बच्चे बिल्कुल नहीं सुनते आपकी बात, तो समझाएं इन 5 तरीकों से

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 29, 2018
Quick Bites

  • बच्चों को मारने से बिगड़ जाते हैं बच्चे।
  • जिद्दी बच्चों को आंखों में आंखें डालकर समझाएं।
  • टीनएज बच्चों को अटेंशन की होती है जरूरत।

बचपन में बदमाशी और जिद तो सभी बच्चे करते हैं मगर कुछ बच्चे बड़े होकर भी जिद्दी रहते हैं। जिद्दी बच्चों को समझाने में बड़ी परेशानी होती है क्योंकि वो आपकी कोई बात नहीं सुनना चाहते हैं। कई मां-बाप बच्चों की जिद और उनके बात न मानने के कारण उनपर गुस्सा करते हैं और मारते भी हैं। मारने से बच्चे की आदत नहीं सुधरती है बल्कि वो धीरे-धीरे आपसे कटने लगता है और कई बार तो बच्चे मां-बाप से नफरत भी करने लगते हैं। बच्चे अगर आपकी बात नहीं सुनते हैं, तो परेशान न हों। इन तरीकों से उन्हें समझाने पर शायद वो आपकी बात आसानी से मानने लगेंगे।

बच्चों का ध्यान अपनी तरफ खींचिए

अगर आप चाहती हैं कि बच्चा आपकी बात सुने, तो सबसे पहले आपको अपने बात करने के तरीके की तरफ गौर करना चाहिए। ज्यादा चिड़चिड़ेपन और गुस्से में कही हुई बातों को अक्सर बच्चे जिद के मारे नहीं सुनना चाहते हैं। बच्चों में आपसे ज्यादा ईगो होता है इसलिए कभी भी उसकी बेइज्जती न करें। अगर आपको बच्चों से कोई बात मनवानी है, तो दूर से बात करने के बजाय बच्चे के पास जाएं, उसके सामने बैठें और आंखों में आंखें डालकर बात समझाएं। ध्यान दें इस दौरान आपकी हाइट बच्चे से उंची न हो यानि अगर बच्चा छोटा है तो आपको झुककर या बैठकर उससे बात करनी चाहिए। इस तरीके से बच्चों पर बातों का प्रभाव ज्यादा पड़ता है और वो इसे मान भी जाते हैं।

इसे भी पढ़ें:- बच्चों पर कभी न डालें ये 5 दबाव, हाइपर पैरेंटिंग से होते हैं डिप्रेशन के शिकार

बच्चों को विकल्प दें

कई बार आप बच्चों को कोई काम सौंपते हैं या कोई बात कहते हैं और वो बच्चे को पसंद नहीं होती है, तो बच्चा तुरंत मना कर देता है। इसका एक तरीका ये है कि बच्चे के सामने विकल्प रखें। अगर आप बच्चे को दो में से किसी एक काम को चुनने का विकल्प रखेंगे, तो संभव है बच्चा अपनी समझ के अनुसार सरल काम के लिए हामी भर दे।

टीनएजर्स को समझें

माता-पिता अक्सर यही सोचते हैं कि उनका टीनएजर जो जिद कर रहा है, वह गलत है या वह जो बात कर रहा है, उसका कोई तुक नहीं है। जबकि हमेशा ऐसा नहीं होता। मां-बाप को चाहिए कि वे अपने टीनएज बच्चों की बातों को गौर से सुनें, उन्हें समझने की कोशिश करें। दरअसल टीनएज में बच्चों का लिविंग स्टाइल बिल्कुल अलग होता है, जो ज्यादा पैरेंट्स को पसंद नहीं आता। लेकिन ऐसा करने की बजाय आप कोशिश करें कि अपने बच्चों को सुनें और समझें। वे जो कर रहे हैं या कह रहे हैं, उसके पीछे छिपे वजह को जानने की कोशिश करें।

इसे भी पढ़ें:- बढ़ने की उम्र में बच्चों को जरूर खिलाएं ये 5 आहार, बनेंगे स्मार्ट और लंबे

टीनएजर्स को इंपार्टेंस दें

टीनएजर्स किसी भी उम्रवर्ग के बच्चों से ज्यादा अटेंशन सीकर होते हैं। उन्हें हर पल मां-बाप की जरूरत होती है। वे अपनी तमाम तरह की बातों को मां-बाप से साझा करना चाहते हैं। लेकिन पैरेंट्स उनकी बातें सुनने की बजाय अनसुना कर देते हैं। नतीजतन उनके टीनएज गुस्सैल और जिद्दी हो जाते हैं। इतना ही नहीं वे अपने पैरेंट्स की बाहर के लोगों के सामने इंसल्ट तक करने लगते हैं। अतः पैरेंट्स को चाहिए कि वे अपने किशोरवय बच्चों को महत्व दें और उन्हें जताएं कि उनकी हर बात उनके लिए महत्व रखती है।

स्वयं उदाहरण बनें

बच्चे ज्यादातर चीजें अपने माता-पिता से ही सीखते हैं। नोटिस करें कि कहीं आप अक्सर अपने बच्चों को दूसरों के सामने तो नहीं डांटती या फिर बात-बात पर टोकाटाकी करती हैं। अगर आप ऐसा करती हैं, तो बच्चों के साथ अब ऐसा न करें। क्योंकि आपका यही व्यवहार उन्हें नकारात्मक बना रहा है। आप खुद उनके सामने उदारहण बनें। दूसरों के सामने कभी भी न उन्हें डांटें और न ही आप अपने पार्टनर के साथ ही झगड़ा करें।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Kids 4-7 In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES756 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK