मेनोपॉज के बाद दिल की बीमारियों को रखना है दूर, तो महिलाएं करें ये 3 एक्सरसाइज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 29, 2018
Quick Bites

  • मेनोपॉज के बाद दिल की बीमरियों की संभावना बढ़ जाती है
  • महिलाओं को मेनोपॉज से पहले ही अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए।
  • नियमित कुछ जरूरी एक्सरसाइज से आप दिल को स्वस्थ रख सकती हैं।

महिलाओं में पीरियड्स बंद होने यानी मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आमतौर पर वजन बढ़ना, पेट निकलना, थकान, अवसाद, चिंता आदि की समस्या मेनोपॉज के बाद आम है। मगर अध्ययन बताते हैं कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में दिल की बीमरियों की संभावना भी काफी बढ़ जाती है और इस दौरान हार्ट अटैक के मामले ज्यादा देखे गए हैं। ऐसे में दिल को स्वस्थ रखने के लिए महिलाओं को मेनोपॉज से पहले ही अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए और नियमित कुछ जरूरी एक्सरसाइज करते रहना चाहिए, ताकि दिल की बीमरियों से बचाव हो सके।

क्यों जरूरी है एक्सरसाइज

नियमित रूप से व्यायाम ह्र्दय को स्वस्थ रखने का एक महत्वपूर्ण उपाय है, अगर हम दिन में कम से कम 30 मिनट तक तेजी से चलें या फिर सप्ताह में कम से कम पांच दिन खेल-कूद के गतिविधियों में हिस्सा लें जैसे कि खेलने या तैरने की सलाह दी जाती है। व्यायाम करने से वजन संतुलित में रहता है। इसके अलावा ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रोल स्तर को कम करने में मदद मिलती है और इससे हमारे तनाव का स्तर भी कम होता है। आइए आपको बताते हैं किन एक्सरसाइज से आपका दिल रहेगा मेनोपॉज के बाद भी फिट।

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एरोबिक एक्सरसाइज

इस व्यायाम में अधिक से अधिक मांसपेशियों को काम में लिया जाता है। इससे आपके ह्रदय और फेफड़े को ठीक तरह से काम करने में मदद मिलती है। इस एक्सरसाइज के अंतर्गत नृत्य करना, साइकिल चलाना, दौड़ना, तैरना आदि आता है। ऐसे वर्कआउट शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाते है जिससे ह्रदय और शरीर की संपूर्ण मांसपेशियों में रक्त का सही रूप से संचार करने में मदद करते हैं।

एब्डॉमिनल ब्रीदिंग टेक्नीक

इसके लिए एक हाथ छाती पर और दूसरा पेट पर रखें। नाक से एक गहरी सांस अंदर लें। इससे आपको फेफड़ों में खिंचाव महसूस होगा। ऐसा 6 से 10 बार हर रोज करें। इससे आपको दिल की धड़कन और रक्तचाप नियंत्रित होता हुआ लगेगा। मेनोपॉज के बाद इस एक्सरसाइज को रोज करने से दिल की बीमारियों से बचाव रहेगा और सांसों पर नियंत्रण बढ़ेगा। इसे तब भी कर सकती हैं, जब कभी आप तनाव महसूस करें।

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शशांकासन

शशांकासन एड्रीनल ग्रंथी से हाने वाले स्राव को नियमित करता है। शशांकासन से हृदय रोग दूर होते हैं, फेफड़े, आंते, यकृत, अग्न्याशय भी स्वच्छ होते हैं। इस आसन की मदद से नसें, नाड़ी लचीली होकर अच्छी तरह काम करती हैं। गैस होना, भूख न लगना आदि के लिए शशांकासन फायदेमंद है। चूंकि शशांकासन से हमारे पेट के निचले भाग पर दबाव पड़ता है इसलिए इसे करने से कब्ज की शिकायत खत्म हो जाती है। यही नहीं शशांकासन की वजह से शरीर की अतिरिक्त चर्बी को भी घटाया जा सकता है।

नीचे दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएं। दोनो पैरों को मोड़कर पीछे की ओर यानी नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें और एडि़यों पर बैठ जाएं। अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें। इसके बाद सांस को बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और हथेलियों को फर्श पर टिकाएं। अपने सिर को भी फर्श पर टिकाकर रखें। आसन की इस स्थिति में आने के बाद कुछ समय तक सांस रोककर रखें। फिर सांस लेते हुए शरीर में लचक लाते हुए पहले पेट को, फिर सीने को, फिर सिर को उठाकर सिर व हाथों को सामने की तरफ करके रखें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहें। सीधे होकर आराम करें। इसी क्रिया को 4 से 5 बार करें।

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