जानें क्या है हर्निया और कैसे होती है इस खतरनाक रोग की जांच और इलाज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 28, 2018
Quick Bites

  • यह शरीर के किसी भी हिस्‍से में हो सकता है।
  • हर्निया में पेट के हिस्से बाहर निकल आते हैं।
  • इस रोग में किसी भी सामान को सही तकनीक से उठाएं।

हर्निया ऐसी बीमारी है जो अंग के अतिरिक्‍त विकास के कारण उत्‍पन्‍न होती है, यानी अगर शरीर का कोई अंग अपनी सामान्‍य स्थिति से अधिक बढ़ जाये तो वह हर्निया है। यह शरीर के किसी भी हिस्‍से में हो सकता है। लेकिन पेट में होने वाली हर्निया सबसे सामान्‍य है। हर्निया का दर्द बेहद तकलीफदेह होता है। अधिकतर मामलों में हर्निया त्‍वचा के नीचे ही उभार करते हैं। इस उभार का स्‍थान हर्निया के प्रकार पर निर्भर करता है। कुछ हर्निया में दर्द की टीस मचती है। या किसी में खिंचाव होता तो होता है, लेकिन दर्द नहीं होता। खांसते या शौच के समय आसानी से देखे जा सकते है।

एबडॉमिनल वॉल के कमजोर भाग के अंदर का कोई भाग जब बाहर की ओर निकल आता है तो इसे हर्निया कहते हैं। हर्निया में जांघ के विशेष हिस्से की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण पेट के हिस्से बाहर निकल आते हैं। हर्निया की समस्या जन्मजात भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में इसे कॉनजेनाइटल हर्निया कहते हैं। हर्निया एक वक्त के बाद किसी को भी हो सकता है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि हर्निया का एकमात्र इलाज सर्जरी है जिसकी वजह से वे डॉक्टर के पास जाने से डरते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है हर्निया बिना सर्जरी के भी ठीक हो सकता है।

हर्निया में सावधानियां

  • किसी भी सामान को सही तकनीक से उठाएं। इसके लिए आप अपने डॉक्‍टर से सलाह ले सकते हैं। डॉक्‍टर के सुझाए तरीकों से ही किसी सामान को उठाएं।
  • अपने वजन को न बढ़ने दें। अधिक वजन आपकी तकलीफ में इजाफा कर सकता है। अगर आपका वजन ज्‍यादा है तो उसे काबू करने की कोशिश करें। किसी आहार-विशेषज्ञ की मदद से अपने लिए उचित आहार-चार्ट भी बनवा सकते हैं।
  • कब्‍ज आपके दर्द, तकलीफ और बीमारी को बढ़ा सकता है। तो, किसी भी सूरत में अपने पाचन-तंत्र को बिगड़ने न दें। इसके लिए अपने आहार में अधिक मात्रा में फाइबर शामिल करें। साथ ही तरल पदार्थों का सेवन भी अधिक करें। पेट में दबाव बनने पर निवृत होने में देरी न करें।

हर्निया की अल्ट्रासाउंड से जांच 

  1. हर्निया का पता लगाने के लिए अल्‍ट्रासाउंड एक जांचा-परखा तरीका है। इसमें ध्‍वनि तरंगों के माध्‍यम से शरीर के भीतरी हिस्‍से की तस्‍वीर तैयार की जाती है। इससे यह पता चलता है किे आपकी मांसपेशियों के बीच कितना बड़ा गैप है। और यह हर्निया के बारे में जानकारी दे सकता है। अल्‍ट्रासाउंड से यह भी पता चलता है कि कहीं किसी और समस्‍या के कारण तो आपको दर्द का सामना नहीं करना पड़ रहा। 
  2. कभी-कभार डॉक्‍टर कुछ अन्‍य जांच करने को भी कह सकता है। एमआरआई और सीटी स्‍कैन करने की जरूरत महसूस होने पर डॉक्‍टर आपको यह जांच करवाने को कह सकता है। एमआरआई मशीन चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती है इससे आपके शरीर के भीतर की तस्‍वीरें बनती हैं। सीटी स्‍कैन एक प्रकार का एक्‍स-रे है, जो शरीर के अंदूरूनी हिस्‍से की कई तस्‍वीरें एक साथ लेता है, और वह भी अलग-अलग एंगल से।

हर्निया से बचने के लिए क्या करें

  • मलाशय की ठीक प्रकार से सफाई
  • मोटापे व वजन बढ़ने की समस्या से बचें
  • प्रोटीन व विटामिन सी सप्लीमेंट का सेवन
  • आरामदायक अंडरगारमेंट ही  पहनें
  • उन कार्यों से बचना चाहिए, जो हमारे पेट की मांसपेशियों पर अधिक दबाव डालते हों।
  • वजन भी संतुलित रखना चाहिए।
  • अगर कब्ज की समस्या है तो इसका तुरंत उपचार कीजिए।
  • रेशेदार पदार्थों का सेवन करें।

हर्निया के लिए योगासन

पीठ के बल समतल स्थान पर लेट जाएं। हाथों को हर्निया वाली जगह पर रखें। उसके बाद दोनों पैरों को जमीन से लगभग दो फीट ऊपर उठाएं। जब हम अपने दाहिने पैर को ऊपर उठाएंगे तो बायां पैर नीचे होना चाहिए और जब बायां पैर उठाएंगे तो दायां पैर नीचे होना चाहिए। इस प्रक्रिया को कम से कम दस बार दोहराएं। इस प्रक्रिया को करने के बाद पैरों को नीचे रखकर आराम करें।

पहले सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। फिर दोनों पैरों को एक दूसरे से कुछ दूर रखते हुए खड़े रहें और फिर हाथों को सिर के ऊपर उठाते हुए सीधाकर हथेलियों को मिला दें। इसके बाद दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए उसके तलवे को बाईं जांघ पर टिका दें। इस स्थिति के दौरान दाहिने पैर की एड़ी गुदाद्वार-जननेंद्री के नीचे टिकी होगी। बाएं पैर पर संतुलन बनाते हुए हथेलियां, सिर और कंधे को सीधा एक ही सीध में रखें। इसे वृक्षासन भी कहते हैं। जब तक इस आसन की स्थिति में आसानी से संतुलन बनाकर रह सकते हैं सुविधानुसार उतने समय तक रहें। एक पैर से दो या तीन बार किया जा सकता है।

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