महिलाओं में इन्फर्टिलिटी को दूर करते हैं ये 3 योगासन, हार्मोन्स को करते हैं बूस्ट

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 11, 2018
Quick Bites

  • स्ट्रेस और हार्मोनल असंतुलन के कारण भी हो सकती है इन्फर्टिलिटी।
  • योगासन के द्वारा इन्फर्लिटी को दूर किया जा सकता है।
  • ये योगासन गर्भाशय में रक्त प्रवाह बेहतर करते हैं और अक्षमता दूर करते हैं।

 

कई महिलाएं इन्फर्टिलिटी के कारण मां बनने के सुख से वंचित रह जाती हैं। अगर आपको गर्भाशय संबंधित कोई रोग नहीं है लेकिन फिर भी आप मां नहीं बन रही हैं, तो योगासन आपकी मदद कर सकता है। दरअसल इन्फर्टिलिटी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें गर्भाशय के रोगों के अलावा स्ट्रेस, हार्मोनल असंतुलन आदि भी शामिल हैं। योगासन द्वारा आप इन समस्याओं को आसानी से ठीक करके संतान सुख प्राप्त कर सकती हैं। दरअसल कई ऐसे योगासन हैं, जिनके अभ्यास से गर्भाशय में रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है, इम्यून सिस्टम बेहतर हो जाता है और तनाव से छुटकारा मिलता है। आइए आपको बताते हैं कि कौन से योगासन इन्फर्टिलिटी दूर करने के लिए हैं फायदेमंद।

अर्ध चक्रासन का अभ्यास

अर्ध चक्रासन बहुत फायदेमंद योगासन है, जिसके लाभ पूरे शरीर को मिलते हैं। चक्रासन को उन महिलाओं के लिए बहुत लाभप्रद माना जाता है, जिन्हें संतान नहीं हो रहा है। दरअसल इसके अभ्यास से शरीर के सभी अंगों की मांसपेशियों में रक्त का संचार बेहतर होता है और सभी ग्लैंड्स अच्छी तरह हार्मोन्स का स्राव शुरू कर देते हैं। इस तरह करें चक्रासन-

  • सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं।
  • अपने घुटनों को इस तरह मोड़ें कि आपकी एड़ियां नितंबों (हिप्स) को स्पर्श करें।
  • अब बाहें उठाकर कोहनियों को इस तरह मोड़ें की हथेलियां आपके कान के सामने जमीन पर लगी हों।
  • अब सांसों को अंदर खींचते हुए शरीर (धड़) को ऊपर उठाते हुए पीठ से अर्धचक्र (हाफ़ सर्कल) बनाएं।
  • जितनी देर रुक सकती हैं इस पोजीशन में रुकें उसके बाद फिर पहले वाली पोजीशन में आ जाएं।
  • अब इसी क्रिया को कम से कम 4-5 बार रोज करें।

बालासन का अभ्यास

बालासन का अभ्यास भी आपके गर्भाशय के लिए बहुत फायदेमंद है। इसे करते समय आपकी आकृति छोटे बालक के समान हो जाती है इसलिए इसे बालासन कहते हैं। बालासन से आपके गर्भाशय पर दबाव पड़ता है, जिससे अक्षमताएं दूर होती हैं और गर्भवती होने के चांस बढ़ जाते हैं।

  • बालासन को करने के लिए सबसे पहले घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं
  • शरीर का सारा भार एड़ियों पर डाल दें।
  • अब गहरी सांस भरते हुए आगे की ओर झुकें।
  • ध्यान रहे कि आपका सीना जांघों से छूना चाहिए।
  • अब अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद वापस सामान्‍य अवस्‍था में आ जाएं।

नौकासन का अभ्यास

नौकासन बहुत आसान आसन है इसलिए इसका अभ्यास वो लोग भी कर सकते हैं, जिनका वजन ज्यादा है। इस आसन से भी आपके गर्भाशय पर दबाव पड़ता है, जिससे गर्भवती होने में आने वाली समस्याएं दूर हो जाती हैं। इस आसन को नौकासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका आकार नाव की तरह का होता है। इसे इस तरह करें-

  • सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं।
  • अपने हाथ जांघ के बगल में रखें और शरीर को एक सीध में रखें।
  • फिर अपने शरीर को ढीला छोड़े और सांस पर ध्यान दें।
  • अब आप सांस लेते हुए अपने सिर, पैर, और पूरे शरीर को 30 डिग्री पर उठायें।
  • ध्यान रहे आपके हाथ ठीक आपके जांघ के ऊपर हों।
  • धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ें, इस अवस्था को अपने हिसाब से बनाये रखें।
  • जब अपने शरीर को नीचे लाना हो तो लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए सतह की ओर आयें।
  • शुरुआती दौर में 3 से 5 बार करें।
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