Canva
घर में दीवारों पर सीलन या फफूंदी दिखती है, तो हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं? यह आपके दिमाग को भी चुपचाप नुकसान पहुंचा सकती है। आइए NIH की सट्डी से जानते हैं कैसे?
सीधा असर दिमाग पर
फफूंदी से निकलने वाले खतरनाक कण हवा में मिल जाते हैं। जब हम इन्हें सांस के साथ अंदर लेते हैं, तो ये धीरे-धीरे हमारे दिमाग की कार्यशक्ति पर असर डालते हैं।
तनाव और चिंता बढ़ा सकती है
एक रिसर्च के अनुसार, लगातार फफूंदी के संपर्क में रहने से व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, चिंता और मानसिक थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह असर बिना किसी बीमारी के भी हो सकता है।
बच्चों के दिमाग के लिए खतरनाक
फफूंदी वाले घरों में रहने वाले बच्चों में सीखने की क्षमता घट सकती है। एक स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक संपर्क से IQ में कमी आने का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है।
फफूंदी के खतरनाक तत्व
फफूंदी कुछ ऐसे रसायन छोड़ती है जिन्हें मायकोटॉक्सिन कहा जाता है। ये ब्रेन में सूजन पैदा कर सकते हैं और न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे याद्दाश्त कमजोर होने लगती है।
नींद और मूड पर असर
जिन घरों में नमी और फंगस होती है, वहां रहने वाले लोगों को नींद न आने की शिकायत, बार-बार सिरदर्द और चिड़चिड़ा मूड महसूस हो सकता है।
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी गिरती है
सीलन और फफूंदी से शरीर में सूजन बनी रहती है, जिससे मस्तिष्क के साथ-साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर पड़ जाती है।
कैसे पहचानें और रोकें?
अगर दीवारों पर काले या हरे धब्बे दिखें, अजीब गंध आए, या नमी बनी रहे, तो सतर्क हो जाइए। अच्छी वेंटिलेशन, डिह्यूमिडिफायर और नियमित सफाई से इससे बचा जा सकता है।
आपका घर सिर्फ चार दीवारें नहीं है, यह आपके दिमाग की सेहत का रक्षक भी है। सीलन और फफूंदी से न सिर्फ शरीर, बल्कि मानसिक स्थिति भी बिगड़ सकती है। साफ, सूखा और हवा-दार घर ही असली मानसिक शांति देता है। सेहत से जुड़ी और जानकारी के लिए पढ़ते रहें onlymyhealth.com