भारत में डेंगू पर शोध

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 16, 2017

Bharat me dengue par shodh in hindiभारत में डेंगू बुखार एक बहुत ही गंभीर स्वास्थ्य समस्या है पिछले कुछ दशकों में भारत के लग अलग हिस्सों में डेंगू के (>५०) घटनाये सामने आई हैं । इस समस्या की गंभीरता की वजह से भारत और विश्व में कई जगह डेंगू विषाणु पर कई अध्ययन हो रहे हैं ताकि डेंगू बुखार की समस्या को समझा जा सके और इसके वाहक के पैदा होने और फैलाव की घटनाओं को जांचा जा सके , विषाणु के अध्ययन को समझा जा सके और इसके टीके का विकास किया जा सके ।

एडीस इजिप्टी मच्छर

डेंगू के वाहक के फैलाव और इसके पैदा होने के अध्ययनों से यह पता चला है की एडीस इजिप्टी का जनन जून में चालू होता अहि (मतलब बरसत के मौसम के शुरू होने के वक्त ) । कुछ जगह में एडीज इजिप्टी का अर्बन हाउस सूचक बारिश के पहले बारिश के बाद की अपेक्षा ज्यादा पाया गया है ।यह बारिश के पहले पानी की कमी की वजह से हो सकता अहि जिसकी वजह से ज्यदा से ज्यादा पानी इकठ्टा हो जता है जिसकी वजह से डेंगू का वाहक इंसानी जनसंख्या में बढ़ता है । यह बात की एडीज इजिप्टी सूचक जून से बढ़ता है (और कुछ हिस्सों में बारिश के मौसम से पहले) , तो इसलिए इस समय में डेंगू से बचाव और इसके निवारण के तरीके निकाले जा सकते हैं और इस समय वाहक पर निगरानी करके और बारिश के मौसम पर इसके नियंत्रण के तरीके अपना कर हम डेंगू को नियंत्रण में रख सकते हैं ।

डेंगू का टीका

आज डेंगू का कोई टीका नहीं है हालाँकि डेंगू का टीका बनाने की कोशिश १०४० से ही चालू हो गयी थी पर अभी तक इसका टीका नहीं बन पाया है ।एक सफल टीका बनाने के लिए कई अध्ययन किये गए लकिन भी तक सफलता नहीं मिल पाई है ।डेंगू का सफल टीका बनाने में कई समस्या आती हैं जैसे की :

  • डेंगू चार तरह के डेंगूविषाणु की वजह से होता अहि (डीईएन-१ , डीईएन-२ , डीईएन-३ और डीईएन-४ _तो इसलिए एक प्रभावशाली टीका एक साथ इन चार प्रकार के विषाणु के विरूद्ध प्रतिरोध बनाए ।
  • किसी भी प्रकार के डेंगू विषाणु के संक्रमण की वजह से डेंगू बुखार हो जाता है और इसके बाद उस प्रकार के संक्रमित विषाणु के विरूद्ध प्रतिरोध विकसित हो जता है (होमोटिपिक प्रतिरक्षा) ।पर किसी भी प्रकार के अन्य डेंगू विषाणु से संक्रमण से (उदहारण डीईएन -१ के बाद डीईएन -४ का संक्रमण ) बहुत ही गंभीर और जानलेवा डेंगू संक्रमण करा सकता अहि (डेंगू हेमोरेजिक फीवर, डेंगूशोक सिंड्रोम) ।तो इसलिए इस टीके के प्रयोग में यह एक चिंता का विषय बना हुआ है की अगर यह सारे चार डेंगू विषाणु से प्रतिरोधक क्षमता नहीं विकसित करता है तो यह गंभीर डेंगू संक्रमण करा सकता अहि ।इसके अलावा सुरक्षित और प्रभावशाली होने के साथ साथ इसका टीका सस्ता भी होना चाहिए ।


कई टीके चिकित्सयी परिक्षण से गुजर रहे हैं लेकिन फिर भी एक सुअर्क्षित और प्रभावशाली टीका नहीं बन पाया अहि ।डेंगू के टीके को विकसित करने के लिए अभी और अध्ययन और शोध की आवश्यकता है ।

 

 

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