क्‍यों आती है हायपरवेंटिलेशन की स्थिति

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 26, 2014
Quick Bites

  • इस स्थिति में व्‍यक्ति अधिक सांस बाहर‍ निकालता है।
  • तनाव, डर, क्रोध के कारण हायपरवेंटिलेशन होता है।
  • भगदड़ होने की स्थिति में यह समस्‍या अधिक होती है।
  • फेफड़े के रोग, उत्‍तेजकों का प्रयोग भी है जिम्‍मेदार।

हायपरवेंटिलेशन यानी तेजी से जल्‍दी-जल्‍दी सांस लेना। हायपरवेंटिलेट होने पर व्‍यक्ति तेजी से सांस बाहर निकालता है और कम मात्रा में सांस खींचता है। यानी इस स्थिति में सांस लेने और बाहर निकालने में असंतुलन हो जाता है। इस स्थिति में व्‍यक्ति सांस अधिक मात्रा में बाहर करता है जिसके कारण शरीर में कार्बन डाइआक्‍साइड की मात्रा कम हो जाती है।

कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम होने से दिमाग में खून का संचार करने वाली रक्‍त वाहिकायें संकुचित हो जाती हैं। इसकी वजह से चेतनाशून्‍य हो सकता है और उं‍गलियों में झुनझुनी होने लगती है। हालांकि यह बहुत ही दुर्लभ बीमारी है जो कभी-कभी होती है। ऐसी स्थिति तनाव, डर, भगदड़ होने, क्रोध, जैसी स्थिति के कारण आ सकती है। लेकिन जब यह घटना व्‍यक्ति के साथ निरंतर होने लगती है तो इसे हायपरवेंटिलेशन सिंड्रोम कहते हैं। इस लेख में जानिए हायपरवेंटिलेट होने के कारणों के बारे में।

Why do I Hyperventilate

हायपरवेंटिलेट होने के कारण

  • तनाव व्‍यक्ति का सबसे बड़ा दुश्‍मन है, इसके कारण सांस लेने में दिक्‍कत हो सकती है।
  • फेफड़े की बीमारी के कारण भी सांस लेने में समस्‍या हो सकती है, फेफडों से संबंधित बीमारी के कारण भी यह हायपरवेंटिलेट की दिक्‍कत होती है।
  • रक्‍तस्राव होने पर भी सांस लेने में समस्‍या होती है।
  • भगदड़ की स्थिति में आदमी का विवेक काम नहीं करता और वह सांस तेजी से अंदर बाहर करता है।
  • किसी भी प्रकार के उत्‍तेजक का प्रयोग करने पर भी यह स्थिति आ सकती है।
  • एंटीबॉयटिक दवाओं का अधिक प्रयोग करना भी इस समस्‍या का कारण बन सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं को यह समस्‍या अक्‍सर होती है।
  • फेफड़ों की बीमारियां जैसे - अस्‍थमा, सीओपीडी के कारण भी यह हो सकता है।
  • दिल की बीमारियों के कारण, या फिर दिल का दौरा पड़ने पर।

do I Hyperventilate

ऐसी स्थिति होने पर

हायपरवेंटिलेशन एक गंभीर समस्‍या है, इसे नजरअंदाज न करें। यदि आपको सांस लेने में दिक्‍कत हो रही है तो चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए। इस समस्‍या के उपचार के लिए घरेलू नुस्‍खों को न आजमायें, क्‍योंकि इसके कारण स्थिति गंभीर हो सकती है। शरीर में दर्द हो, रक्‍तस्राव हो, सांस लेने में दिक्‍कत हो, और लगातार कई दिनों तक बुखार हो तो इसकी जांच करायें।

 

बचाव और उपचार

सांस लेने से व्‍यक्ति जीवित रहता है, यदि सांस लेने में कठिनाई से जीवन भी खतरे में पड़ सकता है। लेकिन यदि आप अपने फेफड़ों और दिल को मजबूत बनाने के लिए नियमित रूप से योग और व्‍यायाम कर रहे हैं तो इस प्रकार की स्थिति आने की संभावना कम होती है। ध्‍यान और योगासन के जरिये आप लंबी-लंबी सांसें लेकर इस समस्‍या से बच सकते हैं। यदि आप इस समस्‍या से जूझ रहे हैं तो भीड़ वाली जगह पर न जायें, तनाव न लें और क्रोध बिलकुल न करें।


हायपरवेंटिलेट की स्थिति में खुद पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें, यदि ऐसी समस्‍या आ गई है तो धीरे-धीरे सांस लेने की को‍शिश कीजिए और चिकित्‍सक से सलाह अवश्‍य लें।

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