जरूरी नहीं है 'नी अर्थराइटिस' में सर्जरी, इन तरीकों से भी दूर होता है रोग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 08, 2018
Quick Bites

  • सबसे पहला इलाज यह है कि अपनी जीवनशैली में परिवर्तन लाएं।
  • हाईलुरोनिक इंजेक्शन और पीआरपी जैसे इलाज सम्मिलित हैं। 
  • पूरी नींद लें और तनाव से बचने के लिए ध्यान करें। 

घुटनों में दर्द होने और उसके कड़ेपन से हमारे चलने-फिरने की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इस कारण जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। बावजूद इसके, कई लोग लंबे समय तक इन परेशानियों को सहते रहते हैं। उन्हें लगता है कि इन सबसे छुटकारा पाने का केवल एक ही विकल्प है नी रिप्लेसमेंट सर्जरी, लेकिन इस संदर्भ में यह जानना जरूरी है कि यह सर्जरी एकमात्र और अंतिम विकल्प नहीं है। कई नान सर्जिकल उपचार भी उपलब्ध हैं, जैसे फिजिकल या फिजियो थेरेपी, दवाएं, इंजेक्शंस, कई नए बॉयोलॉजिकल ट्रीटमेंट जिनमें हाईलुरोनिक इंजेक्शन और पीआरपी जैसे इलाज सम्मिलित हैं।   

नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट 

यह इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपके घुटनों के दर्द का कारण क्या है और समस्या किस स्तर पर है। अगर घुटनों के दर्द और क्षतिग्रस्त होने की समस्या पहले और दूसरे दौर में है, तो सर्जरी से बचा जा सकता है। तीसरे दौर में सर्जरी में देरी कर सकते हैं, और दूसरे विकल्पों से इलाज करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन चौथे दौर में सर्जरी ही केवल एकमात्र विकल्प बचती है। 

जीवनशैली में परिवर्तन: सबसे पहला इलाज यह है कि अपनी जीवनशैली में परिवर्तन लाएं। संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें, अपना वजन कम करें, नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग करें। पूरी नींद लें और तनाव से बचने के लिए ध्यान करें। 

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फिजियोथेरेपी: कई प्रकार की अर्थराइटिस में फिजियोथेरेपी बहुत कारगर होती है। इससे अंगों की कार्यप्रणाली सुधरती है और जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां सशक्त होती हैं। अगर अर्थराइटिस शुरुआती दौर में है तो उसे फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में परिवर्तन लाकर नियंत्रित किया जा सकता है। 

दवाएं: आपका डॉक्टर आपको दवाएं दे सकता है ताकि दर्द में आराम मिले और घुटनों की समस्याओं जैसे ऑस्टियोअर्थराइटिस, र्यूमैटॉइड अर्थराइटिस और गठिया को ठीक किया जा सके। 

इंजेक्शन 

अनेक मामलों में घुटनों के दर्द को ठीक करने के लिए घुटनों में दवाएं या दूसरे पदार्थ इंजेक्शन के जरिए पहुंचाए जाते हैं। इसमें सम्मिलित हैं-

कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स: जब घुटनों में बहुत तेज दर्द हो और सूजन भी हो, तो स्टेरॉइड के इंजेक्शंस लगाए जा सकते हैं। घुटनों के जोड़ों में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के इंजेक्शन लगाने से अर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में सहायता मिलती है और कुछ महीनों तक घुटनों के दर्द से आराम मिलता है, लेकिन ऐसे इंजेक्शन सभी मामलों में प्रभावी नहीं हैं। 

हाईलुरोनिक एसिड: यह एक गाढ़ा फ्लूड या तरल होता है। यह ल्युब्रिकेंट प्राकृतिक फ्लूड के समान होता है जो जोड़ों को प्राकृतिक तरीके से ल्युब्रिकेट करते हैं। हाईलुरोनिक एसिड के इंजेक्शन लेने से घुटनों के मूवमेंट में सुधार आता है और दर्द से राहत मिलती है। यह इलाज कितना प्रभावी रहेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है। एक बार इसके इंजेक्शंस लेने से लगभग छह महीने तक आराम मिलता है। हाईलुरोनिक एसिड, अर्थराइटिस को गंभीर होने से रोकता है, घुटनों के कार्टिलेज की लेयर की सुरक्षा करता है और घुटनों के अंदर जो फ्लूड होता है उसकी डेंसिटी बढ़ाता है। 

कब जरूरी है सर्जरी 

कोई भी आर्थोपेडिक सर्जन आपके घुटनों के मूवमेंट और स्ट्रेंथ के आधार पर ही यह निर्धारित करता है कि आपको नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत है या नहीं। घुटनों को पहुंची क्षति को जानने के लिए एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई की मदद भी ली जाती है। कोई भी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर से सभी विकल्पों पर चर्चा करें। अगर समस्या गंभीर नहीं है तो नॉन सर्जिकल उपचारों से आराम मिल सकता है, लेकिन अगर आपके घुटनों में बहुत तकलीफ है, जिसे सर्जरी के बगैर ठीक नहीं किया जा सकता है तो आप आर्थोस्कोपिक सर्जरी, आंशिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी (पार्शियल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी), पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी का विकल्प चुन सकते हैं। 

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प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) 

पीआरपी (प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा  ग्रोथ फैक्टर) घुटनों के ऑस्टियोअर्थराइटिस की रोकथाम और इलाज के लिए एक आधुनिक इलाज है। जिस व्यक्ति का इलाज किया जा रहा है, उसके रक्त से ही इसे तैयार किया जाता है और इसे ज्वाइंट या जोड़ में इंजेक्शन के जरिए लगा दिया जाता है। इसमें कई ग्रोथ फैक्टर्स होते हैं जो सूजन कम करते हैं और हीलिंग की प्रक्रिया को तेज करते हैं। ये इंजेक्शंस युवाओं में अधिक प्रभावी होते हैं जिनका अर्थराइटिस अधिक गंभीर नहीं हैं। 

पीआरपी में सामान्य रक्त की तुलना में 5 गुना अधिक प्लाज्मा होता है। इसके अलावा इसमें प्लेटलेट्स और ग्रोथ फैक्टर भी काफी मात्रा में होता है। इस थेरेपी का आधार यह है कि प्लेटलेट्स घावों के भरने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

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