रीढ़ का लचीलापन कम होने से बुढ़ापे में आती है समस्याएं, रोज करें ये 4 योगासन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 08, 2018
Quick Bites

  • रीढ़ की हड्डी हमारे दैनिक कामों में बहुत मदद करती है।
  • उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की हड्डी का लचीलापन खोने लगता है।
  • सप्ताह में कम से कम 3 दिन ये 4 योगासन करें।

रीढ़ की हड्डी हमारे दैनिक कामों में बहुत मदद करती है। चलने, खड़े होने, बैठने, उठने और शरीर का बैलेंस बनाए रखने के लिए रीढ़ की हड्डी का स्वस्थ होना जरूरी है। आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों के रीढ़ की हड्डी में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं और उसका लचीलापन खोने लगता है। ऐसे में अगर बुढ़ापे में चलने की समस्या और झुके रहने की समस्या से दूर रहना चाहते हैं, तो आज से ही सप्ताह में कम से कम 3 दिन ये 4 योगासन करें।

धनुरासन

यह आसन बाजुओं के साथ-साथ पूरे शरीर से अतिरिक्त चर्बी काटने में कारगर होता है। इससे आपके शरीर में लचीलापन भी आता है और उन्हें मजबूत बनता है। धनुरासन करने के लिये सबसे पहले ठुड्डी को जमीन पर रखें, पैरों को घुटनों से मोड़ें और दोनों हाथों से पैरों के पंजों को पकड़ लें। इसके बाद सांस भीतर भरें और बाजू सीधे रखते हुए सिर, कंधे व छाती को जमीन से ऊपर को उठाएं। इस स्थिति में सांस को सामान्य रखें और चार से पांच सेकेंड के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पहले छाती, कंधे और फिर ठुड्डी को जमीन की ओर लाएं। अब पंजों को छोड़ें और कुछ देर आराम करें। इस प्रक्रिया को कम से कम तीन से पांच बार दोहराएं।

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मत्स्यासन

मत्स्यासन ऐसा आसन है, जो शरीर के आंतरिक अंगों और रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) को स्वस्थ रखा हैं। यह आसन आपकी सेहत में चार चांद लगा सकता है... आसनों की शृंखला में मत्स्यासन ऐसा आसन है, जो रीढ़ की हड्डी(स्पाइन) को लचीला बनाकर शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक सिद्ध होता है। इसे करने के लिए सबसे पहले स्वच्छ वातावरण में समतल जमीन पर आसन बिछाकर सुखासन में बैठ जाएं। कुछ देर सांस को सामान्य करने के बाद पद्मासन लगा लें। अब हाथों का सहारा लेकर पीठ को पीछे की ओर धीरे-धीरे लाते हुए पीठ के बल लेट जाएं। फिर पैरों के अंगूठों को पकड़कर उन्हें थोड़ा अपनी तरफ लाएं और पद्मासन को ठीक करते हुए घुटनों को जमीन पर अच्छी तरह से टिका दें। ऐसा करते हुए सांस भरें और पीठ, कंधों को ऊपर उठा गर्दन को पीछे की तरफ ले जाएं। सिर के भाग को जमीन पर टिका दें। अब पैरों के अंगूठों को पकड़ लें और सांस को सामान्य रखते हुए यथाशक्ति रोकने के बाद पद्मासन खोल लें। कुछ देर शवासन में लेटने के बाद पूर्व स्थिति में आ जाएं।

बालासन 

बालासन के नियमित सही तरह से अभ्यास करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, बाजुओं व शरीर से अतिरिक्त चर्बी दूर होती है और होती है और शरीर स्वस्थ बनता है। बालासन को करने के लिए सबसे पहले घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भार एड़ियों पर डाल दें। अब गहरी सांस भरते हुए आगे की ओर झुकें। ध्यान रहे कि आपका सीना जांघों से छूना चाहिए। फिर अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बबाद वापस सामान्‍य अवस्‍था में आ जायें।

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भुजंगासन

भुजंगासन करने से मांसपेशियों मजबूत होती हैं, और यह शरीर को लचीला बनाता है। इस आसन से न सिर्फ बाजुओं से अतिरिक्त चर्बी दूर होती है बल्कि पूरे शरीर से फैट कम होता है और शरीर चुस्त दुरस्त बनता है। भुजंगासन करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं और फिर दोनों हाथों के बल पर शरीर के कमर से ऊपर के भाग को  ऊपर की तरफ उठाएं, लेकिन ध्यान रहे कि इस समय आपकी कोहनी मुड़ी होनी चाहिए और हथेली खुली और जमीन पर फैली हो। इसके बाद शरीर के बाकी हिस्से को बिना ज्यादा हिलाए-डुलाए चेहरे को ऊपर की ओर लाएं। कुछ समय के लिए इस स्थिति में रहें और सांस छोड़ते हुए वापस आ जाएं।

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