इन 5 कारणों से बढ़ रही है बांझपन की समस्या, जानें दूर करने के उपाय

बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी की समस्या पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई है। बैंगलोर स्थित मेडिकल कंपनी इनिटो के सर्वे के अनुसार भारत में लगभग 2 करोड़ 75 लाख जोड़े बांझपन का शिकार हैं, यानी हर 10 में से 1 जोड़ा शादी के बाद बच्चा पैदा करने में सक्षम नहीं

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Mar 01, 2019Updated at: Mar 01, 2019
इन 5 कारणों से बढ़ रही है बांझपन की समस्या, जानें दूर करने के उपाय

बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी की समस्या पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई है। बैंगलोर स्थित मेडिकल कंपनी इनिटो के सर्वे के अनुसार भारत में लगभग 2 करोड़ 75 लाख जोड़े बांझपन का शिकार हैं, यानी हर 10 में से 1 जोड़ा शादी के बाद बच्चा पैदा करने में सक्षम नहीं है। बांझपन के बारे में लोगों के मन में कई गलत धारणाएं हैं, लेकिन चिकित्सक मानते हैं कि ज्यादातर लोगों में बांझपन का कारण उनकी गलत आदतें होती हैं। भारत में बढ़ रहे बांझपन का मुख्य कारण ये 5 बातें हैं।

ज्यादा उम्र में शादी करना

आजकल लड़के-लड़कियां करियर सेट हो जाने और आर्थिक रूप से सक्षम हो जाने के बाद शादी के फैसले ले रहे हैं। यही कारण है कि ज्यादातर लड़के-लड़कियां 30-32 की उम्र तक शादी के बंधन में बंधना चाहते हैं। इसके अलावा शादी के बाद भी वो कुछ समय तक बच्चे की जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं। चिकित्सक मानते हैं कि 35 की उम्र के बाद महिलाओं को मां बनने में सामान्य से ज्यादा मुश्किलें आती हैं। ज्यादातर मामलों में नॉर्मल डिलीवरी के बजाय ऑपरेशन करना पड़ता है और कई जोड़ों में शुक्राणुओं की क्वालिटी भी खराब होने लगती है, जिससे उन्हें प्रेग्नेंसी में परेशानी आती है। दूसरे कारण जो आजकल अधिकांश स्त्रियों में पाये जा रहे हैं वो हैं फाइब्रायड का बनना, एन्डोमैंट्रियम से सम्बन्धी समस्याएं। उम्र के बढ़ने के कारण हाइपरटेंशन जैसी दूसरी समस्याएं भी आ जातीं हैं और इनके कारण महिलाओं में फर्टिलिटी प्रभावित होती है।

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गलत आदतें

आजकल कम उम्र में सिगरेट, शराब, गुटखा और कई बार ड्रग्स की लत भी लड़के-लड़कियों में काफी बढ़ गई है। इन आदतों के कारण भी वीर्य की गुणवत्ता खराब होती है और स्पर्म काउंट कम होता है। यह होने वाले बच्चे में आनुवांशिक तौर पर बदलाव भी कर सकता है । इसी प्रकार से अल्कोहल भी टेस्टोस्टेरॉन के उत्पादन को कम करता है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी प्रकार की दवाओं या ड्रग्स के गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण भी इन्फर्टिलिटी हो सकती है। स्टेरायड जैसे हार्मोन हमारे शरीर के हार्मोन के स्त‍र में बदलाव लाते हैं जो कि हमारे स्वास्‍थ्‍य को भी प्रभावित कर सकते हैं। बीमारी होने पर भी चिकित्सक की सलाहानुसार ही दवाएं लेनी चाहिए।

काम का बोझ

आजकल लगभग हर सेक्टर में काम और सफलता का दबाव पहले से ज्यादा बढ़ गया है। इस कारण से लोग ओवर टाइम, नाइट शिफ्ट या घर पर काम करने को मजबूर होते हैं। काम के साथ-साथ शरीर के लिए आराम भी बहुत जरूरी है। समय कम होने के कारण लोग न तो एक्सरसाइज करते हैं और न ही अपने खानपान पर ध्यान दे पाते हैं। इन कारणों से भी धीरे-धीरे व्यक्ति के स्पर्म की क्वालिटी पर असर पड़ता है।

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लोगों में बढ़ती बीमारियां

हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर), डायबिटीज, मोटापा जैसी समस्या आजकल युवाओं में भी आम हो गयी है। इनका प्रभाव व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ पर भी पड़ता है । डायबिटीज़, पी सी ओ डी (पॉलीसिस्टिक ओवरियन डिज़ीज़) के कारण महिलाओं मे बहुत सी बीमारियां आम हो गयी हैं । 60 से 70 प्रतिशत महिलाओं में ओवुलेशन की क्रिया ही नहीं होती । वज़न का बढ़ना और व्यायाम की कमी के कारण भी सही मात्रा में हार्मोन नहीं बन पाते। बचपन से ही लोगों में कंप्‍यूटर और लैपटाप पर बैठना आम है और यह कारण भी कहीं ना कहीं इन्फर्टिलिटी के जि़म्मेदार होते हैं।

प्रदूषण और शहरी वातावरण

शहरी वातावरण में बढ़ते प्रदूषण और टाक्सिन ने 45 से 48 प्रतिशत इन्फर्टिलिटी के मामले बढ़ा दिये हैं। जीवनशैली में बदलाव और खानपान की गलत आदतें भी अप्रत्यक्ष रूप से इन्फर्टिलिटी की जि़म्मेदार हैं। पेस्टिसाइड और प्लास्टिक का खानपान के दौरान हमारी फूड चेन में आना हार्मोन के स्तर को प्रभावित करता है। यूनिवर्सिटी आफ नार्थ कैरालिना, चैपल हिल के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि वो महिलाएं जो नाइट शिफ्ट में काम करती हैं उनमें समय से पहले प्रसव की सम्भावना रहती है ।

कैसे दूर करें बांझपन?

बांझपन या इन्फर्टिलिटी दूर करने के लिए जरूरी है कि आप अभी से अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें। शुरुआत से अपना मोटापा, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखें। सिगरेट, शराब, तंबाकू उत्पादों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें। खानपान में पौष्टिक आहार शामिल करें और रोज थोड़ी एक्सरसाइज जरूर करें।

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