मजबूत रिश्तों को भी कमजोर कर देती हैं ये 3 बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 06, 2018
Quick Bites

  • टूटते रिश्ते में दिखाई देते हैं ये संकेत।
  • उसकी समस्या का कारण कहीं आप ही तो नहीं।
  • रिलेशनशिप में नेगेटिव साइन्स को पहचाना जरूरी है।

प्यार का रिश्ता जितना खास होता है उतना ही नाजुक होता है। हर रिश्ते में कभी कोई अनबन होती है तो कभी खुशियों का ठिकाना नहीं होता है। दो प्यार करने वालों के बीच भी कभी-कभी कुछ कारणों से फासले आना लाजमी है। लेकिन कभी कभी ये नोकझोंक ऐसा माहौल बना देती हैं कि रिश्ते की एक्सपायरी डेट ही आ गई हो। इसलिए रिलेशनशिप में पैदा होने वाले नेगेटिव साइन्स को पहचाना और उन्हें सुधारना ज़रूरी है, ताकि रिश्ते में मिठास बनी रहे। आजकल रिश्तों की डोर काफी ढीली सी पड़ती जा रही है। तलाक के बढ़ते मामले भी चिंता का सबब बने हुए हैं। अगर रिश्ते में असुरक्षा-भावना पनप रही है और अपने रिश्ते को हर कीमत पर बचाना चाहते हैं तो कारणों की तह तक जाएं और समस्या को सुलझाएं-

समस्या की वजह

उसकी समस्या का कारण कहीं आप ही तो नहीं? अपनी आदतों, स्वभाव, लाइफस्टाइल पर नजर डालें। खुद को अपने ही आईने में साफ-साफ देखने की कोशिशें करें। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपकी आदतों ने पार्टनर को असुरक्षित महसूस कराया हो? आपने वादा नहीं पूरा किया, तय समय पर उसे कॉल नहीं किया, दोस्तों के साथ आउटिंग पर गए, पार्टनर को बताने की जरूरत नहीं समझी, आपकी फ्लर्टिंग की आदत उसे परेशान करती है? कारण तलाशें, हो सकता है पार्टनर की असुरक्षा की वजह खुद आप ही हों।

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कैसे करें मदद

क्या असुरक्षा-भावना से बाहर निकलने में आप अपने पार्टनर की मदद कर सकते हैं? उससे ज्य़ादा से ज्य़ादा बात करें, उसे साथ होने का भरोसा दिलाएं, उसे नजरअंदाज करने, उसकी उपेक्षा करने या उससे बात करना छोडऩे जैसी ग़्ालती कभी न करें, इससे असुरक्षा बढ़ती जाएगी। उसके भीतर भरोसा पैदा करें कि आपके लिए उसका होना कितना महत्वपूर्ण है, उसकी तारीफ करें, उसकी छोटी-छोटी अपेक्षाएं पूरी करें, रिश्ते की खातिर जरा सा झुक जाएं।

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धैर्य की सीमा

पार्टनर की असुरक्षा को किस हद तक धैर्य के साथ संभाल सकते हैं, यह जानना भी जरूरी है। क्या कुछ बातों को नजरअंदाज किया जा सकता है? स्थितियों को थोड़े धैर्य के साथ स्वीकार किया जा सकता है? किन बातों को नहीं स्वीकार किया जा सकता? क्या पार्टनर स्वयं भी अपनी असुरक्षा से बाहर आने की मंशा रखता है? क्या इसके लिए वह कोशिशें कर रहा है? यदि हां तो धैर्य रखना उचित होगा। असुरक्षा हमेशा रिश्ते में खतरा नहीं पैदा करती, लेकिन इसे बढऩे नहीं दिया जाना चाहिए। 

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