सर्दी में शिशु को ठंड से बचाना है तो ऐसे लपेटें कपड़ा, जरूरी हैं कुछ सावधानियां

सर्दी के मौसम में अगर ठीक से देखभाल न की जाए, तो नवजात शिशुओं को कई बड़ी परेशानियां हो सकती हैं। नवजात शिशुओं के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी विकसित नहीं होती है कि वो बाहरी जीवाणुओं और वायरस से उन्हें बचा सके। इसके अलावा शिशु के ज्यादातर अंग

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Dec 30, 2018
सर्दी में शिशु को ठंड से बचाना है तो ऐसे लपेटें कपड़ा, जरूरी हैं कुछ सावधानियां

सर्दी के मौसम में अगर ठीक से देखभाल न की जाए, तो नवजात शिशुओं को कई बड़ी परेशानियां हो सकती हैं। नवजात शिशुओं के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी विकसित नहीं होती है कि वो बाहरी जीवाणुओं और वायरस से उन्हें बचा सके। इसके अलावा शिशु के ज्यादातर अंगों जैसे- तंत्रिकाएं और मस्तिष्क आदि का विकास होता रहता है इसलिए उसे ठंड से बचाना बहुत जरूरी है। ठंडे तापमान में शिशु को गर्म रखने के लिए उसे कपड़े से अच्छी तरह लपेटा जाता है, जिसे स्वैडलिंग कहते हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है शिशु को लपेटने का सही तरीका और कौन सी सावधानियां बरतनी हैं जरूरी।

कैसे लपेटें शिशु को

शिशु के शरीर के अंग बहुत ज्यादा नाजुक होते हैं इसलिए उसे ऐसे ही किसी कपड़े में लपेटना ठीक नहीं है। इसके लिए सबसे पहले ध्यान दें कि शिशु को जिस कपड़े में लपेट रहे हैं वो अच्छी तरह साफ हो और नर्म हो। इसके लिए मुलायम टॉवेल और सूती कपड़ा उपयुक्त होता है। ऐसा ही एक कपड़ा ले कर किसी समतल जगह पर बिछा लें।

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अब कपड़े के ऊपरी दाहिने छोर को लगभग 15 सेन्टीमीटर मोड़ कर उसकी एक तह लगा लें। अब अपने शिशु को पीठ के सहारे लिटाकर उसका सिर उस तह पर रख दें। अपने शिशु के बायें हाथ के निकट के छोर को उसके शरीर के ऊपर से ले जाकर उसके दाहिने हाथ और पीठ के नीचे भी तह लगा लें। अब नीचे के छोर को खींच लें और शिशु की ठोढ़ी के नीचे तह लगा दें। फिर दाहिने छोर को खींच कर उसके बायीं ओर नीचे एक और तह लगाएं। कुछ शिशु अपनी भुजायें खुली रखना पसंद करते हैं, इसलिए आप अपने शिशु को उसकी भुजाओं के नीचे लपेटें ताकि वह अपने हाथों और अंगुलियों को खुला रख सके।

इन बातों का रखें ध्यान

  • लपेटने से पहले जांच लें कि कहीं शिशु ने कपड़े गीले तो नहीं किये हैं या वो भूखा तो नहीं है।
  • शिशु का चेहरा या सिर न ढकें क्योंकि इससेउसे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
  • सिर को लपेटने से शिशु के शरीर का तापमान ज़रुरत से अधिक बढ़ सकता है।
  • सर्दियों के अलावा शिशु को लपेटने के बाद सामान्यत: उसे कम्बल या चादर की आवश्यकता नहीं होती है।
  • शिशु जब एक महीने का हो जाये तो उसे लपेटना बंद कर दें।
  • एक माह के बाद शिशु को अपने हाथ-पैर हिलाने की सहूलियत दें नहीं तो उनके अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।
  • अगर शिशु बार-बार कपड़ा हटा रहा है तो समझें कि उसे लपेटा जाना पसंद नहीं है।
  • कमरे का तापमान ज्यादा होने पर शिशु को कपड़े में नहीं लपेटना चाहिए।
  • अगर लपेटे जाने के बाद शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो तो कपड़ा तुरंत हटा दें।
  • शिशु अगर लपेटे जाने के बाद रोता है तो इसका मतलब है कि उसे बाहर का तापमान ही ज्यादा पसंद आ रहा है।
 

क्यों लपेटते हैं शिशु को

गर्भ में बच्चे को मां के शरीर की गर्मी का एहसास होता है जबकि बाहर के तापमान के तापमान में खुद को एडजस्ट करने में उसे समय लगता है। दुनिया में आने के बाद भी शिशुओं को सुरक्षा की भावना का एहसास दिलाना जरूरी होता है। इसके लिए मां की गोद शिशु को सुरक्षित महसूस होती है क्योंकि एक तो गोद में उसे गर्माहट का एहसास होता है। इसके अलावा सर्दी के मौसम में शिशु के शरीर को गर्म रखने और रोगों से बचाने के लिए भी शिशु को लपेटना अच्छा होता है।

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