मंकी मलेरिया क्या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 19, 2011

Monkey malariaआमतौर पर मलेरिया एनोफिलिस मादा मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर प्लाज्मोडियम नामक जीवाणु को शरीर में पहुँचाते है। ऐसा माना जाता है कि मंकी मलेरिया पहले बंदरों में पाया जाता था और अब इंसानों में । रिसर्च के मुताबिक भी आमतौर पर ये परजीवी बंदरों में मलेरिया फैलाते है लेकिन अब ये मलेरिया बंदरों के साथ-साथ मनुष्यों  में भी पनपने लगा है। जिसे मंकी मलेरिया कहा जाता है। हालांकि अभी तक इसके स्‍पष्‍ट कारण का पता नहीं चल पाया है कि मनुष्यों  में इस परजीवी के फैलने के क्या कारण है। आइए जानते है मंकी मलेरिया के जोखिम कारको को।

 

  • विशेषज्ञों के मुताबिक इस वायरस से इंफेक्शन के बाद बॉडी में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आ जाती है। इससे इंसान की मौत भी हो सकती है।
  • मंकी मलेरिया जिसे पी. नोलेसी भी कहा गया है और यह काफी घातक है। अब के समय में मंकी मलेरिया से इंसानों को ज्‍यादा खतरा  है। यह वायरस खून में 24 घंटे में दोबारा पैदा हो जाता है, इसलिए इसे कंट्रोल करना मुश्किल है।
  • मंकी मलेरिया से ग्रसित अधिकतर मरीज जहां दवाइयों से ठीक हो जाते है, वही लेकिन 10 में से एक मरीज में कई तरह के कॉम्पलीकेशंस भी देखने को मिलते है। इन कॉम्पलीकेशंस में सांस लेने में तकलीफ और किडनी की समस्या ज्यादा दिखाई पड़ती है। जिससे रोगी की मौत का खतरा भी बना रहता है।
  • मंकी मलेरिया के लक्षण पी. मलेरी जैसे ही होते हैं, इसलिए इसे आम मलेरिया भी समझ लिया जाता है।
  • मंकी मलेरिया के लक्षणों में सिर दर्द, उल्टी, बुखार और फ्लू आदि होते है। लेकिन लगातार ब्लहड प्लेटलेट्स के कम होने से मनुष्य की हालत जल्दी बिगड़ जाती है, जो कि मंकी मलेरिया के जोखिम कारको में से एक है।
  • आमतौर पर मंकी मलेरिया का उपचार पी. मलेरी की तरह ही होता है, लेकिन इसके लिए अभी और भी शोध जारी है। लेकिन क्लोरोक्वीन और कुनैन का मंकी मलेरिया को रोकने में उपयोग किया जाने लगा है।

अगर आपको कंपकंपी के साथ तेज़ बुखार आ रहा है, तो देर ना करें, चिकत्सकीय जांच करायें ।

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