Morning Sickness: सुबह उठने के बाद रहती है थकान और बैचेनी तो आप हैं मॉर्निंग सिकनेस के शिकार, इन घरेलू नुस्खों से करें दूर

गर्भावस्था में महिलाओं को 'मॉर्निंग सिकनेस' यानी सुबह उठने के बाद उल्टी, जी मिचलाने, चक्कर आने जैसी समस्याएं होती हैं। ये समस्याएं प्रेग्नेंसी के 6 से 12वें सप्ताह में ज्यादा परेशान करती हैं।

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Feb 21, 2014
Morning Sickness: सुबह उठने के बाद रहती है थकान और बैचेनी तो आप हैं मॉर्निंग सिकनेस के शिकार, इन घरेलू नुस्खों से करें दूर

उम्र के साथ-साथ महिलाओं में शारीरिक बदलाव होने के साथ कई और समस्याएं होती हैं जिनमें से एक है मॉर्निंग सिकनेस। हर तीन में से एक महिला इस समस्या से ग्रस्त होती है। गर्भावस्था के दौरान मॉर्निंग सिकनेस के कारण महिलाएं जी मिचलाने और उल्टी जैसी समस्या से ग्रस्त रहती हैं। मॉर्निंग सिकनेस में सुबह–सुबह गर्भवती महिलाओं को सर चकराने और उल्टी होने जैसी शिकायत रहती है। कभी–कभी मॉर्निंग सिकनेस के लक्षण इतने तेज होते है, कि इसमें बार–बार उल्टियां होने लगती है और शरीर से अधिक मात्रा में पानी निकल जाता है। इस वजह से महिलाओं में बहुत ज्यादा थकावट और बैचैनी हो सकती है।  इससे गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

गर्भावस्था के दौरान मॉर्निंग सिंकनेस में हाने वाली परेशानियां

गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से होने वाली मॉर्निंग सिकनेस कोई बीमारी नहीं है और यह गर्भावस्था के दौरान रीर में हाने वाले बदलाव का एक हिस्सा है। इससे गर्भवती मां के स्वास्थ्य  पर कोई गंभीर प्रभाव भी नहीं पड़ता है। लेकिन जब मॉर्निंग सिकनेस के दौरान बार–बार और अधिक मात्रा में गर्भवती को उल्टियां होने लगे और इस वजह से उसके पेट में कोई भी अन्य और पानी का रूकना मुश्‍किल हो जाए तो तत्काल इस पर ध्यान देना चाहिए।

अगर मॉर्निंग सिकनेस लम्बे समय तक बनी रहेगी तो इससे गर्भवती महिला का वजन लगातार कम होता जाएगा और उसे स्वस्थ्य होने में काफी समय लग जाएगा। इसके परिणामस्वरूप गर्भ में पलने वाले भ्रूण को भी उचित पोषण नहीं मिलेगा और समय से पहले शिशु के जन्म होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

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मॉर्निंग सिकनेस का कारण

गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोन्‍स के परिवर्तन के कारण मॉर्निंग सिकनेस की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। आम तौर पर गर्भ नाल द्वारा स्रावित होने वाले हयूमैन कोरियोनिक गोनाडोट्रा‍फिन और एस्ट्रोजन नामक हार्मोन्‍स को मॉर्निंग सिकनेस का कारण माना जाता है।

मॉर्निंग सिकनेस दूर करने के उपाय

आराम करें

जब महिला गर्भवती हो, तो उसे भरपूर आराम करना चाहिये। इससे उसे और उसके बच्‍चे को आराम मिलेगा। गर्भावस्‍था में कम से कम आठ घंटे की नींद लेना चाहिये जिससे थकान दूर हो सके।

जल्दी में ना उठें

गर्भावस्‍था के दौरान कभी भी जल्दी से बेड से ना उठें। जगने के बाद थोड़ी देर बिस्तर पर ही बैठें और दस मिनट के बाद ही बेड से उतरें। अगर आपका रूम गर्म है तो अचानक से सर्दी में बाहर न निकलें। इससे मार्निंग सिकनेस की समस्या बढ़ जाती है।

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पौष्टिक आहार लें

मॉर्निंग सिकनेस को दूर करने के लिए वही खाएं जो अच्‍छा लगे। ज्‍यादा तीखा या चटपटा न खाएं पर मन को अच्‍छा लगने वाला खाएं। कोशिश करें कि आप सुबह - सुबह खाली पेट, चाय या कॉफी न पिएं, वरना इससे एसिड बनने की संभावना ज्‍यादा होती है।

शारीरिक गतिविधि  

गर्भावस्‍था के दिनों में खुद को एक्टिव रखें। बहुत भारी व्यायाम ना करें लेकिन टहलना जरूर शुरु करें। इससे आपकी मार्निंग सिकनेस की समस्या काफी कम हो सकती है। इसके अलावा आप चाहें तो घर के छोटे-छोटे काम भी कर सकती हैं जिससे आप शारीरिक रुप से सक्रिय रहेंगी और आपका शरीर भी फिट रहेगा। फीजिकल एक्टिव रहने के प्रसव के दौरान भी ज्‍यादा समस्‍या नहीं आती है।

अदरक और लिक्विड

मतली या उल्‍टी जैसी किसी भी समस्‍या में अदरक का जूस सबसे फायदेमंद होता है। अदरक के सेवन से पेट में होने वाली लगभग सभी तकलीफें दूर हो जाती हैं। गर्भावस्‍था में अदरक के जूस को आधा गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से आराम मिलता है। इससे शरीर में डिहाईड्रेशन भी दूर जाता है और महिला रिलैक्‍स हो जाती है।

नींबू पानी लें

मार्निंग सिकनेस से बचने के लिए आप सुबह-सुबह नीबू पानी ले सकती हैं। इसके लिए पानी ,नींबू के रस और पुदीने लें। इससे मार्निंग सिकनेस की समस्या में आपको काफी फर्क महसूस होगा।

सेब का सिरका 

एपल सिडर विनेगर से मार्निंग सिकनेस में काफी फायदेमंद माना जाता है। हर रोज सुबह नियमित रुप से एपल सिडर विनेगर को शहद के साथ लेने पर मार्निंग सिकनेस का इलाज आसानी से हो सकता है।

  • जब मोर्निंग सिकनेस में निम्न लक्षण दिखाई दे तो डाक्टरी सहायता लेनी चाहिए
  • तीव्र रूप सर चकराना और उल्टी होना
  • वजन में अचानक और तेजी से कमी
  • उल्टी में खून आना
  • दिल की धड़कन का अचानक बढ़ जाना

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