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अस्थमा शवसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जिसमें मरीज को सांस लेने में समस्या होती है। इस बीमारी के एक बार हो जाने पर इससे हमेशा के लिए छुटकारा पाना नामुमकिन होता है। लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरत कर और हमेशा समय पर दवाई लेकर दमा के मरीज सामान्य जीवन जी लेते हैं। किंतु कई बार ऐसे कई केस में देखने को आता है कि दमा में सुधार आते ही लोग दवाई लेना छोड़ देते हैं। ये बहुत ही गलत है।
दमा का इलाज बीच में छोड़ना फायदे की जगह कई सारे नुकसान पहुंचाता है। सही समय पर इलाज शुरू कर दमा से छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन कई बार लोग दमा के लक्षणों में फायदा दिखते ही दवई लेना बंद कर देते हैं। इससे मरीज को और अधिक नुकसान होने लगता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानें।
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दमा क्या है
सबसे पहले जानते हैं कि दमा क्या है? दमा श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जिसमें मरीज को सांस लेने में समस्या होती है। इसमें मरीज की श्वसन नली में सूजन आ जाती है जिसके कारण नली सिकुड़ जाती है। नली के सिकुड़ने से मरीज को छोटे-छोटे टुकड़ों में सांस लेना पड़ता है। इससे छाती में उचित मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जिससे सांस उखड़ने लगती है।
यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। बड़ों में ये बीमारी काफी देखी जाती है। लेकिन शहरीकरण के दौर में और फास्ट लाइफस्टाइल के कारण बच्चों में भी ये बीमारी आम तौर पर देखने को मिल रही है।
अगर आपके परिवार में अस्थमा का कोई मरीज हो तो इसके लक्षण अन्य सदस्यों में भी देखने को मिलते हैं।
कभी ठीक नहीं होता
- अस्थमा के लिए सबसे पहले जरूरी है कि इसके लक्षण दिखते ही इसका इलाज शुरू कर दिया जाए।
- दूसरा, अस्थमा कभी भी ठीक नहीं होता।
- इसका ट्रीटमेंट सारी उम्र चलता रहता है।
लेकिन कई बार लोग इसके लक्षणों में सुधार देखते ही इसका इलाज लेना बंद कर देते हैं। जो कि अस्थमा की बीमारी होने से ज्यादा खतरनाक स्थिती होती है। क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार इसके लक्षणों का ना दिखने का मतलब ये नहीं कि आपकी अस्थमा की बीमारी ठीक हो गई है।
होता है ये खतरा
अस्थमा के ट्रीटमेंट और उसे मैनेज करने के दौरान सबसे बड़ी दिकक्त ये आती है कि इसके लक्षण शुरुआत के काफी समय में दिखाई नहीं देते। जिससे लोगों को लगता है कि अस्थमा ठीक हो गया है। औऱ वो ऐसा सोचकर इलाज करवाना बंद कर देते हैं। जिससे अस्थमा का अटैक पहले से दुगने ज्यादा प्रभाव के साथ पड़ने का खतरा होता है।
दरअसल जब इसका इलाज बीच में बंद कर दिया जाता है तो ये बीमारी दोबारा काफी गंभीर रूप में सामने आती है और इसके लक्षण दोगुने प्रभाव से उभरकर सामने आते हैं। इसलिए अस्थमा का इलाज बीच में छोड़ने से पहले अपने चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
दमा का इलाज अधूरा छोड़ने के बारे में एम्स (अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान) के पल्मोलोजी व निंद्रा विकार विभाग के हेड डॉ. रनदीप गुलेरिया कहते हैं, “अस्थमा दीर्घकालिक बीमारी है जिसे लंबे समय तक इलाज की जरूरत होती है। कई रोगी जब खुद को बेहतर महसूस करते हैं तो वह इनहेलर लेना छोड़ देते हैं। ये खतरनाक भी हो सकता है क्योंकि आप उस इलाज को बीच में छोड़ रहे हैं जिससे आप फिट और स्वस्थ रहते हो. रोगियों को इंहेलर छोड़ने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. अपनी मर्जी से इंहेलर छोड़ना जोखिमभरा हो सकता है। ”
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