
  • अन्य लोगों के साथ खाने से मना करना

एनोरेक्सिया के शिकार व्यक्ति अपने आहार को कम कर देते हैं या तो खाने को फेंक देते हैं। एक शोध के अनुसार एनोरेक्सिया नर्वोसा के विकार से ग्रसित लगभग 50 प्रतिशत लोग खाना तो खा लेते हैं लेकिन वजन घटाने के लिए बाद में अपने पेट को साफ कर देते हैं। ऐसे लोग एक निश्चित समय में खाने की ज्‍यादा मात्रा का सेवन कर लेते हैं। पेट की शुद्धिकरण के लिए खाने के बाद जुलाब और एनीमा का प्रयोग करके खुद से वोमिटिंग करके खाने को बाहर निकाल देते हैं। इस तरह के लक्षण भी एनोरेक्सिया के मरीजों में देखे जाते हैं। 

एनोरेक्सिया नर्वोसा का उपचार

एनोरेक्सिया नर्वोसा का उपचार का इलाज थैरेपी और दवाओं द्धारा संभव है। यदि व्यक्ति को उपरोक्त बताए गए लक्षणों में से अपने अंदर 2 या 3 भी दिखते हैं तो उसे तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि इस तरह के विकार से पीड़ित व्यक्ति को इस बात का जरा भी विश्वास नहीं होता है कि वह इस तरह के किसी मनो विकार से पीड़ित हैं। इसके उपचार के लिए इनका सहारा लिया जाता है।

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क्या है थैरेपी

इसमें मुख्य रूप से 3 दिन तरह की थैरेपी दी जाती है—

  • फैमली थेरेपी
  • इंडिविजुअल थेरेपी
  • ग्रुप थेरेपी

दवा से इलाज

इस रोग का इलाज दवाओं के द्धारा भी संभव है। इस तरह के विकार के पीछे ज्यादातर मामलों में डिप्रेशन और एंग्जायटी को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसलिए ऐसे में इन दोनों विकारों को कम करने के लिए दवाओं का सहारा लिया जाता है।

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