स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से अच्‍छा नहीं ऑर्थोरेक्सिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 20, 2014
Quick Bites

  • स्‍वस्‍थ आहार के प्रति अधिक जुनुनी होना है आर्थोरेक्सिया।
  • इससे ग्रस्‍त व्‍यक्ति फैट, चीनी, नमक आदि से दूर रहता है।
  • ऐसे लोग खाने के बारे में अधिक देर तक सोचते हैं।
  • बाहर का और दूसरों द्वारा पकाया खाना नहीं पसंद करते।

यह बात सही है कि हर कोई स्वस्थ खाद्य पदार्थों के चयन पर अधिक ध्‍यान देकर इसका फायदा उठाना चाहता है। लेकिन स्‍वस्‍थ आहार की जरूरत से ज्‍यादा खोज भी कई बार बीमारी का कारण बन जाती है। जी हां, ऑर्थोरेक्सिया एक ऐसी ही अवस्‍था है। इस अवस्‍था में व्‍यक्ति स्‍वस्‍थ आहार की खोज में जुनूनी व्‍यवहार करने लगता है। ऑर्थोरेक्सिया से पीड़ि‍त व्‍यक्ति में तनावग्रस्‍त हो जाता है, वह अक्‍सर एनोरेक्सिया नर्वोसा या अन्‍य खाने संबंधित विकार हो जाते हैं। यह समस्‍या महिलाओं में ज्‍यादा देखने को मिलती है।

orthorexia in hindi


ऑर्थोरेक्सिया से पीड़ि‍त व्‍यक्ति वजन पर ध्‍यान न देकर खाने पर अधिक ध्‍यान देता है, उसका ध्‍यान सही और स्‍वस्‍थ आहार की खोज और उनका सेवन करने में अधिक रहता है न कि फिटनेस में। ऐसे लोग खुद को शुद्ध और स्‍वस्‍थ होने की भावना देने वाले खाद्य पदार्थों पर स्थिर कर लेते हैं। आर्थोरेक्सिया से ग्रस्‍त लोगों के व्‍यवहार और आदतों के बारे में अधिक जानिये इस लेख में।

ऐसे आहार से बचते हैं

  • कृत्रिम रंग होता है
  • कीटनाशक होते हैं
  • फैट, चीनी या नमक हो
  • एनिमल या डेयरी उत्पाद
  • अस्वस्थ मानी जाने वाली अन्य सामग्री।

ऑर्थोरेक्सिया के लक्षण

  1. अस्‍थमा, पाचन समस्‍याओं, मूड में कमी, चिंता और एलर्जी जैसी स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याएं।
  2. चिकित्सक की सलाह के बिना, खाद्य एलर्जी से बचने के लिए खाद्य-पदार्थों से बचाव के तरीकों को खोजना।
  3. हर्बल उपचार या प्रोबायोटिक्‍स/माइक्रोबायोटिक्‍स जैसे उत्‍पाद के इस्‍तेमाल में वृद्धि करना।
  4. ऑर्थोरेक्सिया से पीड़ि‍त लोग 10 खाद्य पदार्थों से अधिक का उपभोग नहीं कर सकते।   
  5. भोजन तैयार करने की तकनीक के अलावा अधिक तर्कहीन चिंता, विशेष रूप से खाद्य पदार्थों को धोना या बर्तन को स्टेरलाइज करना।

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बुलिमिया या एनोरेक्सिया से पीड़ि‍त महिला की तरह, ऑर्थोरेक्सिया से पीड़ि‍त महिला को भी लगता है कि उसका खाने के प्रति जुनून रोजमर्रा की गतिविधियों में बाधा बन रहा है। इससे पीडि़त व्‍यक्ति का जूनून इतना हावी हो जाता है कि वह खाने को लेकर अधिक संवेनदनशील हो जाता है।

 

  • स्‍वस्‍थ आहार के दिशा निर्देशों से हटने पर अपराध की भावना महसूस करना।  
  • खाने को लेकर अधिक देर तक सोचना।
  • नियमित रूप से अगले दिन के भोजन की योजना बनना।
  • स्‍वस्‍थ आहार खाने के बाद संतुष्टि, सम्मान या आध्यात्मिक पूर्ति जैसी भावनाओं को महसूस करना।
  • स्‍वस्‍थ आहार का पालन न करने वालों के प्रति अपेक्षा की भावना रखना।
  • घर से दूर होने पर स्‍वस्‍थ आहार योजना पालन न रख पाने का डर।  
  • खाने के बारे इसी तरह के विचार ना रखने वाले दोस्‍तों या परिवार के सदस्‍यों से दूरी।
  • बाहर के खाने और दूसरों द्वारा पकाये गये खाने से दूरी।
  • अवसाद, मिजाज या चिंता का बिगड़ना।  

ऑर्थोरेक्सिया के प्रभाव

ऑर्थोरेक्सिया के लक्षण जीर्ण, गंभीर और एक अच्‍छी जीवनशैली की पसंद से परे होते है। ऑर्थोरेक्सिया में स्वस्थ भोजन के प्रति जुनून के बढ़ने पर व्‍यक्ति समाज और परिवार से दूरी बनाने लगता है। इस समस्‍या के होने पर ऑर्थोरेक्सिया ईटिंग डिसऑर्डर जैसे बुलिमिया या एनोरेक्सिया के करीब ले जाता है। ऐसे लोग खुद को दूसरों से बेहतर समझने लगते हैं। ऐसा करना परिवार और दोस्‍तों के साथ संबंधों पर दबाव डालता है और रिश्‍ते आहार पैटर्न की तुलना में कम महत्‍वपूर्ण हो जाते हैं।

इस समस्‍या से लोगों को भरपूर मात्रा में कैलोरी नहीं मिलती है जिसके कारण वे कुपोषण के साथ दिल के मरीज भी हो सकते हैं, इसलिए खुद से अपना डायट चार्ट बनाने की बजाय चिकित्‍सक की सलाह से बने डायट चार्ट का पालन करें।

Image: Getty


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