शहरों के पर्यावरण में घुले जहरीले पार्टिकल्स से 30 प्रतिशत बढ़ा हृदय रोगों का खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 04, 2018

सुविधाएं देखकर लोग शहरों की तरफ भले आकर्षित होते हैं मगर ताजा अध्ययन बताते हैं कि शहरों में रहने वाले लोगों की जिंदगी गांवों में रहने वालों की तुलना में कम हो जाती है। शहरों के पर्यावरण में मौजूद लेड, आर्सेनिक, कॉपर और कैडमियम जैसे जहरीले धातुओं के कारण दिल की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस अध्ययन के मुताबिक इन धातुओं के कारण दिल के रोगों का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ा है जबकि कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा 23 प्रतिशत तक बढ़ रहा है।

भारत में होंगे सबसे ज्यादा दिल के मरीज

अध्ययन के मुताबिक पर्यावरण में घुले इन तत्वों और शहरों में बढ़ती आबादी के कारण जल्द ही भारत में सबसे ज्यादा हृदय रोगियों की संख्या होगी। भारत में 40 से 50 साल की उम्र के 25 प्रतिशत से ज्यादा लोग हृदय की अलग-अलग बीमारियों से ग्रसित हैं। हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के अनुसार डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और ये बीमारियां एक दिन महामारी का रूप ले लेंगी। शहरों में रहने वाले लोगों में गांवों में रहने वालों की तुलना में इन बीमारियों का खतरा 3 गुना ज्यादा होता है क्योंकि शहरों में लोग जिंदगी तनाव, भाग-दौड़ और व्यस्त दिनचर्या के बीच गुजरती है। इसलिए लोगों के पास शारीरिक गतिविधियों के लिए समय नहीं होता है।

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दिल पर होता है प्रदूषण का प्रभाव

वायु प्रदूषण से लोगों में ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक के खतरे ज्यादा होते है। एक शोध की मानें तो वायु प्रदूषण से फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के साथ ही हृदय पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। शोध के मुताबिक हवा में मौजूद सूक्ष्म कण हृदय की कार्यप्रणाली पर बुरा असर डालते हैं। जिसके कारण उसकी इलेक्ट्रानिक सिग्नल देने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में हृदय रोग से पीडि़त मरीजों के हृदय की क्रियाशीलता में प्रदूषण की वजह से आने वाले परिवर्तन की जांच की।

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प्रदूषण से दवाओं का असर कम

क्या आप जानते हैं कि वायु प्रदूषण से जीवाणुओं की क्षमता में वृद्धि होने जाने से सांस संबंधी संक्रमण के इलाज में दी जाने वाली एंटीबॉयोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं। यह बात एक शोध में सामने आई। हम कई बार छोटी-छोटी बीमारियों के लिए दवाई खा लेते हैं कि लेकिन उनका कितना असर हमारे शरीर पर होता है, वह नहीं जान पाते। वायु प्रदूषण की वजह से अब ये सभी दवाइयां बेअसर होने लगी हैं। वायु प्रदूषण का प्रमुख घटक कार्बन है। यह डीजल, जैव ईंधन व बायोमास के जलने से पैदा होता है। शोध से पता चलता है कि यह प्रदूषक जीवाणु के उत्पन्न होने और उसके समूह बनाने की प्रक्रिया को बदल देता है। इससे उनके श्वसन मार्ग में वृद्धि व छिपने और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से लड़ने में सक्षम हो जाता है।

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