पीठ के दर्द से मुक्ति देता है मार्जारी आसन

By  ,  सखी
Nov 10, 2011

pitha kay darda say mukti dayta hai marjari ashana

कई तरह के तनावों और दबावों से भरी नए दौर की भागमभाग वाली जीवनशैली के कारण लोग तमाम व्याधियों के शिकार होते देखे जा रहे हैं।  अनावश्यक भावनात्मक दबावों, कई बार गलत मुद्रा में उलटे-सीधे तरीके से उठने-बैठने या खड़े होने के कारण लोग ऐसी मुश्किलों के शिकार हो जाते हैं जिनकी पकड़ से छूटना कठिन होता है। इनमें से ही एक है पीठ का दर्द। पीठ का दर्द एक ऐसी व्याधि है जो अकेले नहीं आती। इसके चलते कंधों में दर्द, मांसपेशियों में लोच की कमी, वजन का घटना, गर्दन में दर्द, कमजोरी और कभी-कभी सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है।

 

पीठ के लिए योग थेरेपी 

 

पीठ में जब हलका दर्द महसूस हो रहा हो उसी समय से अगर योगासन शुरू कर दें तो उस पर नियंत्रण कर गंभीर दिक्कतों का शिकार होने से आप स्वयं को बचा सकती हैं। बेहतर यह होगा कि किसी योग्य शिक्षक से सलाह कर आसनों का एक पूरा समूह चुनें और उनका नियमित अभ्यास करें। इससे पूरे शरीर में संतुलन बने रहने से रीढ़ में लोच और मजबूती दोनों बनी रहेगी। इस तरह पीठ में किसी प्रकार की व्याधि नहीं होने पाएगी।

 

मार्जारी आसन की विधि 

  1. दोनों घुटनों और दोनों हाथों को जमीन पर रखकर घुटरूं खड़ी हो जाएं।  
  2. हाथों को जमीन पर बिलकुल सीधा रखें। ध्यान रखें कि हाथ कंधों की सीध में हों और हथेली फर्श पर इस तरह टिकाएं कि उंगलियां आगे की तरफ फैली हों। 
  3. हाथों को घुटनों की सीध में रखें, बांहें और जांघें भी फर्श से एक सीध में होनी चाहिए।  
  4. घुटनों को एक-दूसरे से सटाकर भी रख सकती हैं और चाहें तो थोड़ी दूर भी। यह इस आसन की आरंभिक अवस्था है। 
  5. इसके बाद रीढ़ को ऊपर की तरफ खींचते हुए सांस अंदर खींचें। इसे इस स्थिति तक लाएं कि पीठ अवतल अवस्था में पूरी तरह ऊपर खिंची हुई दिखे।  
  6. सांस अंदर की ओर तब तक खींचती रहें जब तक कि पेट हवा से पूरी तरह भर न जाए। इस दौरान सिर का ऊपर उठाए रखें। सांस को तीन सेकंड तक भीतर रोक कर रखें।  
  7. इसके बाद पीठ को बीच से ऊपर उठाकर सिर नीचे झुकाएं। 
  8. अपनी दृष्टि नाभि पर टिकाएं।  
  9. सांस धीरे-धीरे बाहर छोड़ें और पेट को पूरी तरह खाली कर दें और नितंबों को भी भीतर की तरफ खींचें। 
  10. सांस को फिर तीन सेकंड तक रोकें और सामान्य दशा में वापस आ जाएं। इस तरह इस आसन का एक चक्र पूरा होता है।  

श्वसन 

 

सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जितना भी संभव हो सके, उतना ही धीरे-धीरे करें। कोशिश यह करें कि सांस भीतर खींचने में कम से कम पांच सेकंड लगें और फिर छोड़ने में भी कम से कम इतना ही समय लगे।

 

कितनी बार करें 

 

एक बार में आप पांच से दस बार तक इस आसन की पूरी प्रक्रिया को दुहरा सकती हैं।

 

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