आपकी सेहत को तबाह कर रहा है सोशल एंग्जाइटी! जानें कैसे?

कभी आपको भी ऐसा महसूस हुआ कि आप छोटी-छोटी बातों पर घबराने हैं? 

Rashmi Upadhyay
Written by: Rashmi UpadhyayUpdated at: Oct 20, 2017 16:00 IST
आपकी सेहत को तबाह कर रहा है सोशल एंग्जाइटी! जानें कैसे?

कभी आपको भी ऐसा महसूस हुआ कि आप छोटी-छोटी बातों पर घबराने हैं? या लोगों के बीच जाने से आपको डर लगता है? या कोई किसी ने आपसे कुछ पूछा हो और आपको ऐसा लगा हो कि अगर उत्तर गलत हुआ तो क्या होगा? या फिर अगर रात को सोते समय आप करवटें बदलते रहते हैं और किसी भी तरह आपके मन को शांति नहीं मिलती या आपको ऐसा लगता है कि आपके पास कोई है? अगर ऐसा है तो समझ लीजिए कि आप सोशल एंग्जाइटी की चपेट में आ चुके हैं। इस बीमारी को सोशल फोबिया भी कहते हैं।

एंग्जाइटी डिस्‍ऑर्डर एक प्रकार का मानसिक विकार है जो आमतौर 13 से 35 साल के लोगों में अधिक देखने को मिलता है। सही समय पर इलाज न होने पर यह आगे चलकर फोबिया में बदल जाता है। बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के कारण लोगों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी का आलम ये है कि ये लोगों में कैंसर की तरह ही लगातार बढ़ती जा रही है। इसके लक्षण पता न होने के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। यह बीमारी 6 महीने से अधिक होने पर पागलपन भी बन सकती है या किसी गंभीर रोग को भी अंजाम दे सकती है। इसलिए समय रहते इसकी पहचान करके इलाज करवा लेना ही ठीक ही है। 

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सोशल फोबिया के कारण

सोशल फोबिया केवल 5 से 10 प्रतिशत लोगों में ही देखने को मिलता है। आमतौर पर यह रोग 20 साल की उम्र से पहले ही शुरू हो जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह रोग अधिक देखा जाता है। इस रोग के होने तथा बढ़ने में पारिवारिक और आस-पास के माहौल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह अनुवांशिक भी हो सकता है या फिर किसी बुरी घटना का साक्षी होने की वडह से भी। 

एंग्जाइटी के लक्षण

फैसला करने की क्षमता कम होना, बोलते हुए घबराहट, पेट में हलचल, कमजोरी, थकावट, बेवजह चिंता, हाथ—पैर का बेवजह कांपना, आंखों के आगे बिंदु तैैरना, घबराहट, डर, नकारात्मक विचार, बेकाबू होना, रात में अचानक उठ जाना, लोगों से डर लगना हाथ पैरों का ठंडा होना, मांसपेशियों में सूजन और पेट में हलचल के लक्षण दिखाई देते है।

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क्या है इसका इलाज

सोशल फोबिया के इलाज में दवाओं और मनोचिकित्सा दोनों का ही प्रमुख योगदान और महत्व होता है। इस रोग के लिये दवाओं का चुनाव व्यक्तिकगत लक्षण के आधार पर किया जाता है। मनोचिकित्सा में रोगी के साथ-साथ उसके परिजनों की भी मदद ली जाती है।

  • इस बीमारी में कम सोचें यानि कि ज्यादा मानसिक तनाव ना लें और कभी भी अकेले न रहें। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा नींद लें। नींद के अभाव में भी ये रोग होता है।
  • ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और वसा का सेवन करना इस समस्या में काफी फायदेमंद होता है। इसके अलावा अपना भोजन हेल्दी रखें और समय पर करें।
  • योगा और व्यायाम करना भी सोशल फोबिया में फायदेमंद है। इसके अलावा सुबह शाम ताजी हवा में सैर करें और पैदल चलें।
  • तनावग्रस्त और जंक फ्रूड के सेवन से दूर रहें। ये आपके रोग को और भी बढ़ा सकती हैं।

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